Search

प्रधानमंत्री 'जी-वन योजना' को मंत्रिमंडल की मंजूरी

इसके तहत ऐसी एकीकृत बायो-इथेनॉल परियोजनाओं को, जो लिग्नोसेलुलॉसिक बायोमास और अन्य नवीकरणीय फीडस्टॉक का इस्तेमाल करती हैं, के लिए वित्तीय मदद का प्रावधान है.

Mar 1, 2019 09:21 IST
facebook IconTwitter IconWhatsapp Icon

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 28 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री जी-वन (जैव ईंधन वातावरण अनुकूल फसल अवशेष निवारण) योजना के लिए वित्तीय मदद को मंजूरी दे दी है. इसके तहत ऐसी एकीकृत बायो-इथेनॉल परियोजनाओं को, जो लिग्नोसेलुलॉसिक बायोमास और अन्य नवीकरणीय फीडस्टॉक का इस्तेमाल करती हैं, के लिए वित्तीय मदद का प्रावधान है.

जी-वन योजना का विवरण

इस योजना के तहत वाणिज्यिक स्तर पर 12 परियोजनाओं को और प्रदर्शन के स्तर पर दूसरी पीढ़ी की 10 इथेनॉल परियोजनाओं को दो चरणों में वित्तीय मदद दी जाएगी.

  • पहला चरण (2018-19 से 2022-23)- इस अवधि में 6 वाणिज्यिक परियोजनाओं और 5 प्रदर्शन के स्तर वाली परियोजनाओं को आर्थिक मदद दी जाएगी.
  • दूसरा चरण (2020-21 से 2023-24)- इस अवधि में बाकी बची 6 वाणिज्यिक परियोजनाओं और 5 प्रदर्शन स्तर वाली परियोजनाओं को मदद की व्यवस्था की गई है.
  • परियोजना के तहत दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल क्षेत्र को प्रोत्साहित करने और मदद करने का काम किया गया है. इसके लिए उसे वाणिज्यिक परियोजनाएं स्थापित करने और अनुसंधान और विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का काम किया गया है.

जी-वन योजना के उद्देश्य एवं लाभ

  • जीवाश्म ईंधन के स्थान पर जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता घटाने की भारत सरकार की परिकल्पना को साकार करना.
  • जीवाश्म ईंधन के स्थान पर जैव ईंधन के इस्तेमाल का विकल्प लाकर उत्सर्जन के सीएचजी मानक की प्राप्ति.
  • बायोमास और फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान का समाधान और लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना.
  • दूसरी पीढ़ी की इथेनॉल परियोजना और बायोमास आपूर्ति श्रृंखला में ग्रामीण और शहरी लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना.
  • बायोमास कचरे और शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे के संग्रहण की समुचित व्यवस्था कर स्वच्छ भारत मिशन में योगदान करना
  • दूसरी पीढ़ी के बायोमास को इथेनॉल प्रौद्योगिकी में परिवर्तित करने की विधि का स्वदेशीकरण.
  • योजना के लाभार्थियों द्वारा बनाए गए इथेनॉल की अनिवार्य रूप से तेल विपणन कम्पनियों को आपूर्ति, ताकि वे ईबीपी कार्यक्रम के तहत इनमें निर्धारित प्रतिशत में मिश्रण कर सके.

वित्तीय प्रभाव

जी-वन योजना के लिए 2018-19 से 2023-24 की अवधि में कुल 1969.50 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय को मंजूरी दी गई है. परियोजनाओं के लिए स्वीकृत कुल 1969.50 करोड़ रुपये की राशि में से 1800 करोड़ रुपये 12 वाणिज्यिक परियोजनाओं की मदद के लिए, 150 करोड़ रुपये प्रदर्शित परियोजनाओं के लिए और बाकी बचे 9.50 करोड़ रुपये केन्द्र को उच्च प्रौद्योगिकी प्रशासनिक शुल्क के रूप में दिए जाएंगे.

 

पृष्ठभूमि

भारत सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम 2003 में लागू किया था. इसके जरिए पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण कर पर्यावरण को जीवाश्म ईंधनों के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान से बचाना, किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाना तथा कच्चे तेल के आयात को कम कर विदेशी मुद्रा बचाना है. वर्तमान में ईबीपी 21 राज्यों और 4 संघ शासित प्रदेशों में चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम के तहत तेल विपणन कम्पनियों के लिए पेट्रोल में 10 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाना अनिवार्य बनाया गया है. मौजूदा नीति के तहत पेट्रोकेमिकल के अलावा मोलासिस और नॉन फीड स्‍टाक उत्पादों जैसे सेलुलोसेस और लिग्नोसेलुलोसेस जैसे पदार्थों से इथेनॉल प्राप्त करने की अनुमति दी गई है.

 

यह भी पढ़ें: भारत ने पहली स्वदेशी तकनीक से निर्मित सेमिकंडक्टर चिप जारी की