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वर्ष 2011 के ज्ञानपीठ पुरस्कार (47वें) हेतु उड़िया भाषा की लेखिका डॉ.प्रतिभा राय का चयन

उड़िया भाषा की लेखिका एवं उपन्यासकार डॉ. प्रतिभा राय को वर्ष 2011 का ज्ञानपीठ पुरस्कार देने का निर्णय लिया गया...

Dec 28, 2012 13:57 IST
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प्रतिभा रायउड़िया भाषा की लेखिका एवं उपन्यासकार डॉ. प्रतिभा राय को वर्ष 2011 का ज्ञानपीठ पुरस्कार देने का निर्णय लिया गया. यह 47वां ज्ञानपीठ पुरस्कार है. डॉ.सीताकांत महापात्रा की अध्यक्षता में गठित चयन समिति ने यह निर्णय 27 दिसंबर 2012 को लिया. डॉ. प्रतिभा राय के पहले चंद्रशेखर कम्बार को (46वां) ज्ञानपीठ पुरस्कार 2010 प्रदान किया गया. प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 1965 में मलयालम लेखक जी शंकर कुरुप को प्रदान किया गया था.डॉ प्रतिभा राय का जन्म उड़ीसा में 21 जनवरी 1943 को हुआ.

डॉ प्रतिभा राय देश की प्रमुख फिक्शन लेखकों में शामिल है और उनके उपन्यास एवं कहानियां किस्सागोई की परंपरा से जुडे होते हैं, जिसमें चरित्र और परिस्थितियां जीवंत हो जाती है. डॉ. प्रतिभा राय के 20 उपन्यास, 24 लघुकथा संग्रह, 10 यात्रा वृतांत, दो कविता संग्रह और कई निंबंध प्रकाशित हुए हैं. इसमें यज्ञनासैनी, शिल पदम, महामोह, उत्तर मार्ग और द्रोपदी प्रमुख हैं. उनकी प्रमुख रचनाओं का देश की प्रमुख भाषाओं में और अंग्रेजी सहित दूसरी विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है. डॉ. प्रतिभा राय ने बोंडा जनजाति के साथ अत्यंत प्रतिबद्धता और साहस के साथ काम किया.

डॉ प्रतिभा राय मूर्तिदेवी पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला हैं. यह पुरस्कार उन्हें वर्ष 1991 में उपन्यास यज्ञनासैनी के लिए दिया गया था. इनका पहला उपन्यास वर्षा बसंत बैशाखा है.डॉ. प्रतिभा राय को वर्ष 2000 में लघुकथा संग्रह उल्लंघन के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से, वर्ष 2007 में पदमश्री से सम्मानित किया गया.
 
ज्ञानपीठ पुरस्कार चयन समिति के अन्य सदस्य  प्रो. मैनेजर पांडे, डा. के सच्चिदानंदन, प्रो. गोपीचंद नारंग, केशुभाई देसाई, दिनेश मिर्शा और रवींद्र कालिया हैं.

ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है. यह पुरस्कार भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची में उल्लिखित 22 भाषाओं में से किसी भाषा के लेखक को प्रदान किया जाता है.

वर्ष 2011 से  पुरस्कार स्वरूप 11 लाख रुपए नकद, शॉल व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है. इसके पहले  इस सम्मान के तहत सात लाख रुपए नकद दिए जाते थे. वर्ष 2011 में भारतीय ज्ञानपीठ ने पुरस्कार राशि को सात से बढ़ाकर 11 लाख रुपए किये जाने का निर्णय लिया था.

वर्ष 1965 में 1 लाख रुपए की पुरस्कार राशि से प्रारंभ हुए इस पुरस्कार को 2005 में 7 लाख रुपए कर दिया गया. वर्ष 2005 के लिए चुने गए हिन्दी साहित्यकार कुंवर नारायण पहले व्यक्ति थें जिन्हें 7 लाख रुपए का ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ. प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 1965 में मलयालम लेखक जी शंकर कुरुप को प्रदान किया गया था. उस समय पुरस्कार की धनराशि 1 लाख रुपए थी. वर्ष 1982 तक यह पुरस्कार लेखक की एकल कृति के लिए दिया जाता था. लेकिन इसके बाद से यह लेखक के भारतीय साहित्य में संपूर्ण योगदान के लिए दिया जाने लगा.

वर्ष 2011 तक हिन्दी तथा कन्नड़ भाषा के लेखक सबसे अधिक सात बार यह पुरस्कार पा चुके हैं. यह पुरस्कार बांग्ला को 5 बार, मलयालम को 4 बार, उड़िया, उर्दू और गुजराती को तीन-तीन बार, असमिया, मराठी, तेलुगू, पंजाबी और तमिल को दो-दो बार दिया जा चुका है.

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