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भारतीय रेल विज़न–2020

Sep 23, 2010 16:12 IST
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भारतीय रेल को वर्ष 2020 तक चौतरफा विकसित करने के लिए, उन्नत प्रौद्योगिकी, भौगोलिक और सामाजिक स्तर पर नेटवर्क विस्तार, यातायात बाज़ार के बड़े भाग पर पकड़, रोजगार सृजन, यात्री व माल सुविधाओं के उन्नत स्वरूप आदि को शामिल करने की जरुरत है. साथ ही पर्यावरण अनुकूलता के प्रति भी सजगता दिखाने की आवश्यकता है. रेल मंत्री ममता बनर्जी ने 18 दिसंबर 2009 को भारतीय रेल का विज़न, 2020 लोकसभा में पेश किया. विज़न में ऐसी ही कुछ भावी और दूरगामी योजनाएं भारतीय रेल को लेकर रखी गई हैं. 2010-20 के दशक में इसे विश्व का नंबर दो रेलवे और उसके बाद के दशक में पहला स्थान प्राप्त करने का लक्ष्य भी रखा गया.
विज़न 2020 में रेल विकास: चार नीतिगत राष्ट्रीय लक्ष्य
• भौगोलिक दृष्टि और सामाजिक दृष्टि से समावेशी विकास
• राष्ट्रीय समग्रता को मजबूत करना
• उत्पादक, रोजगार का बड़े पैमाने पर सृजन
• पर्यावरण अनुकूलता
भौगोलिक दृष्टि और सामाजिक दृष्टि से समावेशी विकास
सभी राज्यों और लगभग सभी क्षेत्रों में रेल परिवहन नेटवर्क की पहुंच की योजना. माल, यात्री तथा पार्सल सेवाओं का स्वरूप सप्लाई-बाधित व्यवसाय से परिवर्तित होकर मांग पर उपलब्धता की स्थिति के अनुसार करने का प्रस्ताव. पिछड़े वर्गों और गरीब जनता की सेवा पर ध्यान केंद्रित करना. इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए निम्नलिखित लक्ष्य निर्धारित किए गए:
I. नेटवर्क का विस्तार: 1947 से 2009 तक 62 वर्षों में सिर्फ 10000 किलोमीटर (किमी) रेल लाइन का विस्तार हुआ. सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से 2020 तक 25000 किमी नई लाइनें यानि 2500 किमी लाइन प्रति वर्ष बिछाने की योजना. इसमें से 10000 किमी लाइनें लाभप्रदता के बजाय सामाजिक दृष्टि से वांछनीय रखने की योजना. देश के दूरस्थ क्षेत्रों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और सभी पूर्वोत्तर राज्यों – असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय और सिक्किम में रेल संपर्क कायम करने का लक्ष्य रखा गया. लक्षित नेटवर्क विस्तार के लिए निम्नलिखित योजनाएं बनाई गई:
a) 2020 तक 30000 किमी से अधिक दोहरी/मल्टीपल लाइनें (वर्तमान में 18000 किमी) यानि 12000 किमी दोहरीकरण. इसमें से 6000 किमी से अधिक चोहरी लाइनें. माल और यात्री सेवाओं का पृथक्करण. दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-मुम्बई, कोलकाता-मुम्बई, और दिल्ली-चेन्नई मार्गों पर समर्पित माल यातायात गलियारे.
b) 12000 किमी आमान परिवर्तन का लक्ष्य  
c) समूचा नेटवर्क (पर्वतीय और धरोहर रेलों को छोड़कर) बड़ी लाइन पर आधारित.
d) वर्तमान के 19000 किमी विद्युतीकृत रेल मार्ग को बढ़ाकर 33000 किमी यानि 14000 किमी विद्युतीकरण. इसमें सभी इंटर-मेट्रो लिंक्स तथा अन्य व्यस्त कॉरिडोर भी शामिल.
e) 250-350 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार वाली बुलेट ट्रेन के लिए 2000 किमी लंबी 4 उच्च गति रेल परियोजनाओं को पूरा करना, अन्य 8 के विकास की योजना. अब तक निम्नलिखित 6 उच्च गति के रेल कॉरिडोर की पहचान की जा चुकी है:
 दिल्ली – चंडीगढ़ – अमृतसर 
 पुणे – मुम्बई – अहमदाबाद
 हैदराबाद – द्रोनाकल – विजयवाड़ा – चेन्नई
 हावड़ा – हल्दिया
 चेन्नई – बेंगलुरु – कोयम्बटूर – एर्नाकुलम
 दिल्ली – आगरा – लखनऊ – वाराणसी – पटना

f) ऐसी परियोजनाएं जिनमें राज्य सरकारें 50 फीसदी से अधिक साझेदारी देने को इच्छुक हों, रेलवे के द्वारा सुनिश्चित वित्त-व्यवस्था करते हुए समयबद्ध पूरा करने की योजना
g) मेट्रो रेल सेवाओं के विस्तार के लिए भारतीय रेल मेट्रो विकास प्राधिकरण का गठन. संबंधित राज्य/शहरी प्राधिकरणों के साथ भागीदारी ताकि एकल प्रबंधन के अंतर्गत मेट्रो रेल और उपनगरीय रेल प्रणालियों को एकीकृत किया जा सके.

