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बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता कादर खान का निधन

कादर खान ने वर्ष 1973 में ‘दाग’ फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की. इसमें राजेश खन्ना मुख्य भूमिका में थे. उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है.

Jan 2, 2019 09:41 IST

भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और लेखक कादर खान का 01 जनवरी 2019 को निधन हो गया. वे 81 वर्ष के थे. कादर खान लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पिछले कुछ समय से कनाडा के एक अस्पताल में भर्ती थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कादर खान को श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट किया कि कादर खान जी ने अपने शानदार अभिनय कौशल से स्क्रीन को रौशन किया तथा अपने अनूठे अंदाज़ से सबका मनोरंजन किया, उनके जाने का बेहद दुख है.

मीडिया में प्रकाशित जानकारी के अनुसार कादर खान को प्रोग्रेसिव सुपरान्यूक्लियर पाल्सी (पीएसपी) नामक बीमारी थी, जिसकी वजह से उन्हें संतुलन बनाने में तथा चलने-फिरने में दिक्कत होती थी. इसके अतिरिक्त उन्हें डिमेंशिया की भी समस्या थी.

 

modi on kader khan

कादर खान का जीवन परिचय

•    कादर खान का जन्म 22 अक्टूबर, 1937 को काबुल में हुआ था. उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है तथा 250 से ज्यादा फिल्मों में संवाद भी लिखे हैं.

•    कादर खान ने वर्ष 1973 में ‘दाग’ फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की. इसमें राजेश खन्ना मुख्य भूमिका में थे.

•    इससे पहले वह रणधीर कपूर और जया बच्चन की फिल्म ‘जवानी-दिवानी’ के लिए संवाद लिख चुके थे. एक पटकथा लेखक के तौर पर खान ने मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा के साथ कई फिल्में लिखी.

•    कादर खान ने मनमोहन देसाई के साथ मिलकर 'धर्म वीर', 'गंगा जमुना सरस्वती', 'कुली' 'देश प्रेमी', 'सुहाग', 'अमर अकबर एंथनी' और मेहरा के साथ 'ज्वालामुखी', 'शराबी', 'लावारिस' और 'मुकद्दर का सिकंदर' जैसी फिल्में लिखीं.

•    कादर खान ने 'कुली नंबर 1', 'मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी', 'कर्मा', 'सल्तनत' जैसी फिल्मों के संवाद लिखे थे.

 

kader khan movies

 

कादर खान द्वारा लिखित प्रसिद्ध संवाद

  • फिल्म - कुली (1983) - 'बचपन से सर पर अल्लाह का हाथ और अल्लाहरख्खा है अपने साथ, बाजू पर 786 का है बिल्ला, 20 नंबर की बीड़ी पीता हूं और नाम है 'इक़बाल'.'
  • फिल्म – अग्निपथ (1990) - विजय दीनानाथ चौहान, पूरा नाम, बाप का नाम दीनानाथ चौहान, मां का नाम सुहासिनी चौहान, गांव मांडवा, उम्र 36 साल 9 महीना 8 दिन.’
  • फिल्म - मुकद्दर का सिकंदर (1978) – ‘सुख तो बेवफा है आता है जाता है, दुख ही अपना साथी है, अपने साथ रहता है. दुख को अपना ले तब तक़दीर तेरे कदमों में होगी और तू मुकद्दर का बादशाह होगा.’

 

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