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महाराष्ट्र सरकार गठन मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 27 नवबंर को हो फ्लोर टेस्ट

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के महाराष्ट्र के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस की याचिका पर 26 नवंबर 2019 को सुनवाई की थी.

Nov 26, 2019 14:26 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में सरकार गठन पर अपना फैसला पढ़ना शुरू कर दिया है. फडणवीस सरकार को 27 नवंबर 2019 को फ्लोर टेस्ट देना होगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, यह फ्लोर टेस्ट 27 नवंबर को शाम 5 बजे से पहले होगा. सुप्रीम कोर्ट केर अनुसार, फ्लोर टेस्ट का लाइव टेलिकास्ट भी होगा.

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के तीन जज जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस संजीव खन्ना एवं जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने  सुनाया.  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, पहले प्रोटेम स्पीकर सभी विधायकों को शपथ दिलाएंगे, उसके बाद फ्लोर टेस्ट होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रोटेम स्पीकर तुरंत नियुक्त किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश

• सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 27 नवंबर 2019 को शाम पांच बजे बहुमत परीक्षण काराया जाएगा.

• सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा में विश्वास मत के दौरान गुप्त मतदान नहीं होगा.

• कोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र विधानसभा के सभी निर्वाचित सदस्य 27 नवंबर 2019 को शपथ लेंगे.

• कोर्ट ने कहा कि विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर ही बहुमत परीक्षण कराएंगे.

• सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पूरी प्रक्रिया पांच बजे तक पूरी हो जानी चाहिए, विधानसभा की पूरी कार्यवाही का सीधा प्रसारण होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के महाराष्ट्र के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस की याचिका पर 26 नवंबर 2019 को सुनवाई की थी. गौरतलब है कि कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री बनाने के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की थी. कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है. इससे पहले तीनों दलों ने कोर्ट में याचिका दी थी.

देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता देवेंद्र फडणवीस ने 23 नवंबर 2019 को दोबारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उन्हें राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शपथ दिलवाई. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अजित पवार को भी उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवेंद्र फड़णवीस को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और अजित पवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर 23 नवंबर 2019 को बधाई दी. प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे भरोसा है कि वे महाराष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य हेतु कड़ी मेहनत से काम करेंगे.

बहुमत साबित करने का समय

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने फडणवीस सरकार को 30 नवंबर 2019 तक बहुमत साबित करने का समय दिया है.

महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन हटा

महाराष्ट्र में बीजेपी और एनसीपी की गठबंधन सरकार बनने के बाद 23 नवंबर 2019 को राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है. इस बात की जानकारी राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना में दी गई है. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी की गई अधिसूचना.

फडणवीस ने शपथ लेने के बाद कहा

देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कहा कि लोगों ने हमें स्पष्ट जनादेश दिया था. उन्होंने कहा कि शिवसेना ने परिणाम आने के बाद दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन करने की कोशिश की. इस वजह से महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को एक स्थिर सरकार की जरूरत है न कि खिचड़ी सरकार की.

बता दें कि इससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया था. हालांकि, शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता ने कहा था कि उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने को तैयार हैं.

चुनाव से राष्ट्रपति शासन तक का राजनीतिक सफर

महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर 2019 को 288 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हुआ था. महाराष्ट्र का चुनाव परिणाम 24 अक्टूबर 2019 को घोषित किए गए थे. चुनाव परिणाम में बीजेपी को 105 सीटें, शिवसेना को 56 सीटें, एनसीपी को 54 सीटें और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं.

वहीं, राज्य में किसी पार्टी या गठबंधन के सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया गया. किसी भी पार्टी द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश नही किये जाने के कारण 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था.

महाराष्ट्र में ये चुनाव शिवसेना और भाजपा ने साथ मिलकर लड़ा गया था लेकिन, शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ तीस साल पुराना गठबंधन खत्म करने के बाद से ये राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था.

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