Search

केंद्र सरकार द्वारा मैगी के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 12(1) (डी) के तहत शिकायत दर्ज

केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने 3 जून 2015 को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में नेस्ले कंपनी के ब्रांड मैगी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई

Jun 6, 2015 14:12 IST

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986 की धारा 12(1)(डी): यह सरकार को उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने का अधिकार प्रदान करता है.

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986 की धारा 12(1)(डी) इसलिए चर्चा में रहा क्योंकि केंद्र सरकार ने इसके अंतर्गत पिछले तीन दशक बाद पहली बार कोई शिकायत दर्ज की.

केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने 3 जून 2015 को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में नेस्ले कंपनी के ब्रांड मैगी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई.


सरकार ने मैगी में तयशुदा सुरक्षा मानकों से अधिक स्तर पर लीड तथा ग्लूटामेट (एमएसजी) पाए जाने पर यह निर्णय लिया.

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 12 (1) (डी), 1986 के अनुसार किसी कंपनी द्वारा बेचे गए माल, बेचने के लिए किये गए अनुबंध अथवा डिलीवरी किये गए सामान में शिकायत पाए जाने पर केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार जिला कार्यालय के सम्मुख शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.

मैगी प्रकरण

स्वास्थ्य मंत्रालय की संस्था भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की जांच के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने मैगी का उत्पादन और बिक्री रोकने का आदेश दिया. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की संस्था की जांच में मैगी में 9 तरह के हानिकारक पदार्थ पाए गए हैं. इसमें तयशुदा सुरक्षा मानकों से अधिक स्तर पर लीड तथा ग्लूटामेट (एमएसजी) पाए जाने पर इसपर रोक लगाने का आदेश दिया गया.


एमएसजी

एमएसजी एक तरह का एमीनो एसिड होता है जो कई खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है जैसे मशरूम, टमाटर, चावल का माड़ और सिरका. एमएसजी को ग्लूटामेट एसिड से आर्टिफिशियल तरीके से बनाया जाता है, ग्लूटामेट हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है. ग्लूटामेट की मात्रा बढ़ जाए तो न्यूरॉन कोशिकाएं खत्म होने लगती हैं. एमएसजी मिला हुआ खाना खाने से शरीर में इसकी मात्रा 20 गुना तक बढ़ सकती है जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है.

Now get latest Current Affairs on mobile, Download # 1  Current Affairs App