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सीसीआई ने विमानन क्षेत्र की तीन कंपनियों पर फ्यूल सरचार्ज फिक्सिंग में अर्थदंड लगाया

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने 17 नवंबर 2015 को विमानन क्षेत्र की तीन कंपनियों जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड,  इंटरग्लोबल एविएशन लिमिटेड और स्पाइस जेट लिमिटेड पर अर्थदंड लगाया.

Nov 19, 2015 19:20 IST

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने 17 नवंबर 2015 को विमानन क्षेत्र की तीन कंपनियों जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड,  इंटरग्लोबल एविएशन लिमिटेड और स्पाइस जेट लिमिटेड को अनियमित तरीके से (फ्यूल सरचार्ज फिक्सिंग) व्यापार करने के मामले में दोषी पाया और भारी भरकम अधिभार (एफएससी) अर्थदंड के रूप में लगाया.

इस मामले में शिकायत प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 19 (1) (ए) के तहत जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड,  इंटरग्लोबल एविएशन लिमिटेड और स्पाइस जेट लिमिटेड, गो एयरलाइंस (इंडिया), और एयर इंडिया लिमिटेड के विरुद्ध एक्सप्रेस इंडस्ट्री कौंसिल की ओर से दायर की गयी थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उक्त विमानन कंपनियों ने प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौता प्रावधान अधिनियम की धारा 3 का उल्लंघन किया है.

सीसीआई द्वारा पारित आदेश की मुख्य विशेषताएं
 
• आयोग के संज्ञान में आया कि विमानन क्षेत्र की तीन कंपनियां मिलीभगत करके एफएससी की दरों में मनमानी कर रही हैं.
• इस तरह के आचरण से विमानन कंपनियों ने परोक्ष रूप से एयर कार्गो परिवहन की दरों का निर्धारण किया और इस तरह धारा 3 (1) के धारा 3 के प्रावधानों, प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के धारा (3) (ए) का उल्लंघन करते पाया गया.
• आयोग ने विमानन कंपनियों जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड, इंटरग्लोबल एविएशन लिमिटेड और स्पाइस जेट लिमिटेड पर क्रमश: 151.69 करोड़ रुपए, 63.74 करोड़ रुपये और 42.48 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया.
• इसके अलावा विमानन कंपनियों को सीज करने और और व्यापार से विरत करने का आदेश भी दोषी एयरलाइंस के खिलाफ जारी किया गया.
• सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया लिमिटेड पर कोई दंड नहीं लगाया क्योंकि इसको इस तरह के आचरण में अन्य एयरलाइंस के साथ समानांतर दोषी नहीं पाया गया.

सरकारी विमानन क्षेत्र की दूसरी कंपनी गो एयरलाइंस (इंडिया) पर भी कोई जुर्माना नहीं लगाया गया. इसमे आयोग का तर्क था कि गो एयरलाइंस (इंडिया) का कार्गो संचालन किसी अन्य एजेंसी द्वारा किया जाता है, गो एयरलाइंस (इंडिया) का वाणिज्यिक/ आर्थिक पहलुओं के किसी भी हिस्से पर कोई नियंत्रण नहीं है.  
• विमानन कंपनियों की अनिश्चित वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत कारोबार के 1 प्रतिशत की दर से आयोग ने दंड लगाया.
• आयोग ने माना कि इस तरह का आचरण एयर कार्गो उद्योग में देश के आर्थिक विकास को नजरअंदाज करता है.