केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत आम बजट 2013-14: एक नजर में

केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम द्वारा आम बजट 2013-14 लोकसभा में प्रस्तुत. राजस्‍व घाटा सकल घरेलू उत्‍पाद के 4.8 प्रतिशत पर रहने का अनुमान.

Created On: Feb 28, 2013 17:45 ISTModified On: Mar 1, 2013 17:35 IST

केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम (पलानीअपन चिदंबरम) ने आम बजट 2013-14 को लोकसभा में 28 फरवरी 2013 को प्रस्तुत किया. यह उनका अपना 8वां एवं देश का 82वां बजट है. वित्तवर्ष 2013-14 के केंद्रीय बजट में मुख्य रूप से आर्थिक विकास में तीव्र वृद्धि के महत्त्व के साथ बुनियादी ढांचे के विकास, कौशल विकास, रोजगार सृजन और सामाजिक योजनाओं के लिए धन पर बल दिया गया.

वर्ष 2013-14 के आम बजट की मुख्‍य विशेषताएं:
• 2013-14 में राजस्‍व घाटा सकल घरेलू उत्‍पाद के 4.8 प्रतिशत पर रहने का अनुमान.
• आयोजना व्‍यय के लिए 555322 करोड़ रुपए का अनुमान. कुल व्‍यय के अनुपात के रूप में यह 33.3 प्रतिशत है.
• आयोजना से भिन्‍न व्‍यय के लिए 1109975 करोड़ रुपए का अनुमान.
• महिलाओं से संबंधित कार्यक्रमों के लिए 97134 करोड़ रूपए का आवंटन.
• बच्‍चों से संबंधित कार्यक्रमों के लिए 77236 करोड़ रूपए का आवंटन.
• बालिकाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए 1000 करोड़ रूपए की निर्भया निधि.
• सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के रूप में भारत का पहला महिला बैंक बनाने का प्रस्‍ताव.
• प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण योजना यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान देशभर में लागू करने का निर्णय.
• कृषि ऋण के लिए 2013-14 में 700000 करोड़ रूपए का प्रावधान.
• पूंजी निर्माण के लिए बैंकों को 14000 करोड़ रूपए देने का प्रस्‍ताव.
• सामाजिक क्षेत्र के आवंटन में महत्त्वपूर्ण वृद्धि, ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए 46 प्रतिशत वृद्धि के साथ 80194 करोड़ रूपए का आवंटन.
• शहरी आवास निधि की स्‍थापना का प्रस्‍ताव.
• जीवन और साधारण बीमा के प्रसार में वृद्धि के लिए बहु-स्‍तरीय दृष्टिकोण.
• बैंको को बीमा ब्रोकरों के रूप में काम करने की अनुमति.
• 10000 तक आबादी वाले हर कस्‍बे में होगा एलआईसी और साधारण बीमा का कार्यालय.
• विदेशी निवेशकों के प्रवेश की प्रक्रिया सरल बनाई जाएगी.
• लघु एवं मध्‍यम उद्यमों को बिना शर्त एसएमई एक्‍सचेंज में सूचीबद्ध होने की अनुमति दी जाएगी.
• अपशिष्‍ट से ऊर्जा बनाने की परियोजनाएं लागू करने वाली नगरपालिकाओं को सहायता.
• पन-बिजली परियोजनाओं के लिए सृजन आधारित प्रोत्‍साहन के लिए 800 करोड़ रुपये का प्रावधान.
• वर्ष 2013-14 में 90 लाख व्‍यक्तियों सहित 12वीं योजना में 5 करोड़ लोगों को कौशल प्रदान करने का लक्ष्‍य.
• रक्षा के लिए 203672 करोड़ रुपये का आवंटन.
• चार उत्‍कृष्‍ट संस्‍थानों को 100-100 करोड़ रुपये का अनुदान.
• पटियाला में 250 करोड़ रुपये की लागत से राष्‍ट्रीय खेल प्रशिक्षण संस्‍थान बनाने का प्रस्‍ताव. 
• एक लाख से अधिक आबादी वाले सभी शहरों में निजी एफएम रेडियो खोलने का प्रस्‍ताव   
• 2013-14 में करीब 839 एफएम चैनलों की नीलामी.
• राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान के लिए अतिरिक्‍त 200 करोड़ रुपये का प्रस्‍ताव.
• डाक नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए 532 करोड़ रुपये का आवंटन.
• पांच लाख रुपये तक की आय वाले प्रति व्‍यक्ति को दो हजार रुपये की कर छूट का प्रस्‍ताव.
• प्रति वर्ष एक करोड़ रुपये से अधिक कर योग्‍य आय वाले व्‍यक्तियों पर दस प्रतिशत का अधिभार लगाने का प्रस्‍ताव.
• दस करोड़ रुपये से अधिक कर योग्‍य आय वाली घरेलू कंपनियों पर अधिभार पांच से बढ़ाकर दस प्रतिशत करने का प्रस्‍ताव.
• नि:शक्‍त अथवा कतिपय बीमारियों से ग्रस्‍त व्‍यक्तियों के लिए जीवन बीमा पॉलिसी की पात्रता शर्तों को शिथिल करने का प्रस्‍ताव.
• केन्‍द्र और राज्‍य सरकार की योजनाओं में किये गए अंशदान को आयकर अधिनियम की धारा 80 घ के तहत छूट.
• राष्‍ट्रीय बाल निधि में किये गए दान पर शत प्रतिशत की छूट.
• 25 लाख रुपये तक के आवास ऋण पर कर छूट का प्रस्‍ताव.
• शेयर धारकों को वितरित लाभों पर 20 प्रतिशत की दर से अंतिम विदहोल्डिंग कर का प्रस्‍ताव.
• 50 लाख रुपये से अधिक मूल्‍य वाली अचल संपत्तियों के हस्‍तांतरण मूल्‍य पर एक प्रतिशत की दर से टीडीएस का प्रस्‍ताव.
• 800 सीसी या इससे अधिक क्षमता के इंजन वाली मोटरसाइकलों और ऐसी ही नावों एवं जलयानों पर सीमा शुल्‍क में वृद्धि का प्रस्‍ताव.
• दो हजार रुपये से अधिक मूल्‍य वाले मोबाइल फोनों पर उत्‍पाद शुल्‍क वृद्धि का प्रस्‍ताव.
• सेट टॉप बॉक्‍स पर शुल्‍क पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत.
• स्‍वैच्छिक अनुपालन प्रोत्‍साहन योजना आरंभ करने का प्रस्‍ताव.
• उत्‍पाद शुल्‍क और सेवा कर की सामान्‍य दरों में कोई बदलाव नहीं.
• गैर-कृषि उत्‍पादों के लिए बुनियादी सीमा शुल्‍क की उच्‍चतम दर में भी कोई बदलाव नहीं. 
• प्रतिभूति संव्‍यवहार कर (एसटीटी) में कटौती.
• कर शासन सुधार आयोग का गठन किया जाएगा.
• रेडिमेड गारमेंट उद्योग, हस्‍त निर्मित कारपेट, पोत निर्माण को उत्‍पाद शुल्‍क से राहत.
• सिगरेट, सिगार आदि पर विशिष्‍ट उत्‍पाद शुल्‍क में बढोत्तरी.
• महंगे मोबाइल फोनों, एसयूवी पर भी उत्‍पाद शुल्‍क में वृद्धि.
• आयातित विलासिता वाली वस्‍तुओं जैसे अधिक क्षमता के मोटर वाहन, मोटरसाइकल आदि पर सीमा शुल्‍क बढ़ा.
• पर्यावरण अनुकूल वाहनों में उपलब्‍ध रियायत की अवधि को बढ़ाने का प्रस्‍ताव.
• वायु यान निर्माण, मरम्‍मत और जीर्णोद्धार उद्योग को भी राहत का प्रस्‍ताव.
• वैध यात्रियों की आभूषण लाने की शुल्‍क मुक्‍त सीमा में विस्‍तार.
• सड़क निर्माण के क्षेत्र में विनियामक प्राधिकरण का गठन.
• स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के लिए 37330 करोड़ रूपये का आवंटन.
• नव राष्‍ट्र स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के लिए 21239 करोड़ रूपये का आवंटन.
• मेडिकल शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए 4727 करोड़ रूपये का आवंटन.
• वृद्ध जनों के स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल के राष्‍ट्रीय कार्यक्रम के लिए 150 करोड़ रूपये.
• सर्वशिक्षा अभियान के लिए 27258 करोड़ रूपये का आवंटन.
• पेयजल तथा स्‍वच्‍छता मंत्रालय के लिए 15260 करोड़ रूपये का आवंटन.
• जवाहरलाल नेहरू राष्‍ट्रीय शहरी ग्रामीण मिशन के लिए 14873 करोड़ रूपये का आवंटन.
• कृषि अनुसंधान के लिए 3415 करोड़ रूपये का आवंटन.
• मध्‍याहन भोजन योजना के लिए 13215 करोड़ रूपये का आवंटन.

