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मार्स और जुपिटर के बीच स्थित क्षुद्रग्रह सेरेस की बेल्ट में एक महासागरीय दुनिया है मौजूद

यह तरल सतह के सैकड़ों मील (किमी) चौड़े में एक खारे जलाशय से उत्पन्न हुआ है, जो सतह से लगभग 25 मील नीचे बह रहा था, जिसके प्रभाव से दरारें पड़ गईं और खारे पानी को इन दरारों से बहकर निकलने का रास्ता मिल गया.

Aug 12, 2020 17:15 IST
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नवीनतम निष्कर्षों के अनुसार, वैज्ञानिकों ने यह घोषणा की है कि सेरेस, बृहस्पति और मंगल के बीच क्षुद्रग्रह बेल्ट में सबसे बड़ी वस्तु है जो वास्तव में एक महासागर की दुनिया (विशालतम महासागर) है, इसकी कठोर सतह के नीचे नमकीन पानी का एक बड़ा भंडार/ जलाशय मौजूद है.

इस नई खोज ने इस बौने ग्रह (सेरेस) में रुचि पैदा की है, जहां जीवन का संभावित स्थान हो सकता है. इन निष्कर्षों ने खारे/ नमकीन जलाशय की उपसतह की भी पुष्टि की है, जो नमक से परिपूर्ण जल है और एक उपसतह महासागर का शेष हिस्सा है. यह धीरे-धीरे जम भी रहा है.

इस 10 अगस्त को प्रकाशित इस अनुसंधान में, जो नासा के डॉन स्पेसक्राफ्ट द्वारा प्राप्त आंकड़ों पर आधारित है, सेरेस के बारे में हमें नई समझ और जानकारी प्रदान की है. इसमें ऐसे साक्ष्य भी शामिल हैं जो इंगित करते हैं कि यह क्रायोवोलकेनिज़्म - बर्फीले पदार्थ बहाने वाले ज्वालामुखी - के साथ भूगर्भीय रूप से सक्रिय रहता है.

महासागर की दुनियाके तौर पर सेरेस के निष्कर्ष

प्लैनेटरी वैज्ञानिकों और डॉन प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, कैरोल रेमंड के अनुसार, यह नई खोज सेरेस को ‘महासागरीय दुनिया’ के दर्जे तक पहुंचाती है, जबकि इस बात पर भी ध्यान दिया गया है कि, इस श्रेणी में महासागर को वैश्विक होने की आवश्यकता नहीं है.

रेमंड आगे कहते हैं कि, सेरेस के मामले में, यह ज्ञात है कि तरल जलाशय एक क्षेत्रीय स्तर है, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं है कि यह वैश्विक है. हालांकि, जो निष्कर्ष सबसे अधिक मायने रखता है वह यह है कि, यह तरल पदार्थ बड़े पैमाने पर उपलब्ध है.

नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के प्लैनेटरी साइंटिस्ट जूली कैस्टिलो ने भी इस नई खोज पर टिप्पणी की है और यह कहा है कि, इस स्तर पर एक बड़ी दिलचस्प बात यह है कि, गहरे पानी के जलाशय में जीवन की संभावना के निर्धारण में, विशेष रूप से यह देखते हुए कि, यह ठंडा है और लवण में काफी समृद्ध हो रहा है, संशय बना हुआ है.

सेरेस पर महासागरीय दुनियाका विवरण

नवीनतम अनुसंधान, जोकि जर्नल्स नेचर एस्ट्रोनॉमी, नेचर जियोसाइंस एंड नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित किया गया था, में यह बताया गया है कि, वैज्ञानिकों द्वारा जिस तरल पदार्थ के बारे में निष्कर्ष निकाला गया है, उसकी उत्पत्ति सैकड़ों मील (किलोमीटर) चौड़ी सतह से 25 मील नीचे, ऐसे किसी आघात की वजह से एक विशाल जलाशय में हुई थी, जिसने खारे पानी को सतह पर निकलने के लिए दरारें पैदा कर दीं.

पृथ्वी से परे सौर मंडल के अन्य निकाय जहां उपसतही महासागरों की जानकारी मिली है या फिर, ये महासागर मौजूद हैं, इनमें शनि का चंद्रमा एन्सेलेडस, बृहस्पति का चंद्रमा यूरोपा, बौना ग्रह प्लूटो और नेप्च्यून का चंद्रमा ट्राइटन शामिल हैं. अब, चूंकि पानी को जीवन का एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है, इसलिए, वैज्ञानिकों का लक्ष्य यह आकलन करना भी है कि, क्या सेरेस कभी सूक्ष्म जीवों द्वारा रहने योग्य था.

यह अनुसंधान नासा के डॉन स्पेसक्राफ्ट द्वारा किया गया था जोकि वर्ष 2018 में सेरेस की सतह से सबसे करीब अर्थात 22 मील (35 किमी) की दूरी से उड़ा था.  

सेरेस के बारे में

सेरेस का व्यास लगभग 590 मील (950 किमी) है और उक्त अनुसंधान के लिए, वैज्ञानिकों ने 57- मील चौड़े (92 किमी चौड़े) ओकटेटर क्रेटर पर अपना ध्यान केंद्रित किया. यह सेरेस के उत्तरी गोलार्ध में लगभग 22 मिलियन वर्ष पहले एक आघात द्वारा बना था.

सेरेस की दो विशेषताएं भी हैं - उस नमक की पपड़ी (क्रस्ट) जो तरल द्वारा छोड़ा गया था और इसका सतह पर फैलाव. लेकिन, तरल पदार्थ वाष्पित हो गया था.

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