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विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान सकुशल भारत लौटे

इतिहास में ऐसा पहली बार है कि जब किसी दूसरे देश की ओर से सैन्य अफसर को 60 घंटे के भीतर भारत को सौंप दिया गया है.

Mar 2, 2019 10:10 IST

भारत की कूटनीति एवं प्रतिकियाओं के चलते पाकिस्तान ने 01 मार्च 2019 को भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को भारत को सौंप दिया. अभिनंदन वर्धमान 01 मार्च की रात 9 बजकर 10 बजकर पाकिस्तान से स्वदेश लौटे.

अभिनंदन वर्धमान गहरे रंग का कोट और खाकी रंग की पैंट पहने हुए थे. उन्होंने गर्व से सिर ऊंचा किए पाकिस्तान से गेट पार करके भारत में प्रवेश किया. अभिनंदन वर्धमान को इसके बाद अटारी सीमा से वायुसेना के वाहन में अमृतसर ले जाया गया. इतिहास में ऐसा पहली बार है कि जब किसी दूसरे देश की ओर से सैन्य अफसर को 60 घंटे के भीतर भारत को सौंप दिया गया है.

 

विंग कमांडर कैसे पहुंचे पाकिस्तान?

26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक करते हुए पाकिस्तानी सीमा में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया था. उसके बाद पाकिस्तानी वायुसेना की ओर से भारत की वायुसीमा का उल्लंघन किया गया और इस दौरान हुए हवाई संघर्ष में पाकिस्तान का एक एफ-16 विमान गिरा दिया गया एवं भारत का मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस संघर्ष के बाद विंग कमांडर अभिनंदन का पैराशूट सीमा पार की ओर बढ़ गया और उन्हें 27 फरवरी को पाकिस्तान ने पकड़ लिया. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी संसद में कहा था कि वह शांति के संदेश के तौर पर भारतीय पायलट को रिहा कर रहे हैं.


नचिकेता को 8 दिन बाद सौंपा गया था

इससे पहले 27 मई, 1999 में करगिल युद्ध के दौरान वायुसेना के ग्रुप कैप्टन के. नचिकेता को भी पाकिस्तान ने कब्जे में ले लिया था. उस समय अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद आठ दिन बाद पाकिस्तान ने उन्हें रिहा किया था. नचिकेता ने पाकिस्तान की कैद में रहते हुए कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया था. यह माना जाता है कि पाकिस्तानी सेना ने उनका उत्पीड़न किया था.

नागरिक सौंपे जाने की प्रक्रिया?

•    किसी नागरिक को सौंपने से पहले अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस सोसाइटी उसकी स्वास्थ्य जांच करती है. यह जांच इसलिए की जाती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उस देश के नागरिक को किसी तरह का कोई शारीरिक नुकसान तो नहीं पहुंचाया गया है.

•    यदि किसी तरह का कोई ड्रग्स दिया गया हो और शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना दी गई हो, तो जिनेवा कन्वेंशन के तहत जांच जरूरी होती है.

•    देश लौटने के बाद उसका दोबारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है.

•    इसके बाद देश की रक्षा तथा खुफिया एजेंसियों के अधिकारी उस नागरिक से पूछताछ करते हैं.

•    इसके बाद रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी जाती है. यदि कुछ आपत्तिजनक लगता है तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश किया जाता है.

 

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