फ्रीडम ऑन द नेट 2015 रिपोर्ट जारी

गैर सरकारी संस्था फ्रीडम हाउस ने 28 अक्टूबर 2015 को फ्रीडम ऑन द नेट 2015 रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट – निजीकरण सेंसरशिप और गोपनीयता को खत्म करना, विषय पर जारी की गई.

Created On: Oct 30, 2015 16:13 ISTModified On: Oct 30, 2015 16:17 IST

गैर सरकारी संस्था फ्रीडम हाउस ने 28 अक्टूबर 2015 को फ्रीडम ऑन द नेट 2015 रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट – निजीकरण सेंसरशिप और गोपनीयता को खत्म करना, विषय पर जारी की गई.

वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल ऑनलाइन फ्रीडम में लगातार पांचवें वर्ष गिरावट दर्ज की गई क्योंकि सरकारें जिसमें कुछ उन्नत लोकतंत्र की सरकारें भीं हैं, इंटरनेट पर सामाजित मीडिया प्लेटफार्मों का उपयोग असंतुष्टों पर शिकंजा करने के लिए कर रही है.

भारत के संदर्भ में रिपोर्ट में इंटरनेट पर स्वतंत्रता को आंशिक रूप से मुक्त दिखाया गया है. 0 से 100 के पैमाने पर भारत का कुल स्कोर 40 था. इसमें 0 सबसे अच्छा और 100 सबसे बुरा था.

रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष

शीर्ष और नीचे के तीन देशः आईसलैंड (स्कोर– 6), इस्टोनिया (7) और कनाडा (16) के लोग ऑनलाइन जगत में सबसे अधिक स्वतंत्रता का लुत्फ उठाते हैं जबकि सीरिया (87), ईरान ( 87) और चीन (88) में स्वतंत्रता सबसे कम है.
 
ऑनलाइन स्वतंत्रता में कमीः दुनिया भर में इंटरनेट स्वतंत्रता में लगातार पांचवे वर्ष गिरावट दर्ज की गई है. इसकी वजह हैं सरकारों द्वारा जनहित में जानकारी को सेंसर करना और निगरानी बढ़ाने के साथ– साथ निजी उपकरणों को क्रैक करना .

सामग्री हटाना बढ़ गया हैः 65 देशों में से 42 देशों के अधिकारों ने राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर उपल्बध सामग्रियों पर प्रतिबंध लगाने या उसे नष्ट करने के लिए निजी कंपनियों या इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का मूल्यांकन किया.

गिरफ्तारी और धमकियों में तेजी आईः 65 देशों में से 40 देशों के अधिकारियों ने राजनीतिक, धार्मिक या समाज संबंधी जानकारियों को डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से साझा करने पर लोगों को जेल भेजा.

निगरानी कानून और तकनीक को बढ़ायाः 65 देशों में से 14 देशों की सरकारों ने जून 2014 से निगरानी में बढ़ोतरी कर दी और कई अन्य देशों ने अपने निगरानी तंत्र को अपग्रेड किया.

सरकारों ने एन्क्रिप्शन, नाम गुप्त रखने को कम आंकाः लोकतंत्र और तानाशाही शासनों ने एन्क्रिप्शन को आतंकवाद का साधन माना और कई देशों ने तो निजता की रक्षा करने वाले उपकरणों पर प्रतिबंध लगाने या उन्हें सीमित करने की कोशिश की.

रिपोर्ट के बारे में

इस रिपोर्ट को फ्रीडम हाउस ने डच विदेश मंत्रालय अमेरिका के लोकतंत्र, मानवाधिकार और श्रम ब्यूरो विभाग (डीआरएल), गूगल, फेसबुक, याहू और ट्विटर से मिले अनुदान से तैयार किया था. साल 2015 की रेटिंग में अवधि 1 जनवरी से 31 जनवरी 2014 के बीच की है.

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