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जानिए क्या है न्यूनतम आय गारंटी योजना और यूनिवर्सल बेसिक इनकम ?

न्यूनतम आय गारंटी योजना में यह प्रावधान होता है कि सरकार गरीबी रेखा के तय मानक के अनुसार उस श्रेणी के लोगों को एक निश्चित रकम देती है.

Mar 25, 2019 14:48 IST

हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा सरकार बनने पर न्यूनतम आय गारंटी योजना के तहत देश के बीस प्रतिशत परिवारों को 72 हज़ार रुपये प्रतिवर्ष दिए जाने का वादा किया गया. राहुल गांधी ने कहा है कि यदि कांग्रेस सरकार आई तो 25 करोड़ लोगों को इस योजना के तहत का लाभ दिया जाएगा. राहुल गांधी द्वारा यह भी कहा गया कि कांग्रेस की इस योजना के तहत न्यूानतम आय की सीमा 12 हजार रुपये रखी गई है. 12 हजार से कम आय वाले ही इस योजना का लाभ उठा पाएंगे.

इससे पहले वर्ष 2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की अवधारणा पेश की गई थी. इस सर्वेक्षण में कहा गया कि अब तक की सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के लाभों के हस्तांतरण के मामले में निराशाजनक प्रदर्शन के मद्देनजर जरूरतमंदों तक सार्वभौमिक रूप से वित्तीय सहायता की सीधी पहुँच सुनिश्चित किये जाने की आवश्यकता है. यदि ऐसा होता है, तो इससे गरीबी-उन्मूलन की प्रक्रिया तेज होगी और गरीबों के लिए बेहतर जिंदगी सुनिश्चित की जा सकेगी. इसके लिए लाभार्थियों का जनधन, आधार और मोबाइल से जुड़ा होना जरूरी होगा.

न्यूनतम आय गारंटी योजना क्या है?

•    न्यूनतम आय गारंटी योजना में यह प्रावधान होता है कि सरकार गरीबी रेखा के तय मानक के अनुसार उस श्रेणी के लोगों को एक निश्चित रकम देती है.

•    यह रकम गरीबी रेखा के मानक से तय की जा सकती है. इसके तहत सरकार एक निश्चित रकम तय करती है और फिर एक मानक स्थापित कर इसका वितरण करती है.

•    यह एक न्यूनतम आधारभूत आय की गारंटी है जो केवल गरीब नागरिकों को बिना शर्त सरकार द्वारा दी जाती है.

•    इसके लिये व्यक्ति की आय तय मानक के अनुसार होनी चाहिए और उसे उस देश का नागरिक होना ज़रूरी होता है, जहाँ इसे लागू किया जाना है.

यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI)

यूनिवर्सल बेसिक इनकम की अवधारणा अपने मूल रूप में सभी नागरिकों के लिए वित्तीय सहायता के रूप में प्रति माह उस न्यूनतम राशि के बिना शर्त अंतरण पर बल देती है जिससे वो अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकें और जिससे उनके लिए गरिमामय जीवन संभव हो सके.

 

2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में यूनिवर्सल बेसिक इनकम

वर्ष 2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में यूनिवर्सल बेसिक इनकम के बारे में विस्तृत विवरण दिया गया था. इसमें कहा गया था कि भारत में केंद्र सरकार की तरफ से प्रायोजित कुल 950 योजनाएँ हैं और जीडीपी बजट आवंटन में इनकी हिस्सेदारी लगभग 5% है. ऐसी ज़्यादातर योजनाएँ आवंटन के मामले में छोटी हैं और प्रमुख 11 योजनाओं की कुल बजट आवंटन में हिस्सेदारी 50% है. इसे ध्यान में रखते हुए सर्वे में यूनिवर्सल बेसिक इनकम को मौजूदा स्कीमों के लाभार्थियों के लिये विकल्प के तौर पर पेश करने का प्रस्ताव दिया गया है.

उद्देश्य: आर्थिक समीक्षा में सामजिक न्याय को सुनिश्चित करना, नागरिकों को गरिमामय जीवन उपलब्ध कराना, गरीबी में कमी, रोजगार-सृजन एवं श्रम-बाजार में लोचशीलता के जरिये लोगों को कार्य-विकल्प उपलब्ध कराना, व्यापक प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय समावेशन को इस स्कीम का लक्ष्य बताया गया है और संकेतों में कहा गया है कि वर्तमान में चलायी जा रही लोक-कल्याणकारी योजनाओं की तुलना में यह योजना इन लक्ष्यों की प्राप्ति में कहीं अधिक सहायक है.

सैद्धांतिक आधार: 1. सार्वभौमिकता, ताकि सभी नागरिकों को इसके दायरे में लाया जा सके;

2. बिना शर्त अर्थात् न तो आय की शर्त और न ही रोजगार की शर्त; तथा

3. बुनियादी आय, ताकि बिना किसी अतिरिक्त आय गरिमापूर्ण जीवन जीना संभव हो सके.



न्यूनतम आय गारंटी और यूनिवर्सल बेसिक इनकम में अंतर


•    न्यूनतम आय गारंटी गरीबी ग्रामीण क्षेत्रों अथवा विशेष श्रेणी के लोगों को दी जाने वाली न्यूनतम आय है जबकि यूनिवर्सल बेसिक इनकम योजना वर्षों तक दी जाने वाली न्यूनतम आय की गारंटी है.

•    न्यूनतम आय गारंटी की योजना नागरिकों का अधिकार नहीं है जबकि जबकि कुछ यूरोपियन देशों में बेसिक इनकम को लोगों के अधिकार के रूप में सुनिश्चित किया गया है.

•    न्यूनतम आय गारंटी लोगों को आर्थिक आधार पर दिया जाने वाली सुविधा है जबकि यूबीआई उन्हें सुनिश्चित तौर पर मिलना तय है.

 

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