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वैज्ञानिकों द्वारा विश्व का पहला लचीला एवं त्वचा जितना पतला डिस्प्ले तैयार

वैज्ञानिकों की एक टीम ने प्रकृति से प्रेरित तकनीक द्वारा विश्व का पहला पूर्ण रंग वाला, लचीला एवं महीन फिल्म डिस्प्ले तैयार किया है

Jun 29, 2015 16:30 IST

यूनिवर्सिटी ऑफ़ सेंट्रल फ्लोरिडा (यूसीएफ) के भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक देबाशीष चंदा की अगुआई में वैज्ञानिकों की एक टीम ने प्रकृति से प्रेरित तकनीक द्वारा विश्व का पहला पूर्ण रंग वाला, लचीला एवं महीन फिल्म डिस्प्ले तैयार किया है.

शोध के परिणाम नेचर कम्युनिकेशन्स पत्रिका में 11 जून 2015 को प्रकाशित किये गए.

इस तकनीक द्वारा आप अपनी पोशाक के रंग को पलक झपकते ही बदल सकते हैं, मान लीजिये यदि किसी शादी समारोह में अन्य व्यक्ति ने आपकी पोशाक जैसे ही कपड़े पहने हैं तो आप पलक झपकते ही अपनी पोशाक का रंग बदल सकते हैं.

डिस्प्ले की विशेषताएं


ध्रुवीकरण स्वतंत्र तरल क्रिस्टल (एलसी) का प्रयोग करने पर प्लास्मोनिक प्रणाली, एलसी-प्लास्मोनिक को और अधिक आकर्षक, फिल्टर तथा ऑप्टिकल प्रौद्योगिकियों के लिए उपयोगी बनाता है.

इसे अपने प्रकाश स्रोत की आवश्यकता नहीं होती अपितु यह अपने आस-पास के परिवेश से ही प्रकाशमान रहता है.

इस नयी खोज से परिधान, फैशन, घरेलू सामान सभी में आवश्यकतानुसार बदलाव किये जा सकते हैं.

यह डिस्प्ले कुछ ही माइक्रोन मोटा है जिसकी तुलना मनुष्य के सिर के बाल (100 माइक्रोन) से की जा सकती है. इस बेहद महीन डिस्प्ले को लचीले पदार्थों जैसे प्लास्टिक तथा सिंथेटिक परिधानों में प्रयोग किया जा सकता है.

विकास प्रक्रिया

विशेष रूप से डिज़ाइन की गयी नैनो स्ट्रक्चर प्लास्मोनिक सतह को उच्च बिरेफ्रिजेन्स के तरल क्रिस्टल के साथ विशेष संयोजन के रूप में उपयोग करके टीम ने सतह को ट्युनेबल ध्रुवीकरण स्वतंत्र परावर्तक के तहत प्रयोग किया जिससे वोल्टेज अप्लाई करने पर सतह के रंग में परिवर्तन दर्ज किया गया.


रंगों में बदलाव सतह में परिवर्तन कर के लिक्विड क्रिस्टल के पुनरभिविन्यास की सहायता से प्लास्मोनिक एवं लिक्विड क्रिस्टल के बीच बदलाव सुनिश्चित किये गये.

विभिन्न अवधियों की अंकित संरचनाओं के साथ संयोजन कर के रंगों की पूर्ण श्रृंखला प्राप्त की गयी जिससे महत्वपूर्ण पिक्सेल्स की विशेष संरचना देखी गयी.

महत्व

अनुसंधान का मौजूदा तकनीक जैसे टेलीविज़न, कंप्यूटर तथा मोबाइल उपकरणों के डिस्प्ले पर विशेष योगदान होगा, क्योंकि यह पतले अवश्य हैं किन्तु इस अविष्कार की तुलना में बेहद मोटे हैं.

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