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विदेश मंत्रालय और नालंदा विश्वविद्यालय के मध्य मुख्यालय समझौते के प्रस्ताव को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विदेश मंत्रालय और नालंदा विश्वविद्यालय के मध्य मुख्यालय समझौते पर हस्ताक्षर करने के प्रस्ताव को 28 जून 2013 को मंजूरी दी.

Jun 29, 2013 13:19 IST
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विदेश मंत्रालय और नालंदा विश्वविद्यालय के मध्य मुख्यालय समझौते पर हस्ताक्षर करने के प्रस्ताव को 28 जून 2013 को मंजूरी दी. इस समझौते का उद्देश्य विश्वविद्यालय और इसके शैक्षिक स्टॉफ के सदस्यों को विशेषाधिकार और रक्षा प्रदान करना है.

यह समझौता विश्वविद्यालय की कुशल कार्य-प्रणाली और परिचालन का समग्र ढांचा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है. इससे विश्वविद्यालय को पूरे विश्व से प्रतिभाएं प्राप्त करने में मदद मिलनी है.

यह समझौता हस्ताक्षर होने और अधिसूचना के तुरंत बाद लागू हो जाना है. इस समझौते से पूरे विश्व से श्रेष्ठ शिक्षाविदों को विश्वविद्यालय का पहला शैक्षिक सत्र शुरू होने से पहले नियोजित करने में मदद प्राप्त होनी है. विश्वविद्यालय के शिक्षकों की भर्ती नियमों और शर्तों का निर्धारण किए बिना नहीं हो सकती है. इसके लिए मुख्यालय समझौते का निष्कर्ष आवश्यक है.

इस समझौते की मुख्य विशेषताएं

• मेजबान देश द्वारा किसी अनुचित हस्ताक्षेप या हानि के विरूद्ध विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने हैं और इस विश्वविद्यालय के कार्य में सहायता प्रदान की जानी है.
• विश्वविद्यालय, इसकी परिसंपत्तियां, इसकी आय और अन्य संपत्ति सभी प्रत्यक्ष करों, सीमा-शुल्क और कार्यालय उपयोग के लिए आयात और निर्यात की गई वस्तुएं निषेधों और प्रतिबंधों से मुक्त होनी है.
• विश्वविद्यालय के कुलपति और शैक्षिक स्टॉफ को जो मेजबान देश के नहीं हैं उन्हें उनके वेतन, मानदेय, भत्ते और अन्य परिलब्धियों के संदर्भ में करों में छूट दी जानी है. उन्हें मेजबान देश में विश्वविद्यालय की नौकरी के दौरान उचित वीजा प्राप्त करने, गतिशील और अगतिशील संपत्ति रखने की स्वतंत्रता प्राप्त होनी है और सीमा शुल्क, करों और अन्य लेवी से मुक्त आयात करने का अधिकार भी प्राप्त होना है.
• विश्वविद्यालय को सेवा उपलब्ध कराने वाले मेजबान देश भारत के कुलपति और शैक्षिक स्टॉफ को वेतन, मानदेय, भत्तों और अन्य परिलब्धियों के संदर्भ में करों से छूट दी जानी है.

नालंदा विश्वविद्यालय

नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा उच्च शिक्षा के एक उत्कृष्ट अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में कार्य किया जाना है. विश्वविद्यालय द्वारा मूल मानवीय मूल्यों के साथ आधुनिक, वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान और कौशल को एकीकृत किया जाना है. विश्वविद्यालय द्वारा व्यक्ति और समाज की आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से सार्वभौमिक मैत्री, शांति और समृद्धि का विकास किया जाना है. ईडीसीआईएल द्वारा जुलाई 2012 में तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में इस योजना का वर्ष 2010-11 और 2021-22 के मध्य धन की आवश्यकता 3532.62 करोड़ रूपए होने का अनुमान है. भारत सरकार द्वारा अपेक्षित सीमा तक विश्वविद्यालय का खर्च उठाया जाना है.

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