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सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन

India Current Affairs 2012. भारत की महत्वपूर्ण नदियों को जोड़ने संबंधी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया. सर्वोच्च न्यायालय ने ......

Feb 29, 2012 16:46 IST

भारत की महत्वपूर्ण नदियों को जोड़ने संबंधी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया. सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि नदी जोड़ो परियोजना को समयबद्ध तरीके के साथ लागू किया जाए.


सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसएच कपाडिया, न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक व न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की पीठ ने 27 फरवरी 2011 को नदियों को जोड़ने संबंधी परियोजना के निर्णय में स्पष्ट किया कि न्यायालय के लिए संभव नहीं है कि वह परियोजना की संभावनाओं व अन्य तकनीकी पहुलुओं पर निर्णय कर पाए. सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के अनुसार यह काम विशेषज्ञों का है, साथ ही यह परियोजना राष्ट्र हित में है, क्योंकि इससे सूखा प्रभावित लोगों को पानी मिलेगा.


सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसएच कपाडिया, न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक व न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की पीठ ने नदियों को जोड़ने संबंधी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया. इस समिति में जल संसाधन मंत्री, जल संसाधन सचिव, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सचिव के अलावा चार विशेषज्ञ होंगे. चार विशेषज्ञों में जल संसाधन मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तथा योजना आयोग से एक-एक विशेषज्ञ नामित किए जाने हैं. समिति में राज्य सरकार की जल एवं सिंचाई विभाग का भी एक प्रतिनिधि होगा और 2 सामाजिक कार्यकर्ता तथा एक सर्वोच्च न्यायालय के वकील रंजीत कुमार सदस्य होंगे.


सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के निर्णय के अनुसार गठित समिति नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन की संभावनाओं पर विचार करेगी और उसे लागू करेगी. इस समिति को कम से कम दो माह में एक बैठक जरूर करनी पड़ेगी. किसी सदस्य के अनुपस्थित रहने पर बैठक निरस्त नहीं की जा सकेगी. समिति को साल में दो बार कैबिनेट को रिपोर्ट सौंपनी पड़ेगी. और कैबिनेट उस रिपोर्ट पर जल्दी से जल्दी (अधिकतम 30 दिनों में) निर्णय लेगी. 


ज्ञातव्य हो कि अक्टूबर 2002 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार ने सूखे व बाढ़ की समस्या से छुटकारे के लिए भारत की महत्वपूर्ण नदियों को जोड़ने संबंधी परियोजना को लागू करने का प्रस्ताव लाई थी.