Search

बैंकिंग विनियमन (संशोधन)अधिनियम 2017 तथा इसके प्रभाव

भारत सरकार ने यह निर्णय लिया है कि यह बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 को शंशोधित करेगी ताकि भारत के बैंकिंग क्षेत्र में व्याप्त स्ट्रेस्ड परिसम्पत्तियों  के समस्या से छुटकारा मिल सके. यह समस्या भारत के बैंकिंग क्षेत्र में बहुत समय से व्याप्त है.हमने इस मुद्दे की गहनता के साथ परिचर्चा की है.

May 26, 2017 15:14 IST
facebook IconTwitter IconWhatsapp Icon

बैंकिंग विनियमन अध्यादेश केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने केन्द्रीय बैंकिंग विनियमन अधिनियम में शंशोधन करने  का निर्णय लिया है. यह निर्णय बैंको के 9.64 ट्रिलियन स्ट्रेस्ड परिसंपत्ति के समाधान को गति देने के लिए लिया गया है. शंशोधन से सम्बंधित विस्तृत जानकारी अभी सार्वजानिक नहीं हुयी है परन्तु बाजार ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है. जब यह तय हुआ कि सरकार यह कदम उठाएगी उस दिन बैंकिंग 6% शेयरों में 6% की वृद्धी हुयी.

बैंकिंग विनियमन अधिनियम क्या है?

बैंकिंग विनियमन अधिनियम कानूनों/नियमों  का एक समूह है जो भारत में बैंकिंग क्षेत्र को शासित करते हैं.
इस संशोधन के माध्यम से तो इस अधिनियम में दो नए अनुभाग जोड़े जायेंगे.
यह अधिनियम 1949 में पारित हुआ था. यह भारतीय रिज़र्व बैंक को यह अधिकार देता है कि यह भारत में बैंको को लाइसेंस देता है तथा उनका विनियमन करता है.

बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949, के 35A अनुभाग के बाद ,यह संशोधन भारत सरकार को यह अधिकार देता है कि भारतीय रिज़र्व बैंक बैंको को स्ट्रेस्ड परिसंपत्तियों के समाधान करने का निर्णय लेगी.
यह अध्यादेश आरबीआई को यह अधिकार भी देगा कि यह स्ट्रेस्ड परिसंपत्तियों के समाधान का आदेश दे सके तथा इसके लिए समीतियो का गठन भी कर सके.
इसके अलावा, अध्यादेश, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (पीसीए) में बदलाव का सुझाव देता है ताकि ऋण संबंधित फैसलों के कारण बाद में मुकदमा चलाने और उत्पीड़न से बैंकरों की रक्षा की जा सके। उपर्युक्त दोनों पहलों से, आरबीआई को मौजूदा एनपीए समस्या को हल करने और भविष्य में, प्रारंभिक अवस्था से सख्त एनपीए निगरानी सुनिश्चित करने में तेजी लाने की उम्मीद है।

प्रस्तावित ढाँचे के तहत, गैर-निष्पादित संपत्तियों को संबोधित करने के लिए आरबीआई कई पर्यवेक्षण समितियों के साथ काम करेगा। चूँकि 60% सभी अनैतिक परिसंपत्तियों के लिए शीर्ष 40 एनपीए को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, इसलिए आरबीआई इन प्राथमिकताओं पर अपना ध्यान केंद्रित करने, निरीक्षण समितियों को प्राप्त करने और पर्यवेक्षण समितियों को संबंधित बैंकों के साथ इन्हें हल करने के लिए काम करने की योजना बना रही है।

अध्यादेश के प्रभाव
यह अध्यादेश आरबीआई को बैड लोन्स के मामलो में सीधे कार्यवाही करने का अधिकार देगा. इसके बाद आरबीआई बैंको से सीधे यह कह सकता है की वह लोन बकायेदारों से साथ बैठे तथा इस समस्या को सुलझाएं.
वर्तमान अधिनियम में इसके समस्या को सुलझाने के लिए एक निगरानी समिति का प्रावधान है जो स्ट्रेस्ड परिसंपत्तियों की सतत स्ट्रक्चरिंग हेतु भारतीय बैंकिंग संघ द्वारा आरबीआई की सहमति गठित की गई है.

इस अध्यादेश के तहत बैंकिंग विनियमन अधिनियम के 35 वें अनुभाग को संशोधित किआ जायेगा जो आरबीआई के अधिकारों से जुड़ा हुआ है. अब आरबीआई बैंको के लिए 6-9 महीने की समय सीमा निर्धारित करेगा जिसमे बैंक अपने बड़े लोन बकायेदारो से लोन वापिस लेने की कार्यवाही को अंजाम देंगे.

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) ने गैर निष्पादित परिसंपत्तियों(एनपीए) के बढ़ते बोझ से जूझ रहे बैंकिंग समूह के लिए बैकिंग विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2017 (एनपीए अध्यादेश) को मिली मंजूरी को स्वागतयोग्य कदम बताया है. फिक्की ने अपने बयान में कहा कि बढ़ते एनपीए की वजह से बैंक रोजगार सृ़जन और उद्यमों के लिए जरूरी निवेश को बढावा देने के लिए पर्याप्त रिण नहीं मुहैया करा पा रहे थे.
संगठन के अनुसार एनपीए अध्यादेश एनपीए की समस्या से निश्चित समय में निपटने की दिशा में उठाया गया बहुत बड़ा कदम है.

सरकार ने यह निर्णय लेने के लिए यह तर्क दिए हैं कि जो व्यक्ति जानबूझकर रिण नहीं चुका रहा है तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन कई मामलों में परियोजनायें नीतियों में आये बदलाव , अकास्मिक रूप से वैश्विक परिदृश्य में हुए परिवर्तन और क्लीयरेंस मिलने में हो रही देर से प्रभावित हो जाती हैं. इन तरह के मामलों में ,जहां कारोबार का मूल तत्व सुरक्षित रहा हो , वहां संबंधित प्रबंधन के सहयोग से परियोजनाओं को जल्द ही दोबारा शुरू करने की जरूरत है.

यह अध्यादेश इस तरह के मामलों पर पर्याप्त ध्यान देगा और नोडल मंत्रालय प्रणालीगत कारकों की वजह से किसी खास क्षेत्र के एनपीए में अचानक आयी तेजी से निपटने की दिशा में नीतिगत निर्णय लेंगे.

निष्कर्ष
यह बात तर्कसंगत है कि दिवालिया कानून को लागू करने और सरफेसी एवं डेट रिकवरी टि्रब्यूनल अधिनियम में संशोधन के बाद एनपीए अध्यादेश को मंजूरी देना इस बात को दर्शाता है कि सरकार एनपीए की समस्या का संतोषजनक समाधान चाहती है. देश. सरकार का यह कदम देश तथा बैंकिंग प्रनाली के लिए एक अच्छा संकेत है.

इस अध्यादेश से यह उम्मीद है कि यह एनपीए , बैड लोन, तथा स्ट्रेस्ड परिसम्पत्तियो के समाधान के  गितिविधियों को तीव्रता देगा. और यह बैंक कर्मियों को आरबीआई द्वारा स्थापित  निगरानी समिति का सहयोग भी देगा ताकि  स्ट्रेस्ड संपत्तियों की संकल्प प्रतिक्रिया में को रुकावट न आये.

Download our Current Affairs & GK app For exam preparation

डाउनलोड करें करेंट अफेयर्स ऐप एग्जाम की तैयारी के लिए

AndroidIOS