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विशेषज्ञ समिति द्वारा स्वास्थ्य बीमा डिस्क्लेमर में प्रयुक्त शब्दों में परिवर्तन की सिफारिश

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) के लिए बी राम प्रसाद की अध्यक्षता में बनी विशेषज्ञ समिति ने बीमा कम्पनियों द्वारा विज्ञापनों के दौरान डिस्क्लेमर में प्रयोग किये जा रहे शब्दों में परिवर्तन की सिफारिश की है

May 28, 2015 15:05 IST

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) के लिए बी राम प्रसाद की अध्यक्षता में बनी विशेषज्ञ समिति ने बीमा कम्पनियों द्वारा विज्ञापनों के दौरान डिस्क्लेमर में प्रयोग किये जा रहे शब्दों में परिवर्तन की सिफारिश की है.

समिति की रिपोर्ट 22 मई 2015 को आईआरडीए की वेबसाइट पर प्रकाशित की गई थी.

आईआरडीए की ओर से बीमा कम्पनियों के लिए "बीमा आग्रह की विषय वस्तु है" शब्द का प्रयोग करना अनिवार्य था. नयी सिफारिश के अनुसार, “बीमा खरीदने से पहले सभी शर्तों तथा अपवादों को जान कर ही अंतिम निर्णय लें”  शब्दों को शामिल करने की सिफारिश की गयी है.

समिति द्वारा की गयी सिफारिशें:


-    नियमों में पारदर्शिता लाने के सिफारिश की गयी ताकि नियमों में के क्रियान्वन में आसानी हो सके
-    इन सिफ़ारिशो के अनुसार थर्ड पार्टी तथा बीमाकर्ता के पास पहचान, मॉनिटर, कंट्रोल तथा घोटालों से बचने के सभी उपाय होने चाहिए.

इसके अलावा, समीति ने कुछ अन्य मुद्दों पर भी अपनी सिफारिश दी है, जो इस प्रकार है-

• पॉलिसी धारक संरक्षण, पॉलिसीधारक सर्विसिंग, फ्रॉड कंट्रोल और जोखिम प्रबंधन
• उत्पाद, वितरण, ग्रामीण, सामाजिक क्षेत्र और माइक्रो-बीमा
•  पुनःबीमा, आरक्षित और शोधन क्षमता
• कैपिटल, लेखा, प्रबंधन, निवेश, और विलय और अधिग्रहण के व्यय
• स्वास्थ्य बीमा निर्देश 2013
• पॉलिसी धारक के संरक्षण संबंधित निर्देश

समीति का कहना है कि इन सिफारिशों के अनुसार ग्राहक, प्रदाता, दाता और सभी संबंधित पक्षों को आपस में जानकारी साझा करने में आसानी होगी.

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