बैंक ऑफ इंडिया ने ट्रांस यूनियन सिबिल में हिस्सेदारी बेची

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) ने 22 मार्च 2017 को ऋण सूचना कंपनी ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड में अपनी समूची पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी.

Created On: Mar 25, 2017 12:00 ISTModified On: Mar 25, 2017 10:56 IST

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) ने 22 मार्च 2017 को ऋण सूचना कंपनी ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड में अपनी समूची पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी.

ट्रांसयूनियन इंटरनेशनल इंक ने इस हिस्‍सेदारी का अधिग्रहण किया. इस सौदे के बाद ट्रांसयूनियन इंटरनेशनल की हिस्‍सेदारी बढ़कर 87.1 प्रतिशत हो गई.

मुख्य तथ्य-

  • बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) ने यह हिस्सेदारी 190.62 करोड़ रुपये में बिक्री की है.
  • बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) द्वारा नियामकीय सूचना में दी गयी जानकारी के अनुसार 'बैंक ने ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड में अपनी पूरी पांच प्रतिशत हिस्सेदारी (12.50 लाख शेयर) ट्रांसयूनियन इंटरनैशनल इंक (टीयूआई) को बेच दी.
  • यह सौदा 1,525 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से कुल 190.62 करोड़ रुपये में किया गया.
  • सिबिल की शुरुआत अगस्त 2000 में की गई.
  • सिबिल बैंकों और ट्रांस यूनियन के मध्य एक संयुकत उद्यम के रूप में आरम्भ किया.
  • बाद में भारतीय स्टेट बैंक और एचडीएफसी सहित बैंकों ने इसमें अपनी हिस्सेदारी ट्रांस यूनियन को बेच दी.
  • एनपीए के ऋण के कारण बैंक ऑफ इंडिया अपने प्रॉफि‍ट को बढ़ाने हेतु नॉन-कोर बिजनेस को बेचने की कोशिश कर रहा है.
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  • बाकी हिस्‍सेदारी यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आदित्‍य बिड़ला ट्रस्‍टी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, इंडिया अल्‍टरनेटिव्‍स प्राइवेट इक्विटी फंड और इंडिया इंफोलाइन फाइनेंस लिमिटेड के पास है.

बैंक ऑफ इंडिया के बारे में-

  • बैंक ऑफ़ इंडिया भारत के प्रमुख बैंकों में से एक है. इसकी 29 विदेशी शाखाओं को मिलाकर इसकी कुल 4,293 शाखायें हैं.
  • बैंक ऑफ इंडिया की इन शाखाओं को 50 क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से नियंत्रित किया जा है
  • बैंक ऑफ इंडिया की शाखाओं की अधिकतम संख्या मुंबई फिर अहमदाबाद और पुणे में हैं.
  • बैंक ऑफ़ इंडिया भारत मे स्विफ्ट (SWIFT/ सोसायटी फॉर वर्ल्ड वाईड इन्टर बैंक फिनैन्शियल टेलिक्म्युनिकेशन) का एक संस्थापक सदस्य है.
  • बैंक ने 7 सितंबर 2006 को अपने प्रचालन के पहले सौ साल पूरे कर लिए

सिबिल-

  • उपभोक्ता की क्रेडिट हिस्‍ट्री का सिबिल ट्रान्‍सयूनियन स्‍कोर 3 अंकों का अंकीय सार होता है.
  • जिससे उपभोक्ता की वित्‍तीय और क्रेडिट की स्थ्‍िाति का पता चलता है.
  • उपभोक्ता का स्‍कोर जितना अधि‍क होगा उतनी ही संभावना अधि‍क होगी कि उपभोक्ता के ऋण सम्बन्धी आवेदन स्‍वीकार किए जाएं.

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