मानव अंग प्रतिरोपण (संशोधन) विधेयक 2011 को राज्यसभा की मंजूरी

India Current Affairs 2011. मानव अंग प्रतिरोपण (संशोधन) विधेयक 2011 को राज्यसभा द्वारा 26 अगस्त 2011 को पारित कर दिया गया. राज्यसभा में पारित होने के साथ ही इस...

Created On: Aug 30, 2011 12:24 ISTModified On: Sep 23, 2011 14:05 IST

मानव अंग प्रतिरोपण (संशोधन) विधेयक 2011 को राज्यसभा द्वारा 26 अगस्त 2011 को पारित कर दिया गया. राज्यसभा में पारित होने के साथ ही इस विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई. लोकसभा इसे पहले ही पारित कर दिया था. विधेयक में मानव अंगों के अवैध व्यापार पर सजा को बढ़ाकर 10 वर्ष और जुर्माने को एक करोड़ रुपए करने का प्रावधान है. साथ ही इसमें मानव अंग दान करने वाले करीबी रिश्तेदारों की परिभाषा में विस्तार किया गया. इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य अंगों को निकालने, उसके रखरखाव और प्रतिरोपण से जुड़े विविध आयामों का नियमन करना है.

केंद्र सरकार मानव अंगों का एक राष्ट्रीय डाटा बेस तैयार करेगी जिसमें उन सभी अस्पतालों के नाम दर्ज होंगे, जहां दान में प्राप्त मानव अंगों का आंकड़ा तथा उन व्यक्तियों की जानकारी होगी जिन्होंने अंगदान किया है और जिन्हें अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता है. यह डाटा बेस इसलिए तैयार किया जाएगा ताकि एक अस्पताल को पता चल सके कि दूसरे अस्पताल के बैंक में किस तरह के मानव अंग है और किस व्यक्ति को किस तरह के मानव अंगों के प्रत्यारोपण की जरूरत है. विधेयक में व्यवस्था है कि नाबालिग व्यक्ति का अंगदान उसकी मृत्यु के बाद, विशेष परिस्थितिय में तथा उनके परिजनों की अनुमति से ही संभव है. मानव अंगों का प्रत्यारोपण करने वाले अस्पतालों का पंजीकरण अनिवार्य है तथा उन सभी गैर सरकारी संगठनों का भी विशेष पंजीकरण अनिवार्य है जो मानव अंगों के प्रत्यारोपण के कामकाज में शामिल हैं.

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, जिन मरीजों का मस्तिष्क काम करना बंद कर दिया है उन्हें मृत घोषित करने का अधिकार अब एनेस्थेटिस्ट या गहन चिकित्सा कक्ष में कार्यरत डाक्टर या सर्जन को भी प्रदान किया गया. पहले यह अधिकार केवल न्यूरो सर्जन के पास ही था. देश में नेत्र सर्जनों की संख्या कम होने के कारण नेत्र तकनीशियन भी अब नेत्रदान करने वाले मरीजों का नेत्र ले सकते हैं. विधेयक के प्रावधानों के तहत कोई विदेशी व्यक्ति भी किसी भारतीय को अंगदान कर सकता है या भारतीय व्यक्ति से अंग प्राप्त कर सकता है परन्तु इसके लिए यह अनिवार्य है कि वे आपस में रिश्तेदार हों. यदि अंगदान करने वाला व्यक्ति और अंग प्राप्त करने वाला व्यक्ति अलग-अलग राज्य के हैं, तो अंग प्राप्त करने वाले राज्य की अंग प्रत्यारोपण अधिकार देने वाली समिति की मंजूरी से अंग प्रत्यारोपण संभव है.

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