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ब्रिटेन ने मैग्ना कार्टा की 800वीं वर्षगांठ मनाई

ब्रिटेन ने 15 जून 2015 को ‘मैग्ना कार्टा’ (स्वतंत्रता का अधिकार पत्र/ महान चार्टर) की 800वीं वर्षगांठ मनाई.

Jun 17, 2015 15:56 IST

ब्रिटेन ने 15 जून 2015 को ‘मैग्ना कार्टा’ (स्वतंत्रता का अधिकार पत्र/ महान चार्टर) की 800वीं वर्षगांठ मनाई. इंग्लैंड के तत्कालीन राजा जॉन और उनके सामंतों के बीच समझौते के इस दस्तावेज़ पर 15 जून, 1215 को हस्ताक्षर किए गए थे.


मैग्ना कार्टा से संबंधित मुख्य तथ्य:

मैग्ना कार्टा (Magna Carta) को ब्रिटेन की लोकतांत्रिक क़ानून और संवैधानिक व्यवस्था का आधार माना जाता है. इसे मानवाधिकारों की बुनियाद रखने वाला दस्तावेज़ भी कहा जाता है. इसके तहत पहली बार राजा को क़ानून के दायरे में लाया गया और कहा गया कि 'सभी मनुष्य समान हैं.' यह लैटिन भाषा में लिखा गया था.

मैग्ना कार्टा में इंग्लैण्ड के राजा जॉन ने सामन्तों (nobles and barons) को कुछ अधिकार दिये, कुछ कानूनी प्रक्रियाओं के पालन का वचब दिया और स्वीकार किया कि उनकी इच्छा कानून के सीमा में बंधी रहेगी. मैग्ना कार्टा ने राजा की प्रजा के कुछ अधिकारों की रक्षा की स्पष्ट रूप से पुष्टि की, जिनमें से बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका (habeas corpus) उल्लेखनीय थी.

इस चार्टर की महत्ता इस तथ्य में निहित है कि प्रत्येक पीढ़ी ने इसकी वैधानिक व्याख्या कर इस सिद्धांत पर जोर दिया कि राजा को कानून का सम्मान अनिवार्यत: करना चाहिए. यह सामंतों तथा साधारण जनता दोनों के लिये वैधानिकता का प्रतीक बना तथा ब्रिटिश वैधानिक अधिनियमन का श्रीगणेश भी यहीं से हुआ माना जाता है.

मैग्ना कार्टा (1215 ई0) 15 जून 1215 ई0 को, टेम्स नदी के किनारे स्थित रनीमीड स्थान पर राजा जॉन ने इंग्लैंड के सामंतों को प्रदान किया था. यह कालांतर में इंग्लिश स्वातंत्र्य का प्रधान आधार बना, यद्यपि इसके रचयिता, जनस्वातंत्र्य उद्देश्य से अनुप्रेरित नहीं थे. वे अपने अधिकारों के प्रतिपादन में लगे थे. सामंत (बैरन), जो इसकी रचना में संलग्न थे, स्वभावत: अपनी स्थिति को सुरक्षित कर रहे थे. उन्हें दूसरे वर्गो के स्वार्थों में कोई दिलचस्पी नहीं थी. अत: चार्टर, राजा तथा बैरन के बीच एक प्रसंविदा था, ज़ो सामंतवादी प्रथा पर आधारित था. चार्टर की दो तिहाई धाराएँ सामंतों के कष्टों की सूची थीं. किंतु रचयिताओं ने परिपत्र के द्वारा अपनी माँगों के अतिरिक्त, सभी वर्गो को संतुष्ट करने के लिये इसमें प्रशासकीय सुधारों की मांग भी किया था.

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