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कैबिनेट ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 के मसौदे को मंजूरी दी

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य किसानों को सुरक्षित एवं प्रभावी कीटनाशक उपलब्ध कराना है जो फसलों की दृष्टि से सुरक्षित और प्रभावी हो. विधेयक में किसानों को नकली तथा अनधिकृत कीटनाशक से बचाने के उपाय किये गये हैं.

Feb 13, 2020 15:35 IST
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 के मसौदे को 12 फरवरी 2020 को मंजूरी प्रदान कर दी है. इस विधेयक में किसानों के हित और कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग का प्रावधान किया गया है.

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने हाल ही में कहा कि यह विधेयक संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश किया जायेगा. इससे देशभर में जैविक कीटनाशकों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा. केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई.

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020

• इस विधेयक का उद्देश्य किसानों को सुरक्षित एवं प्रभावी कीटनाशक उपलब्ध कराना है जो फसलों की दृष्टि से सुरक्षित और प्रभावी हो.

• विधेयक में किसानों को नकली और अनधिकृत कीटनाशक से बचाने के उपाय किये गये हैं.

• विधेयक के अनुसार यदि कोई मिलावटी कीटनाशक और बिना पंजीकरण वाला कीटनाशक बेचता है तब उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है तथा आपराधिक मामला भी चलाया जा सकता है.

• इस विधेयक में किटनाशक के बारे में किसानों को सभी प्रकार की जानकारी मिले जिसमें उसके उपयोग, उससे जुड़े खतरे आदि के बारे में प्रावधान किया गया है.

• इसमें आर्गेनिक कीटनाशक के उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात भी कही गई है.

• इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि गलत कीटनाशक के कारण खेती का या व्यक्ति को कोई नुकसान होता है, तब इसमें मुआवजे की भी व्यवस्था की गई है.

• केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि कीटनाशकों का विज्ञापन कैसे किय जाए, इस संबंध में मानक बनाने की भी विधेयक में प्रावधान किया गया है.

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सजा का प्रावधान

इस विधेयक के तहत नकली या खराब गुणवत्ता के कीटनाशकों की बिक्री और उत्पादन गैरकानूनी होगा. ऐसा करने वालों को अब पांच साल तक की जेल और अधिकतम पचास लाख तक का जुर्माना होगा. इस विधेयक को संसद के 02 मार्च से शुरू हो रहे सत्र में पेश किया जाएगा.

पृष्ठभूमि

भारत में कीटनाशकों का निर्माण और बिक्री अधिनियम 1968 के तहत हो रही थी. इस अधिनियम को काफी समय से बदलने की मांग हो रही थी. मौजूदा कानून में कीटनाशकों के केवल विनिर्माण, बिक्री, आयात, परिवहन उपयोग और वितरण को शामिल कया गया है. ये बिल इससे पहले साल 2008 में आया था लेकिन संसद में पास नहीं हो सका था.

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