Search

भारत में बनेगी दुनिया की आधुनिकतम असॉल्ट AK-203 राइफल, जानिए खासियतें

AK-203 असॉल्ट राइफलों के लिए ओएफबी और रूसी कंपनी कंसर्न क्लानिश्नकोव के बीच रक्षा सौदे पर करार हुआ है. भारत और रूस की कंपनियां मिलकर इसे बनाएंगी.

Mar 5, 2019 09:35 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 03 मार्च 2019 को उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में भारत-रूस के आयुध कारखाने का उद्घाटन किया. भारत-रूस (इंडो-रशिया) राइफल प्राइवेट लिमिटेड भारत की आयुध फैक्टरी और रूस के प्रतिष्ठान का जॉइंट प्रोजेक्ट है.

कोरवा आयुध फैक्टरी में प्रतिष्ठित कलाशनिकोव राइफलों की नवीनतम श्रेणियां बनाई जाएंगी. यह संयुक्त उद्यम देश में शस्त्र सेनाओं को मदद देगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती प्रदान करेगा. रूस के सहयोग से अमेठी में AK- 203 मॉर्डन राइफल बनाने का काम शुरू किया जायेगा. यहां भारतीय सेना के लिए 7.5 लाख राइफलें बनाई जायेंगी.

अमेठी में आयुध फैक्ट्री का विवरण

•    कोरवा आयुध फैक्टरी द्वारा भारतीय सेना को एके-47 राइफल का आधुनिक संस्करण AK–203 प्रदान किया जाएगा.

•    इस उत्पादन के लिए भारत ने रूस के साथ समझौता किया है. इस समझौते के अनुसार, रूस के सहयोग से भारत में 07 लाख 50 हजार (7,50,000) असॉल्ट राइफलें बनेंगी.

•    AK-203 असॉल्ट राइफलों के लिए ओएफबी और रूसी कंपनी कंसर्न क्लानिश्नकोव के बीच रक्षा सौदे पर करार हुआ है. भारत और रूस की कंपनियां मिलकर इसे बनाएंगी.

•    भारतीय सेना की पुरानी इंसास राइफल को रिप्लेस किया जाएगा और इसकी जगह जवानों को AK-203 असॉल्ट राइफलें मिलेंगी.

 



AK-203 राइफल की विशेषताएं

•    यह AK सीरीज़ की सबसे आधुनिक और भरोसेमंद राइफल मानी जाती है.

•    AK-203, कंटवर्टेबल राइफल है. इसे सैमी ऑटोमेटिक और ऑटोमैटिक तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है.

•    AK-47 सबसे बेसिक मॉडल है इसके बाद एके में 74, 56, 100 सीरीज, 200 सीरीज आ चुकी हैं.

•    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नई असॉल्ट राइफल की लंबाई करीब 3.25 फुट होगी.

•    गोलियों से भरी राइफल का वजन लगभग 4 किलोग्राम होगा.

•    साथ ही यह किसी भी ऑपरेशन में जवानों के लिए इजी टू हैंडल होगी. यह नाइट ऑपरेशन में भी काफी कारगर होगी.

•    एक मिनट में 600 गोलियां दागी जा सकेंगी अर्थात् एक सेकंड में दस गोलियां चलाई जा सकेंगी. इसके लिए एके-203 के गैस चैम्बर और स्प्रिंग को पहले से बेहतर किया जाएगा.

•    इसरी रेंज 400 मीटर तक होगी और नया सिपाही भी इससे अचूक निशाना लगा सकेगा.

•    AK-203 महज आठ से नौ पुर्जों से मिलकर बनी होगी और इसे मात्र एक मिनट में दोबारा संगठित किया जा सकेगा.

 

यह भी पढ़ें: विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान सकुशल भारत लौटे