पश्चिमी घाट में घैटीकैलस मैगनस नामक वृक्षारोही मेंढक की एक नई प्रजाति की खोज

यह खोज अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकृत (टैक्सोनोमिक) जर्नल ज़ूटैक्सा (Zootaxa) के नवीनतम अंक में प्रकाशित की गई.

Created On: Nov 25, 2015 16:32 ISTModified On: Nov 25, 2015 16:40 IST

शोधकर्ताओं ने पश्चिमी घाट की कदालर उच्च श्रेणियों में (इडुक्की, केरल) घैटीकैलस मैगनस (Ghatixalus magnus) नामक वृक्षारोही मेंढक की एक नई प्रजाति की खोज की.

शोधकर्ताओं की टीम में शामिल रॉबिन अब्राहम और उभयचर विशेषज्ञ डॉ. अनिल जकारिया ने पश्चिमी घाट में अपने अन्वेषण के दौरान इस मेंढक की खोज की. यह खोज अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकृत (टैक्सोनोमिक) जर्नल ज़ूटैक्सा (Zootaxa) के नवीनतम अंक में 24 नवंबर 2015 को प्रकाशित की गई.


घैटीकैलस मैगनस, जीनस घाटीजैलस की एक प्रजाति है. यह पेड़ों पर रहने वाले मेढ़को की एक प्रजाति है, जिन्हे रैकोफोरिड (Rhacophorid) कहा जाता है. रैकोफोरिड उष्णकटिबंधीय उप-सहारा अफ्रीका, दक्षिण भारत और श्रीलंका, जापान में पाए जाने वाले मेंढक प्रजाति का एक परिवार हैं.

यह मेंढक आकार में बड़े हैं और पश्चिमी घाट में पाए जाने वाले वृक्षारोही मेंढकों में सबसे बड़े मेंढक है. शोधकर्ताओं ने केरल में इडुक्की जिले के कदालर उच्च श्रेणियों में की गई अपनी खोज में राकोफोरिड जंगली मेंढक प्रजाति के रोओरेस्ट्स फ्लेविवेंटरिस (Raorchestes flaviventris) मेंढक की दोबारा खोज की.

इससे पहले वर्ष 1882 में जॉर्ज अल्बर्ट बोलेंगर ने पश्चिमी घाट में इस प्रजाति के मेढक की खोज की थी.

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