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2800 किलोमीटर लम्बे के2के आर्थिक कॉरिडोर का मुख्य भाग लगभग तैयार : चीन

के2के आर्थिक कॉरिडोर जून 2015 के अंतिम सप्ताह में चर्चा में रहा क्योकि चीन ने घोषणा की कि इस मार्ग का प्रमुख भाग लगभग तैयार है

Jun 29, 2015 17:23 IST

के2के आर्थिक कॉरिडोर: कोलकाता (भारत) कुनमिंग (चीन) आर्थिक कॉरिडोर

के2के आर्थिक कॉरिडोर जून 2015 के अंतिम सप्ताह में चर्चा में रहा क्योकि चीन ने घोषणा की कि इस मार्ग का प्रमुख भाग लगभग तैयार है.

2800 किलोमीटर लम्बे इस कॉरिडोर में बांग्लादेश, भारत, चीन तथा म्यांमार शामिल हैं जिसे वर्ष 2014 में आरम्भ किया गया था.

कॉरिडोर का उद्देश्य

कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य चारों देशों के बीच मैत्री संबध स्थापित करना है.


इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना तथा चीन के उन क्षेत्रों को सड़क मार्ग तक जोड़ना है जिनमें विकास की रफ़्तार धीमी है.

इस मार्ग द्वारा दक्षिण एशिया तथा पूर्वी एशिया को आपस में जोड़ा जायेगा जिससे न केवल व्यापार में वृद्धि होगी अपितु लोगों के आपसी रिश्तों में भी सुधार होगा.

मार्ग


यह मार्ग कोलकाता से बेनापोल, बांग्लादेश की सीमा पर स्थित शहर, की ओर जायेगा. ढाका और सिलहट के बाद, यह असम में सिलचर के पास भारतीय क्षेत्र में पुनः प्रवेश करेगा.

असम के बाद यह इम्फाल के साथ जोड़ा जाएगा, इसके बाद यह अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करने से पहले म्यांमार में भारत निर्मित तमु-कलेवा रोड से गुजरेगा.

म्यांमार में यह लाहिसो एवं म्यूस से गुजरने से पहले मंडालय से गुजरेगा.

चीन में यह मार्ग कुमिंग तक जाने से पहले रुई तक जायेगा, यह युन्नान प्रांत की राजधानी है, जिसमे लोंज्लिंग तथा डाली क्षेत्र शामिल हैं.


चीन इसे मिज़ोरम के साथ जोड़ना चाहता है ताकि के2के कॉरिडोर को कालादन परियोजना के साथ जोड़ा जा सके.

कलादान परियोजना से भारत को लाभ

कलादान परियोजना वर्ष 2008 में आरंभ हुई थी, इसमें मिज़ोरम को कलादान नदी की सहायता से म्यांमार से जोड़ा जायेगा.

कलादान परियोजना में जुड़ने से भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को कोलकाता से सीधे जोड़ा जा सकेगा जिसके परिणामस्वरूप कोलकाता की दूरी केवल 539 किलोमीटर हो जाएगी.

इससे चीन पर भारत की मलक्का जलडमरू (हिन्द महासागर तक पहुंचने के लिए) का प्रयोग करने की निर्भरता भी समाप्त हो जायेगी जिस पर अमेरिकी सेना का प्रभुत्व है.

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