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डब्ल्यूएचओ गेमिंग डिसआर्डर को मानसिक रोग की श्रेणी में शामिल करेगा

न्यू साइंटिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार डब्ल्यूएचओ गेमिंग डिसऑर्डर को रोगों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (आईसीडी) में शामिल करने के बारे में सोच रहा है.

Jan 1, 2018 10:59 IST

विडियो गेम्स तथा मोबाइल पर खेले जाने वाले विभिन्न गेम्स को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नई रिपोर्ट जारी की है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) गेमिंग से होने वाले डिसऑर्डर को मानसिक रोग की श्रेणी में रख सकता है.

हाल ही में जारी न्यू साइंटिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार डब्ल्यूएचओ गेमिंग डिसऑर्डर को रोगों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (आईसीडी) में शामिल करने के बारे में सोच रहा है. आईसीडी एक नैदानिक नियमावली है जिसे डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जिसे पिछली बार 27 साल पहले 1990 में अपडेट किया गया था.

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रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

•    नियमावली का 11वां संस्करण 2018 में प्रकाशित होना है और इसमें गेमिंग डिसऑर्डर को एक ऐसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के तौर पर रखा जाएगा जिसकी निगरानी किए जाने की आवश्यकता है.

•    डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी 11वें संस्करण के मसौदे में गेमिंग डिसऑर्डर को स्थायी या आवर्ती खेल व्यवहार (डिजिटल गेमिंग या वीडियो गेम) के तौर पर बताया गया है, जो ऑनलाइन या ऑफ लाइन हो सकता है.

•    इस मसौदे में कई तरह के व्यवहारों को सूचीबद्ध किया गया है, जिससे चिकित्सक यह तय कर सकते है कि किसी व्यक्ति का व्यवहार गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में पहुंच गया है या नहीं.

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विडियो गेम

वीडियो गेम या वीडियो खेल ऐसे इलेक्ट्रॉनिक खेल होते है जिसमें यूज़र इंटरफ़ेस के साथ परस्पर क्रिया करके दृश्य प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है. वीडियो गेम खेलने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों को प्लेटफॉर्म या मंच के रूप में जाना जाता है. पर्सनल कम्प्यूटर और वीडियो गेम के लिये विशिष्ट तौर पर बनाई गई मशीन जिसे कंसोल कहते है, ज़्यादातर वीडियो गेम के लिये प्रयोग में लिये जाते हैं. आर्केड गेम के रूप में वीडियो गेम के, जो पहले आम थे, उपयोग में धीरे-धीरे गिरावट आई है.

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