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क़तर तथा भारत: एक परिचर्चा

दक्षिण पशिमी एशिया के देशों ने क़तर को अपने आपसी रिश्तो से बाहर कर दिया है. इस घटना ने दक्षिण पश्चिम एशिया में एक जटिल स्थिति पैदा कर दी है. हमने यहाँ इस स्थिति में भारत के क़तर के साथ संबंधो का विस्तृत विश्लेषण किआ है.

Jun 12, 2017 14:21 IST

क़तर-भारत आपसी रिश्तेसऊदी अरब और अन्य अरब देशों ने क़तर को अलग करने की मंशा से उसके साथ सभी राजनयिक सम्बन्ध समाप्त कर एक नए युग की शुरुआत की है.
खाड़ी में 7 मिलियन भारतीय (कतर में 6 लाख) की उपस्थिति के कारण भारत को इस क्षेत्र के फॉल्टलाइन को नेविगेट करना होगा.
भारत सरकार इन घटनाओं को गल्फ कॉपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के आंतरिक मामले के रूप में देख रही है.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उम्मीद जताई थी कि जीसीसी के अंतर्गत सभी चीजें सामान्य हो जाएंगी. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं पहले भी हुई हैं. लेकिन गौरतलब है कि इस कदम का भारत-कतर संबंधों पर एक बहुत बड़ा असर होगा.
कतर एफडीआई का प्रवाह भारत में बहुत महत्वपूर्ण है. इस दौरान प्रमुख अमेरिकी सैन्य अड्डे का घर क़तर के साथ ईमानदारीपूर्वक खुले विचार से मंत्रणा करने की जरुरत है.  
इन सारी घटनाओं का भारत के क़तर के साथ सम्बन्धों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ेगा. हमने इस आर्टिकल के माध्यम से भारत पर इन घटनाओं के संभावित प्रभाव का वर्णन किया है.

भारत का स्टैंड (रुख)

गतिशीलता और भू-राजनीति  पर क़तर द्वारा मुस्लिम ब्रदरहुड और इस्लामी राज्य तथा अल-क़ायदा को कथित समर्थन देने के कारण यह जीसीसी के आतंरिक संघर्षों से कहीं बढ़कर है. इसलिए भारत को इस संघर्ष पर कोई विशेष रुख अपनाने की आवश्यकता नहीं है.
दुनिया का कच्चा तेल का सबसे बड़ा निर्यातक सऊदी अरब के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं.संयुक्त अरब अमीरात में अबू धाबी भी एक प्रमुख तेल निर्यातक है.
कतर तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और प्राकृतिक गैस से निकलने वाले कम घनत्व वाले तरल ईंधन और रिफाइनिंग उत्पाद कंडेनसेट का एक प्रमुख विक्रेता है.
 इसलिए  जब तक कतर में रहने वाले भारतीय बड़े पैमाने पर प्रभावित नहीं होते हैं तब तक भारत को एक संतुलित रुख अपनाने की आवश्यक्ता है.
पिछले तीन वर्षों में मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईरान और कतर का दौरा किया है, जबकि यूएई के महाराज इस साल गणतंत्र दिवस समारोह पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत आए थे. मोदी ने पिछले महीने फिलीस्तीनी राष्ट्रपति की मेजबानी की और अगले महीने इजरायल जाने वाले हैं.
इसका मतलब है कि पाकिस्तान के करीबी राष्ट्र पश्चिम एशियाई देशों के साथ भारत के सामरिक सम्बन्ध रहे हैं. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में हाल के वर्षों में आतंकवाद को रोकने के प्रयास में और वृद्धि हुई है क्यों कि ये सभी राष्ट्र इस्लामिक स्टेट से सम्बन्ध रखने वाले लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने तथा उन्हें वापस भेजने में सक्षम हैं.
सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात 1990 के दशक में अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता  देने वाले कुछ राष्ट्रों में से थे. दोहा में तालिबान का कार्यालय खोलने के लिए क़तर ने अफगानिस्तान से वार्ता की और इसे खोलने की सुविधा प्रदान की.
रणनीतिक और सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए इन पश्चिम एशियाई देशों के साथ सम्बन्ध बनाये रखना और कुछ देशों का पक्ष लेना मुश्किल होगा. साथ ही भारत की पश्चिम एशिया पर ऊर्जा निर्भरता बहुत अधिक है. अनुमानतः भारत अपने तेल और गैस क्षेत्र के आधे से अधिक ऊर्जा आवश्यक्ताओं के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर करता है.
खाड़ी देशों में अशांति भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. इसका स्पष्ट प्रभाव  खाड़ी युद्ध जैसे अरब स्प्रिंग, यमन में युद्ध, लीबिया संकट के दौरान दिखा था.

