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प्रधानमंत्री मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच अनौपचारिक शिखर बैठक

भारत और रूस की यह दोस्ती बहुत पुरानी है. यह मुलाकात कई लिहाज से खास है, क्योंकि पुतिन ने चौथी बार राष्ट्रपति का कार्यकाल संभालने के बाद पीएम मोदी को रूस की यात्रा पर आने के लिए आमंत्रित किया.

May 22, 2018 12:07 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के सोची शहर में 21 मई 2018 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक की. इस दौरान पुतिन ने कहा कि भारत-रूस के संबंध काफी मजबूत हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी वार्ता से दोनों देशों के बीच संबंधों में और मजबूती आएगी.

भारत और रूस की यह दोस्ती बहुत पुरानी है और आज की यह मुलाकात कई लिहाज से खास है, क्योंकि पुतिन ने चौथी बार राष्ट्रपति का कार्यकाल संभालने के बाद पीएम मोदी को रूस की यात्रा पर आने के लिए आमंत्रित किया है.

मुख्य तथ्य:

दोनों नेताओं के बीच ईरान एटमी डील से अमेरिका के पीछे हटने के फैसले का आर्थिक असर, अफगानिस्तान और सीरिया के हालात, आतंकवाद के खतरे और आगामी शंघाई सहयोग संगठन एवं ब्रिक्स सम्मेलन से संबंधित मुद्दों पर बात हुई.

वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा अनौपचारिक शिखर बैठक में मोदी-पुतिन के बीच आर्थिक क्षेत्र में एक दूसरे के सहयोग से आगे बढने के तरीके पर बातचीत हुई.

हथियार सौदे पर बात:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस रूस यात्रा के दौरान सबसे अहम मुद्दा रूस के साथ हथियार सौदे का हैं. भारत और रूस के बीच करीब 40 हजार करोड़ रुपये (करीब 12 अरब डॉलर) आर्म्स डील हुई थी, लेकिन रूसी सैन्य निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंध के चलते यह डील अभी तक रुका हुआ हैं.

शांतिपूर्ण उद्देश्य:

रूस ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित करने में भारत की जरूरत को माना है. दिसंबर 2014 में, डिपार्टमेंट ऑफ ऐटमिक एनर्जी और रूस के रोसाटम ने भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल को लेकर सहयोग बढ़ाने के लिए स्ट्रैटजिक विजन पर हस्ताक्षर किए थे. भारत का कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट रूस की मदद से ही बनाया जा रहा है.

शंघाई सहयोग संगठन में आठ देश सदस्य है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग बढ़ाना है. भारत और पाकिस्तान पिछले वर्ष इस संगठन में शामिल हुए. भारत को संघाई कॉरपोरेशन ऑर्गेनाइजेशन की स्थाई सदस्यता दिलाने में रूस ने अहम भूमिका निभाई है.

भारत और रूस का संबंध:

  • भारत और रूस की यह दोस्ती बहुत पुरानी है. रूस, भारत को मजबूत और मुश्किल समय का दोस्त रहा है. दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक, सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते का लंबा इतिहास रहा है.
  • भारत की आजादी के बाद से ही भारत और रूस के सम्बन्ध बहुत अच्छे रहे हैं. शीत युद्ध के समय भारत और सोवियत संघ में मजबूत रणनीतिक, सैनिक, आर्थिक, एवं राजनयिक सम्बन्ध रहे हैं. सोवियत संघ के विघटन के बाद भी दोनों के सम्बन्ध पूर्ववत बने रहे.
  • दोनों देशों ने अर्थव्यवस्था, राजनीति, रक्षा, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और स्पेस के क्षेत्र में एक-दूसरे का सहयोग किया है.

 

रूस प्रतिस्पर्धा को बनाए रखते हुए अभी भी भारतीय बाजार में हथियारों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. रूस ही इकलौता ऐसा देश है जो भारत की भविष्य की जरूरतों पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर्स (सुखोई PAK-FA), न्यूक्लियर सबमैरीन्स और एयरक्राफ्ट कैरियर को पूरा कर सकता है.

आर्थिक साझेदारी-दिसंबर 2014 में, दोनों देशों ने वर्ष 2025 तक व्यापार बढ़ाकर 30 बिलियन डॉलर के व्यापार का लक्ष्य रखा था. स्पेस एनर्जी-भारत-रूस के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में चार दशकों से साथ काम कर रहे हैं. 2015 में भारत के पहले सैटेलाइट आर्यभट्ट की लॉन्चिंग को 40 साल पूरे हुए थे. इस सैटेलाइट का लॉन्च वेहिकल रूसी सोयूज ही था. दोनों देश वर्तमान में मानव स्पेस फ्लाइट की संभावना पर काम कर रहे हैं.