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विश्व की प्रथम व्यावहारिक कृत्रिम पत्ती का आविष्कार एमआईटी के डेनियल नोसेरा के नेतृत्त्व में

डेनियल नोसेरा के नेतृत्त्व में वैज्ञानिकों के दल ने सिलिकॉन, इलेक्ट्रोनिक्स और विभिन्न उत्प्रेरकों की मदद से कृत्रिम पत्ती का निर्माण किया. डेनियल नोसेरा ने ..... करेंट अफेयर्स 2011

Mar 29, 2011 17:43 IST
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अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने डेनियल नोसेरा के नेतृत्त्व में विश्व की पहली ऐसी व्यावहारिक कृत्रिम पत्ती को विकसित किया जो सूर्य की रोशनी और पानी से ऊर्जा का उत्पादन करने में सक्षम है. अमेरिकी रसायन शास्त्र के 241वें राष्ट्रीय सम्मलेन में 27 मार्च 2011 को डेनियल नोसेरा ने विश्व की पहली व्यावहारिक कृत्रिम पत्ती के आविष्कार और इससे जुड़ी अन्य संभावनाओं के बारे में बताया.


वैज्ञानिकों के दल ने सिलिकॉन, इलेक्ट्रोनिक्स और विभिन्न उत्प्रेरकों की मदद से कृत्रिम पत्ती का निर्माण किया जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं के द्वारा सूर्य की रोशनी का इस्तेमाल कर जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित कर देती है, जिससे ऊर्जा का उत्पादन होता है. व्यावहारिक कृत्रिम पत्तियों को पानी में रखने से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के जरिए ऊर्जा उत्पादन होता है.


व्यावहारिक कृत्रिम पत्तियां आकार में ताश के पत्ते के समान हैं, जो सौर सेल की भांति कार्य करने में सक्षम हैं. डेनियल नोसेरा के अनुसार पानी के गैलन में सूर्य की रोशनी में छोड़ देने पर ये कृत्रिम पत्तियां एक दिन में एक घर में खपत होने वाली औसतन बिजली का उत्पादन कर सकती हैं.


व्यावहारिक कृत्रिम पत्ती के आविष्कार से भारत और अन्य विकासशील देशों में ऊर्जा के सस्ते स्रोत का एक और विकल्प उपलब्ध हो गया. साथ ही इससे उत्पादित ऊर्जा प्रदूषण रहित भी रहेगी.


विश्व की पहली कृत्रिम पत्ती का विकास अमेरिका के कोलोराडो स्थित राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा प्रयोगशाला के जॉन टर्नर ने किया था. हालांकि जॉन टर्नर की कृत्रिम पत्ती व्यावहारिक नहीं थी क्योंकि वह दुर्लभ और महंगे धातु से बनी थी और उसकी जीवन आयु भी मात्र एक दिन ही थी.

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