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त्रिपुरा सरकार ने राज्य से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (एफएसपीए) हटाने का फैसला किया

त्रिपुरा सरकार ने 27 मई 2015 को राज्य से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (एफएसपीए) हटाने का फैसला किया.

May 28, 2015 12:09 IST

त्रिपुरा राज्य सरकार ने 27 मई 2015 को राज्य से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (एफएसपीए) को हटाने का फैसला किया. आतंकवाद प्रभावित त्रिपुरा राज्य में यह अधिनियम 18 वर्षों से लागू था.

त्रिपुरा में आतंकवाद के मामलों में कमी को देखते हुए राज्य के मंत्रिमंडल ने मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य से अफस्पा हटाने का फैसला लिया गया. इसके संबंध में जल्द ही राजपत्र अधिसूचना (गजट नोटिफिकेशन) जारी किया जाएगा.

त्रिपुरा में 74 पुलिस थाने हैं जिनमें से 30 पुलिस थानों में एफएसपीए लगा हुआ है. 26 पुलिस थानों में इसका पूर्ण रूप से पालन होता है जबकि चार थानों में आंशिक रूप से इसका पालन किया जाता है.

विदित हो कि आतंकवाद की समस्या बढ़ने के कारण 16 फरवरी 1997 से त्रिपुरा में यह अधिनियम प्रभावी था. त्रिपुरा के अलावा असम, नागालैंड, अरूणाचल प्रदेश के कुछ जिलों और मणिपुर (इंफाल नगर पालिका परिषद क्षेत्र को छोड़कर) में एफएसपीए अभी भी लागू है.

सशस्त्र बल (विशेष अधिकारों) अधिनियम (एएफएसपीए), 1958

  • भारतीय संसद ने 11 सितंबर 1958 को सशस्त्र बल (विशेष अधिकारों) अधिनियम (एएफएसपीए), 1958 बनाया था. इसे शुरू में पूर्वोत्तर भारत के हिंसा प्रभावित इलाक़ों में लागू किया गया था.
  • यह अधिनियम असम, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा एवं अरुणाचल प्रदेश एवं मिजोरम के संघ शासित प्रदेश के अशांत क्षेत्रों में सेना को विशेषाधिकार प्रदान करता है.
  • यह सेना को बिना किसी वारंट के ऐसे किसी भी व्यक्ति जिसने संज्ञेय अपराध किया हो या जिस पर यह उचित संदेह मौजूद हो कि उसने संज्ञेय अपराध करने के लिए प्रतिबद्ध था, की गिरफ्तारी का अधिकार देता है, और सेना इस अधिकार का प्रयोग ऐसी गिरफ्तारियों को प्रभावी बनाने में कर सकती है.
  • सेना द्वारा अशांत क्षेत्रों में पांच या ज्यादा लोगों के एक जगह इक्ट्ठा होने पर लगी रोक या किसी भी प्रकार के कानून या व्यवस्था के आदेश के उल्लंघन के मामले में या हथियारों को ले जाने या ऐसी चीजें ले जाने जिससे हथियार बनाए जा सकें या हथियार, गोला बारूद या विस्फोटक पदार्थों को ले जाने वाले ऐसे किसी भी व्यक्ति को उन्हें गोली मारने, चाहे उसकी वजह से मौत ही क्यों न हो जाए या अन्य प्रकार से बल प्रयोग करने का भी अधिकार देती है.

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