विदित हो कि अगस्त 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वर्ष 2013 के मध्य देश में अब तक 25 मंत्रियों ने वित्त मंत्रालय का प्रभार सम्भाला. इस दौरान 81 बार बजट पेश किए गए, जिनमें से 65 साधारण वार्षिक बजट (आम बजट), 12 अंतरिम बजट और 4 विशेष अवसर के बजट थे, जिसे छोटा बजट भी कहा जाता है.
 
वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने पहला आम बजट संयुक्त मोर्चे की सरकार में वर्ष 1996-97 के लिए वर्ष 1996 में पेश किया था. इसके बाद वित्तमंत्री पी चिंदबरम ने वर्ष 1997, 2004, 2005, 2006, 2007 और 2008 में बजट किया.

 
पेशे से वकील और तमिलनाडु के मूल निवासी पी चिदंबरम ने वर्ष 1972 में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की. वर्ष 1984 में पहली बार वे शिवगंगा संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए. वर्ष 1990 में उनहोंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया.  और वह वर्ष 2004 में कांग्रेस में पुनः शामिल हुए.

पी चिदंबरम से पहले बजट पेश करने वाले वित्तमंत्रियों में से मोरार जी देसाई, चरण सिंह, वीपी सिंह और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें, जबकि प्रणब मुखर्जी और आर वेंकटरमण राष्ट्रपति.

पूर्व प्रधानमंत्री मोराजी देसाई जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में 5 वर्ष जबकि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 3 वर्ष देश के वित्तमंत्री रहे. उन्होंनें सर्वाधिक 10 बार आम बजट प्रस्तुत किया था. वर्ष 1964 और 1968 में वित्तमंत्री मोरारजी देसाई ने आम बजट अपने जन्म दिन के अवसर पर प्रस्तुत किया था.

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