भारत-कतर द्विपक्षीय व्यापार पर प्रभाव

हाल के वर्षों में भारत और कतर के बीच द्विपक्षीय व्यापार बहुत अच्छा रहा है.
2013-14 में द्विपक्षीय व्यापार 16.68 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया था और 2015-16 के वित्तीय वर्ष में इसे 9.93 अरब डॉलर तक घटा दिया गया था.
 भारत का निर्यात 900 मिलियन डॉलर से 1,000 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है.
अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस की कीमतों में कमी के चलते पिछले 1-2 साल में मूल्य आधारित आयात में तेजी से गिरावट आई है.
अगले 5 वर्षों में भारत को बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 1 खरब डॉलर की जरूरत है और कतर निवेश प्राधिकरण (क्यूआईए) इस क्षेत्र में भारी निवेश कर सकता है.
भारत कतर में सक्रिय रूप से क्यूआईए और अन्य सरकारी स्वामित्व वाली और निजी संस्थाओं से जुड़ने के प्रयास कर रहा है. भारत भी अपनी 'मेक इन इंडिया' और भारत में निवेश के फायदे जैसी नीतियों को उजागर कर रहा है.

भारत के कॉर्पोरेट क्षेत्र पर प्रभाव

खाड़ी देशों और क़तर की घटनाएं भारत में कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए एक चेतावनी संदेश हैं.
कॉरपोरेट सेक्टर ने कतर में अपने कारोबार को बढ़ाया है और इस देश की व्यापार विस्तार की विशाल क्षमता का आकलन कर रहा है.
बुनियादी ढांचे / निर्माण और आईटी क्षेत्र की कई प्रसिद्ध भारतीय कम्पनियां जैसे महिंद्रा टेक, एलएंडटी, पुंज लॉयड, वोल्टास, सिंपलक्क्स, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल, शपूरजी पल्लोनजी, एसबीआई और आईसीआईसीआई क़तर में काम कर रहीं हैं.
कतर के कतर वित्तीय केंद्र एवं निजी एक्सचेंज हाउस के तहत अन्य भारतीय बैंकों का यहाँ सीमित परिचालन है. इसके अतिरिक्त कतर एयरवेज की 13 भारतीय शहरों के लिए 102 साप्ताहिक यात्री उड़ानें हैं.