II. यात्री सुविधाएं:
a) किसी भी तरह का टिकट प्राप्त करने में यात्रियों को पांच मिनट से ज्यादा का इंतजार नहीं करना पड़े.
b) समय-पालन, संरक्षा, सुरक्षा, स्वच्छता, स्टेशनों/ट्रेनों पर ऑन-बोर्ड सुविधाएं आदि को अपग्रेड करना
c) दूसरी श्रेणी के डिब्बों में आरामदायक सीटों को लगाना
d) सवारी डिब्बों को अधिक टक्कररोधी और अग्निरोधी बनाने का लक्ष्य  
e) इंटर सिटी रूटों पर डबल-डेकर कोच और लंबी गाडियां. धीमी पैसेंजर गाड़ियों की अपेक्षा मेमू और डेमू सेवाएं.
f) पृथक मार्गों पर यात्री गाड़ियों की अधिकतम रफ़्तार 110-130 किमी प्रति घंटे से बढ़ाकर 160-200 किमी प्रति घंटे. माल गाड़ियों की अधिकतम रफ़्तार 60-70 किमी प्रति घंटे से बढ़ाकर 100 किमी प्रति घंटे.  
g) उपनगरीय गाड़ियों में महिलाओं, विद्यार्थियों, बुजुर्गों और विकलांगों के लिए पर्याप्त स्थान.
h) परिचालन विश्वसनीय बनाने के लिए टक्कररोधी उपायों का सहारा, शून्य दुर्घटनाओं का लक्ष्य प्राप्त करना  
i) वर्त्तमान में प्रतिवर्ष 2500 सवारी डिब्बे के उत्पादन को बढ़ाकर 5000 और फिर 10000 करना.
j) 50880 सवारी डिब्बों की खरीद
k) 5334 डीजल इंजन और 4281 बिजली इंजनों की खरीद 
l) 50 अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेशन, जहां व्यवसाय केंद्र, रिटेल शॉप, रेस्तरां, मनोरंजन/ सांस्कृतिक सुविधाएं उपलब्ध. 200 मल्टी-फंक्शनल स्टेशन, जहां कार्यालय, थियेटर, होटल, स्वास्थ्य तथा शिक्षा संबंधी सेवाओं की सुविधा.
m) गाड़ी की लोकेशन, रियल टाइम तथा गाड़ी संबंधी अन्य सूचनाओं के लिए एक सेटेलाइट आधारित ट्रेन ट्रेकिंग प्रणाली
n) लोकप्रिय यात्री गाड़ियों के डिब्बों की संख्या को बढ़ाकर 24 करना

राष्ट्रीय समग्रता को मजबूत करना
विभिन्न भागों, विभिन्न आय, धर्म और सामाजिक विविधता वाले लोगों की आवश्यकता पर बल:
a) राष्ट्रीय एकता की भावना वाली कला को देश भर में पहुंचाने के लिए सचल (ऑन व्हील्स) कला संग्रहालयों और संस्कृति एक्सप्रेस गाड़ियों का चलन.
b) सभी धर्मों के तीर्थ स्थानों के लिए विशेष अवसरों पर विशेष गाड़ियां. इन स्टेशनों का विस्तार और आधुनिकीकरण.
c) वाणिज्यिक, पर्यटन तथा तीर्थ स्थलों को जोड़ने के लिए 8 और गलियारों की परिकल्पना.

