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भारत तथा विश्व बैंक के मध्य बिहार पंचायत सुदृढ़ीकरण परियोजना हेतु 8.4 करोड़ डॉलर का समझौता

भारत तथा विश्व बैंक ने गांव-स्तर पर स्थानीय शासन को सुदृढ़ करने के बिहार सरकार के प्रयासों में मदद करने हेतु 8.4 करोड़ डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए.

Jun 30, 2013 15:33 IST
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भारत तथा विश्व बैंक के मध्य बिहार पंचायत सुदृढ़ीकरण परियोजना हेतु 8.4 करोड़ डॉलर का समझौता 27 जून 2013 को किया गया. बिहार पंचायत सुदृढ़ीकरण परियोजना से विकास योजनाएं बनाने और इन्हें क्रियान्वित करने के साथ-साथ सामुदायिक जीवन को बढ़ावा देने और रोज़गार के अवसर पैदा करने के लिए पंचायत राज संस्थाओं को सुदृढ़ करने में सहायता प्राप्त होनी है.

बिहार पंचायत सुदृढ़ीकरण परियोजना हेतु ऋण समझौते पर भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में संयुक्त सचिव निलय मिताश; परियोजना की ओर से परियोजना निदेशक और बिहार ग्राम स्वराज योजना सोसाइटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी केबीएन सिंह; बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अमिताभ वर्मा; और विश्व बैंक की ओर से भारत में इसके परिचालन सलाहकार (ऑपरेशंस एडवाइज़र) माइकेल हैने ने हस्ताक्षर किए.

समझौते के मुख्य बिंदु

• इस परियोजना से राज्य सरकार की विकेन्द्रीकरण की कार्यसूची और ग्राम पंचायतों की विकास-नीतियां बनाने तथा इन पर अमल करने की क्षमताओं में सुधार-संबंधी कार्यों के लिए वित्त मुहैया कराया जाना है.
• इस परियोजना द्वारा लगभग 300 पंचायत सरकार भवनों के निर्माण के लिए भी धन मुहैया कराया जाना है.
• इस परियोजना का वित्त-पोषण इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईडीए) से मिलने वाले ऋण से किया जाना है. यह विश्व बैंक की ऋण देने वाली सहयोगी संस्था है, जो ब्याज-मुक्त ऋण मुहैया कराती है, जिसकी परिपक्वता अवधि 25 वर्ष है और जिसका भुगतान 5 वर्ष बाद शुरू होता है.
• इस परियोजना की मदद से पंचायतों की प्रशासन, नियोजन और वित्तीय-प्रबंधन संबंधी क्षमताओं का गठन किया जाना है. इससे पंचायती राज्य संस्थाओँ के संदर्भ में अपने अधिकारों और ज़िम्मेदारियों के बारे में लोगों की जानकारी बढ़ाने के लिए समुदायों को संगठित करने में मदद प्राप्त होनी है.
• इससे स्थानीय नेताओं और समुदायों के बीच स्थानीय कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जिनसे स्वास्थ्य और आजीविका-संबंधी परिणामों में सुधार हो सकता है; और समुदायों की प्राथमिकताओं के लिए वित्त जुटाने के लिए सरकार के कार्यक्रम-संबंधी संसाधनों तक पहुंच भी सुलभ होनी है.
• इस परियोजना से पंचायत-स्तर पर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणालियां भी मजबूत होनी है और परियोजना के सभी ज़िलों में कम्प्यूटरीकृत पंचायत लेखा प्रणाली – प्रियासॉफ़्ट – लागू की जानी है, जिसकी शुरूआत पटना और नालंदा जिलों से होनी है.

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