भारत-कतर द्विपक्षीय संबंध

भारत क़तर सहयोग ऐतिहासिक करीबी संबंधों के साथ साथ विभिन्न सेक्टरों में भी बहुत  महत्वपूर्ण रहे हैं. कथरा के एमीर शेख तामिम बिन हमद अल थानी के आमंत्रण पर 4/5 जून 2016 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहा की आधिकारिक यात्रा की थी. मार्च 2015 में हमद अल थानी ने भारत की राजकीय यात्रा की. गौरतलब है कि उनके पिता भी कई बार भारत आए थे. पिछले तीन वर्षों में  प्रधान मंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईरान और कतर का दौरा किया है. यूएई के क्राउन प्रिंस ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत का दौरा किया. प्रधान मंत्री पिछले महीने फिलीस्तीनी राष्ट्रपति से मिले और अगले महीने इस्राइल की यात्रा करेंगे.
भारत और कतर के मध्य प्रमुख सैन्य संबंध हैं. इस सन्दर्भ में  चरमपंथी तत्वों के खतरों से निबटने के लिए एक समुद्री सुरक्षा समझौता हुआ. आर्थिक संबंधों के संदर्भ में दोहा को भारत का निर्यात 2014-15 में 1.05 अरब डॉलर तथा कुल द्विपक्षीय व्यापार 15.67 अरब डॉलर तक पहुंच गया. भारतीय कॉनट्रैक्टर लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) ने कतर में एक 2.1 अरब के सड़क परियोजना का कॉनट्रैक्ट पाने में सफलता हासिल की. साथ ही दोहा मेट्रो परियोजना के लिए रेल लाइन के डिजाइन और निर्माण हेतु कतर रेलवे कंपनी से $ 740 मिलियन का ऑर्डर मिला.

ईंधन की आपूर्ति पर प्रभाव

भारत के पेट्रोनेट ने कहा है कि हाल के घटनाक्रम के बाद कतर से गैस की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
पेट्रोनेट के वित्त प्रमुख आर.के. गर्ग ने कहा है कि मुझे नहीं लगता है कि इस पर कोई असर पड़ेगा.हमें सीधे समुद्र से कतर से गैस मिलती है. एक दीर्घकालिक अनुबंध के तहत भारत का सबसे बड़ा गैस आयातक पेट्रोनेट एलएनजी  कतर से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का 8.5 मिलियन टन प्रति वर्ष खरीदता है. यह स्पॉट सौदों के तहत कतर से अतिरिक्त  तेल भी खरीदता है. अरब देशों द्वारा कतर के साथ संबंधों को तोड़ने का फैसला करने के बाद से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं.

भारत के डायस्पोरा पर इसका प्रभाव

क़तर में भारतीय समुदाय के अंतर्गत प्रवासी भारतीय तथा भारतीय मूल के कतर में पैदा हुए लोग दोनों शामिल हैं. क़तर में वर्तमान में भारतीय आबादी लगभग 650,000 है. इन घटनाओं से भारतीयों की क़तर यात्रा के प्रभावित होने की संभावना नहीं है क्योंकि भारत की उड़ानें फारस की खाड़ी के मार्ग से होते हुए दोहा तक जाती है. सऊदी अरब की अगुवाई वाले राष्ट्रों द्वारा एयरस्पेस के लिए सीमित सीमाओं के निर्धारण की वजह से फारस की खाड़ी पर कोई असर नहीं पड़ेगा. अधिकतर भारतीय आबादी वाले संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले भारतीयों के लिए क़तर की सीधी यात्रा मुश्किल हो सकती है क्योंकि यह दोहा में हवाई क्षेत्र से इंकार करने वाले राष्ट्रों सऊदी अरब, मिस्र और बहरीन के साथ शामिल हो सकता है.

निष्कर्ष

भारत को फ़िलहाल जिस कठिनाई का सामना करना पड़ेगा वह है इस क्षेत्र में श्रमिकों की आवाजाही को लेकर क्योंकि सउदी अरब और उसके अगुवाई वाले गठबंधन राष्ट्रों द्वारा यात्रा पर प्रतिबन्ध लगाने के निर्णय के बाद क़तर अलग पड़ जाएगा. कई भारतीय क़तर एयरवेज का उपयोग करते हैं. अनुमानतः प्रति सप्ताह लगभग 24000 लोग दोहा या अन्य स्थानों की यात्रा करते हैं. सूत्रों के अनुसार भारत के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी.
भारत को 60 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक धनराशि भेजने वाले भारतीय श्रमिक यदि क्रॉस फायर में पकड़े जाते हैं तो संकट में अपने निवासियों की रक्षा करने की छवि वाले भारत के इमेज पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा.