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ब्रिटेन जलवायु आपातकाल घोषित करने वाला पहला देश बना

जलवायु परिवर्तन पर आपात स्थिति घोषित करने की मांग कर रहे एक समूह के कार्यकर्ताओं ने मध्य लंदन में विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. प्रदर्शनकारियों ने 11 दिन तक चले इस विरोध प्रदर्शन में शहर की सड़कों को बंद कर दिया.

May 6, 2019 12:23 IST

ब्रिटेन की संसद ने हाल ही में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को लेकर आपातकाल घोषित कर दिया है. ब्रिटेन ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है. खास बात यह है कि इस आशय का प्रस्ताव विपक्ष की तरफ से पेश किया गया.

जलवायु परिवर्तन पर आपात स्थिति घोषित करने की मांग कर रहे एक समूह के कार्यकर्ताओं ने मध्य लंदन में विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. प्रदर्शनकारियों ने 11 दिन तक चले इस विरोध प्रदर्शन में शहर की सड़कों को बंद कर दिया. अब यह आंदोलन जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में भी फैल गया है.

जलवायु परिवर्तन क्या है?

औद्योगिक क्रांति के बाद से पृथ्वी का औसत तापमान साल दर साल बढ़ रहा है. जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आइपीसीसी) की रिपोर्ट ने पहली बार इससे आगाह किया था. जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं. गर्मियां लंबी होती जा रही हैं, और सर्दियां छोटी. प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और प्रवृत्ति बढ़ चुकी है. ऐसा ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की वजह से हो रहा है.

जलवायु परिवर्तन के खतरों के बारे में वैज्ञानिक लगातार आगाह करते आ रहे हैं. जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में, मानवजनित गतिविधिया जोकि जलवायु को प्रभावित कर रहे हैं. जलवायु परिवर्तन के साक्ष्य कई प्रकार के स्रोतों से उपलब्ध होते हैं जिन्हें पुराकालीन जलवायवीय दशाओं के विवेचन के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है.

जलवायु परिवर्तन को लेकर आपातकाल घोषित क्यों?

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से होने वाली तबाही से बचने के लिए हमारे पास सिर्फ बारह साल रह गए हैं. यदि इस समस्या का समाधान जल्दी नहीं किया गया तो धरती पर तबाही आ जाएगी.

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जलवायु आपातकाल क्या है?

जलवायु आपातकाल की कोई सटीक परिभाषा नहीं है. लेकिन इस कदम को जलवायु और पर्यावरण पर महत्वपूर्ण उपायों के साथ जोड़ा गया है. ब्रिटेन सरकार ने कानून तौर पर ये निर्णय लिया है कि साल 2050 तक वो 80 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन को कम कर देगा. ब्रिटेन उन 18 विकसित देशों में एकमात्र ऐसा देश है जिसने पिछले एक दशक में सबसे कम कार्बन उत्सर्जन किया है.

ब्रिटेन की संसद द्वारा जलवायु आपात स्थिति घोषित करने से पहले ही ब्रिटेन के दर्जनों कस्बों और शहरों ने जलवायु आपात स्थिति घोषित कर दी थी. लोगों का कहना है कि वे साल 2030 तक कार्बन न्यूट्रल होना चाहते हैं. अर्थात् उतना ही कार्बन उत्सर्जित हो जिसे प्राकृतिक रूप से समायोजित किया जा सके.

जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आइपीसीसी) क्या है?

आईपीसीसी जलवायु परिवर्तन के आकलन के लिए बनाई गई एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है. इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यकम तथा विश्व मौसमविज्ञान संगठन द्वारा साल 1988 में की गई थी. इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में स्थित है. वर्तमान में विश्व के 195 देश इसके सदस्य हैं. इसमें विश्व के विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों के समूह कार्य करता हैं, वे जलवायु परिवर्तन का नियमित आकलन करते हैं. प्रत्येक 5-6 वर्ष उपरांत आईपीसीसी जलवायु परिवर्तन पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करती है.

पृष्ठभूमि:

यूनाइटेड नेशन ने पेरिस समझौत साल 2016 में पारित किया था. इस प्रस्ताव पर 197 देशों ने हस्ताक्षर किये. सभी देश इस बात पर राजी हो गये थे कि वैश्विक तापमान को कम करने के लिए कार्बन का उत्सर्जन भी कम करना पड़ेगा. इसका मुख्य उद्देश्य था ग्लोबल तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचाना और उद्योगों का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं होना चाहिए. दुनियाभर में नवीकरण की लागत में तेजी से कमी आई है जिससे वे सभी देशों लिए और अधिक सुलभ हो गए हैं.

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