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Chandrayaan-2: चांद पर पहुंचने में लगेंगे 48 दिन

चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त 2019 तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त 2019 तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा.

Jul 22, 2019 15:53 IST
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया है. चंद्रयान-2 को 22 जुलाई 2019 को दोपहर 2.43 बजे देश के सबसे ताकतवर 'बाहुबली रॉकेट GSLV-MK3' से लॉन्च किया गया. चंद्रयान-2 अब चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए  48 दिन की यात्रा शुरू हो गई है. लगभग 16.23 मिनट बाद चंद्रयान-2 पृथ्वी से करीब 182 किमी की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 (GSLV-MK3) रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाना शुरू कर दिया.

चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त 2019 तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त 2019 तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा. चंद्रयान-2 मिशन 19 अगस्त को ही यह चांद की कक्षा में पहुंचेगा. इसके बाद 31 अगस्त 2019 तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. फिर 01 सितंबर 2019 को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने 18 जुलाई 2019 को घोषणा किया था कि चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा से 22 जुलाई को होगी. इसरो ने ट्वीट किया कि चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग 15 जुलाई को होनी थी, जो तकनीकी खराबी के कारण टाल दी गई थी.

इसरो ने एक हफ्ते के अंदर सभी तकनीकी खामियों को ठीक कर लिया है. इसरो की ओर से एक आधिकारिक सूचना जारी की गई है जिसमें कहा गया है की 22 जुलाई 2019 को दोपहर 2:43 बजे चंद्रयान-2 को लॉन्च किया जाएगा.

श्रीहरिकोटा के सतीश धवन सेंटर से चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा. चंद्रयान-2 की यात्रा ऐसे में चार दिन आगे बढ़ जाएगी. चंद्रयान-2 पहले चांद पर 06 सितंबर को पहुंचने वाला था, लेकिन 22 जुलाई को लॉन्चिंग होने पर ये 10 सितंबर या 11 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचेगा.

चंद्रयान-2 क्या है?

चंद्रयान-2 एक अंतरिक्ष यान है. इसके तीन सबसे अहम हिस्से लैंडर, ऑर्बिटर और रोवर हैं. चंद्रयान-2 दस साल के भीतर भारत का चंद्रमा पर भेजा जाने वाला दूसरा अभियान है. भारत ने इससे पहले अक्टूबर 2008 में चंद्रयान-1 चंद्रमा की कक्षा में भेजा था. भारत चंद्रयान-2 की सफलता के साथ ही अमेरिका, रूस और चीन के बाद धरती के इस उपग्रह पर अंतरिक्ष यान उतारने वाला चौथा देश बन जाएगा.  

चंद्रयान-2 का वजन 3,877 किलो होगा. इसरो ने पहले सफल चंद्रमा मिशन - चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण किया था जिसने चंद्रमा के 3,400 चक्कर लगाए. चंद्रयान-1 (29 अगस्त 2009 तक) 312 दिनों तक काम करता रहा. यह चंद्रयान-1 मिशन से करीब तीन गुना ज्यादा है.

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भारत का चंद्रयान-2 मिशन 15 जुलाई को जीएसएलवी-एमके-3 के क्रायोजेनिक इंजन की हीलियम बॉटल में लीक के कारण रोकना पड़ा था. यह क्रायोजेनिक इंजन में भरे लिक्विड ऑक्सीजन तथा लिक्विड हाइड्रोजन को ठंडा रखने का काम करता है. हीलियम लीकेज के कारण से मिशन को रोकना पड़ा. बॉटल में हीलियम का प्रेशर लेवल नहीं बन रहा था. यान के प्रक्षेपण से मात्र 56 मिनट पहले इसे रोकना पड़ा था. इसरो द्वारा आधिकारिक तौर पर जीएसएलवी-एमके-3 में आई तकनीकी खामी की पुष्टि की गयी थी.

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