जलवायु परिवर्तन भारत की जीडीपी को प्रभावित कर सकता है: विश्व बैंक

Jun 29, 2018 11:59 IST

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन भारत की अर्थव्यवस्था पर काफी भारी पड़ सकता है और इसके चलते 2050 तक उसकी जीडीपी को 2.8 प्रतिशत का नुकसान हो सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण तीन दशकों में वायुमंडल के औसत सालाना तापमान में 1-2 डिग्री की तेजी आने का अनुमान है.

जलवायु परिवर्तन में यह बदलाव वर्ष 2050 तक भारत की लगभग आधी जनसंख्या के जीवन स्तर को भी प्रभावित कर सकता है.

रिपोर्ट से संबंधित मुख्य तथ्य:

•    रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान और मानसूनी बारिश के बदलते प्रतिमान की कीमत भारत को जीडीपी में 2.8 प्रतिशत कमी के रूप में चुकानी पड़ेगी. इससे वर्ष 2050 तक देश की लगभग आधी आबादी का जीवन स्तर प्रभावित होगा.

•    रिपोर्ट के मुताबिक, इसका असर देश की करीब 60 करोड़ आबादी पर पड़ेगा. वहीं इसकी सबसे ज्यादा मार कृषि क्षेत्र पर पड़ेगी, जिसकी उत्पादकता में काफी गिरावट आ सकती है. स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा.

•    इसकी चपेट में आने वाले दस सबसे प्रभावित जिलों में महाराष्ट्र के सात, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव एवं दुर्ग और मध्य प्रदेश का होशंगाबाद होगा. यह सभी जिले अगले 32 सालों में देश के सबसे गरम स्थान होंगे.

•    विश्व बैंक ने भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों को इसे लेकर उस समय सतर्क किया है, जब अकेले भारत के तापमान में सालाना डेढ़ से दो डिग्री तक की बढ़ोतरी हो रही है.

•    जलवायु परिवर्तन के चलते जीवन स्तर में होने वाले इन बदलावों का आकलन भारत में लोगों के वर्ष 2010 में रहन-सहन के स्तर और अलग-अलग क्षेत्रों में होने वाली खपत को आधार बनाकर किया गया है.

2050 तक तापमान में एक से दो डिग्री का इजाफा:

विश्व बैंक के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में वर्ष 2050 तक तापमान में सालाना एक से दो डिग्री सेल्सियस का इजाफा होगा. इससे कृषि, श्रम क्षेत्र और छोटे उद्योगों पर असर पडऩे के कारण किसानों, श्रमिकों और छोटे कारोबारियों सहित भारत की लगभग आधी आबादी के जीवन स्तर में गिरावट आएगी.

रिपोर्ट में समाधान हेतु सुझाए गए तीन उपाय:

•    रिपोर्ट में समस्या के तात्कालिक समाधान के तौर पर भारत के लिए तीन उपाय सुझाए हैं. इनमें जलसंकट का स्थाई उपाय खोजना, गैरकृषि रोजगारों को बढ़ावा देना तथा शिक्षा के प्रसार की मदद से लोगों को जलवायु परिवर्तन के संकट के प्रति आगाह करते हुये जागरूक करना शामिल है.

•    भारत में उन इलाकों में रोजगार के वैकल्पिक तरीकों का प्रसार करना होगा जिनमें खेतीयोग्य जमीन की अनुपलब्धता है या जिनमें अभी भी अनुपजाऊ जमीन पर पारंपरिक तरीके से खेती की जा रही है.

•    प्रभावित जिलों में सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा सहित अन्य आधारभूत ढांचागत मौलिक सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया है.

विश्व बैंक के बारे में:

•    विश्व बैंक संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट संस्था है. इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों को पुनर्निमाण और विकास के कार्यों में आर्थिक सहायता देना है.

•    विश्व बैंक समूह पांच अन्तर राष्ट्रीय संगठनो का एक ऐसा समूह है जो देशो को वित्त और वित्तीय सलाह देता है.

•    विश्व बैंक समूह के मुख्यालय वाशिंगटन डी सी में है.

•    विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना 1944 में अमरीका के ब्रेटन वुड्स शहर में विश्व के नेताओं के एक सम्मेलन के दौरान हुई थी.

•    विश्व बैंक ऋण देने वाली एक ऐसी संस्था है जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों की अर्थ व्यवस्थाओं को एक व्यापक विश्व अर्थ व्यवस्था में शामिल करना और विकासशील देशों में ग़रीबी उन्मूलन के प्रयास करना है.

•    विश्व बैंक नीति सुधार कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए ऋण देता है.

पृष्ठभूमि:

जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप जहाँ एक ओर भारत की मानसून प्रणाली में बदलाव आया है वहीं दूसरी ओर देश की कृषि व्यवस्था भी बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुई है. निरंतर सूखे एवं बाढ़ की समस्या से त्रस्त भारतीय किसानों के समक्ष आजीविका का संकट देश की अर्थव्यवस्था में गंभीर चुनौती बन गया है.

तापमान में बढ़ोतरी की वजह से जलवायु परिवर्तन के कारण जीवन स्तर में बदलाव की भयावह तस्वीर भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका के तमाम इलाकों में देखने को मिलेगी.

यह भी पढ़ें: 2028 तक दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला शहर होगा दिल्ली: यूएन रिपोर्ट

 

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