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केंद्र सरकार ने ‘मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक एवं शिक्षण मिशन’ योजना का आरंभ किया

केंद्र सरकार ने 25 दिसंबर 2014 को ‘मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक एवं शिक्षण मिशन’ योजना का आरंभ किया.

Dec 30, 2014 12:32 IST

केंद्र सरकार ने 25 दिसंबर 2014 को ‘मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक एवं शिक्षण मिशन’ योजना का आरंभ किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में इस मिशन की शुरुआत की.

यह मिशन बारहवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत करीब 900 करोड़ रुपये के बजट के अनुमान के साथ शुरू किया गया. यह व्यापक शिक्षा शास्त्र में शिक्षकों, शिक्षण, शिक्षकों की तैयारी, व्यावसायिक विकास, पाठ्यक्रम डिजाइन, डिजाइनिंग और विकसित आंकलन व मूल्यांकन पद्धति व शोध से संबंध रखने वाले सभी मुद्दों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य के साथ शुरू किया गया.

एक तरफ यह मिशन वर्तमान व आवश्यक मुद्दों जैसे योग्य शिक्षकों की आपूर्ति, हुनरमंद व्यक्तियों को शिक्षा के व्यवसाय की ओर आकर्षित करने और स्कूलों व कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने का प्रयास है. वहीं, दूसरी तरफ यह मिशन शिक्षकों के मजबूत पेशेवर कैडर के निर्माण व उनके दीर्घकालीन उद्देश्यों की ओर देखता है. साथ ही आविष्कार परक या अनोखी शिक्षा के लिए उच्च श्रेणी की शिक्षण सुविधाएं मुहैया कराने और शिक्षकों के पेशेवर विकास की तरफ भी ध्यान केंद्रित करता है.

यह मिशन आवश्यक और दीर्घकालीन उद्देश्यों हेतु शिक्षा क्षेत्र के कार्यक्रमों के स्तर व क्षेत्रों जैसे उच्च, तकनीकी इत्यादि में बांटे बिना इन पर समान रूप से ध्यान देगा. यह मिशन एक छतरी योजना की तरह होगा जो वर्तमान केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय या स्वायत्त संस्थाओं के अधीन संचालित शिक्षण व संस्थाओं और शिक्षकों को उन्नत करने के बीच तालमेल स्थापित करेगा.


मिशन के मुख्य भाग जैसे शिक्षा विद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ), पाठ्यक्रमों और पद्धति के लिए उत्कृष्टता केंद्र शिक्षकों के अंतर विश्वविद्यालयीय केंद्र, शिक्षा के लिए राष्ट्रीय संसाधन केंद्र, अकादमिक नेतृत्व और शिक्षा प्रबंधन केंद्र, नई खोज, पुरस्कार, शिक्षण संसाधन ग्रांट, कार्यशाला व सेमिनार और पाठ्यक्रम नवीनीकरण व सुधार के लिए विषय नेटवर्क होंगे.

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कैंपस में वाईफाई की सुविधा को शुरू किया. उन्होंने अंतर विश्वविद्यालयीय पट्टिका का अनावरण किया और वाराणसी महोत्सव की भी शुरुआत की.