उत्पादक रोजगार का बड़े पैमाने पर सृजन
रोजगार के साथ विकास खासकर युवाओं के लिए उत्पादक रोजगार अवसर का सृजन. इसके लिए निम्नलिखित उपायों को अमल में लाने की जरूरत:
a) उच्च विकास दर: पिछले 10 वर्षों में भारतीय रेल का सकल राजस्व भारत के सकल घरेलू उत्पाद के 1.2 फीसदी के आस-पास रहा. अगले 10 वर्ष में इसे 3 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य.
b) स्टेनलेस स्टील और अल्यूमीनियम जैसी कम भार वाली सामग्रियों के उपयोग से माल डिब्बों के पेलोड में सुधार. वर्तमान के प्रति गाड़ी 5000 टन भार को बढ़ाकर 6000 टन करने का लक्ष्य.
c) 2020 तक माल लदान के 2165 मिलियन टन पहुंचने की उम्मीद
d) 300 किमी तक चलने वाले माल यातायात के 50 फीसदी और इसी दूरी में थोक कार्गो के 70 फीसदी बाज़ार को हासिल करने का लक्ष्य  
e) पार्सल सेवाओं का प्रबंधन एक पृथक व्यवसाय के रूप में. वर्त्तमान राजस्व 1600 करोड़ प्रतिवर्ष को कम से कम पांच गुना करने का लक्ष्य. व्हाईट गुड्स, प्रोसेस्ड फ़ूड, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, टेक्सटाइल्स, आदि उच्च दर वाले पार्सल के अलावा ऑटोमोबाइल तथा कृषि उत्पादों को भी आकर्षित करना
f) 289136 माल डिब्बों की खरीद   
g) भारतीय रेल वेबसाईट, गाड़ियों, स्टेशनों, टिकट, सीसीटीवी आदि में विज्ञापन से वर्त्तमान राजस्व 3000 करोड़ से बढ़ाकर 15000 करोड़ करना.
h) रेलवे की खाली पड़ी भूमि का व्यावसायिक उपयोग.
i) वर्तमान में लगभग 17000 बिना चौकीदार वाले रेलवे क्रॉसिंग हैं. रेल दुर्घटनाओं का 70% भाग इन्हीं रेल क्रॉसिंगों पर होती है. 2020 तक सभी रेल क्रॉसिंग को चौकीदार सहित करने का लक्ष्य.
j) 14 लाख रेल कर्मियों (मानव संसाधन) को प्रशिक्षित कर उनमें हाई स्किल के साथ साथ सॉफ्ट स्किल जैसे आतिथ्य, नम्रता, दयालुता, सेवा भाव आदि विकसित करना  
k) अग्रणी संस्थानों, जैसे आईआईटी, एनआईटी, सीएसआईआर और डीआरडीओ से सहयोग स्थापना ताकि स्वदेशी रेल कंपोनेंट और उपस्कर संबंधी उद्योगों में विकास. 2020 तक प्रौद्योगिकी के निर्यात में भी सक्षम.   
l) माल यातायात के वर्त्तमान 35 फीसदी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 फीसदी करना. इसके लिए प्रमुख लॉजिस्टिक प्रदाता कंपनियों के साथ भागीदारी, पृथक माल गलियारे, पत्तन (बंदरगाह) संपर्कता, के साथ साथ उच्च क्षमता के माल डिब्बों की वर्तमान खरीद 25000 हजार को बढ़ाकर 75000 हजार करना.

पर्यावरण अनुकूलता
परिवहन के अन्य साधनों की अपेक्षा रेल कम प्रदूषक है. अधिक उन्नत तकनीक और नए उपायों से कार्बन उत्सर्जन को कम से कम करने की योजना:
a) मुम्बई के उपनगरीय खंड में रिजेनरेटिव ब्रेकिंग फीचर वाली गाडियां चलाई गई, ब्रेक लगाते समय 35 से 40 फीसदी तक उर्जा का पुनर्सृजन.
b) संयुक्त राष्ट्र संघ फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसी) के साथ क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म (सीडीएम) के अंतर्गत एक प्रोजेक्ट डिजाइन डाक्यूमेंट विकसित किया गया. इससे प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख टन CO2 उत्सर्जन कम होने की संभावना.
c) रेल कर्मियों को प्रति परिवार 4 सीएफएल बल्ब का मुफ्त वितरण. कुल 2.6 करोड़ सीएफएल बल्ब से 1.4 लाख टन CO2  उत्सर्जन में कमी.
d) कर्षण और गैर कर्षण दोनों में बेहतर उर्जा कुशलता के माध्यम से 15 फीसदी उर्जा की बचत.
e) नई पीढ़ी के कम उर्जा इस्तेमाल वाले रेल इंजनों का विकास.
f) रेल स्टेशनों और कार्यालयों में उर्जा कुशलता में सुधार के लिए उर्जा ऑडिट. एलईडी बिजली व्यवस्था और उर्जा संरक्षण निर्माण कोड (ईसीबीसी) अपनाने पर जोर.
g) कम से कम 10 फीसदी उर्जा का प्रयोग सोलर पावर और बायोमास साधनों से.
h) केवल 3-स्टार उर्जा कुशलता या उससे उच्चतर दर वाले उत्पादों की खरीद.
i) रेल पटरियों के साथ-साथ पेड़-पौधे और रेल तटबंधों के ढलान पर घास लगाना.
j) सभी सवारी डिब्बों में ग्रीन शौचालय
k) तीन सिद्धांतों – रिडक्शन, रिसाइकिल तथा रियूज को अपनाकर कूड़े-कचरे का प्रबंधन         
भारतीय रेल विज़न-2020 में इतने महत्वाकांक्षी उन्नति के लिए   14 लाख करोड़ के निवेश की आवश्यकता बताई गई. इसमें 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए सामाजिक निजी भागीदारी से इस निवेश को पूरा करने की बात कही गई. और एक्सीलेरेटेड रेल डेवलपमेंट फंड (एआरडीएफ) के व्यवस्था की केंद्र सरकार से मांग की गई. केंद्रीय रेल मंत्री के अनुसार कुल निवेश का 64 फीसदी अर्थात   9 लाख करोड़ रुपए रेलवे खुद व्यवस्था कर लेगा जबकि शेष 36 फीसदी यानि   5 लाख करोड़ रुपए के लिए केंद्र सरकार से बजटीय सहायता की अपेक्षा है.