यूरोपीय संघ ने गूगल पर 5 बिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया

Jul 19, 2018 09:33 IST

यूरोपीय संघ ने 18 जुलाई 2018 को यह घोषणा की कि गूगल द्वारा अपने वर्चस्व का गलत फायदा उठाया गया जिसके कारण गूगल पर 5 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया है.  

मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रायड के साथ मिलकर दूसरी कंपनियों को हाशिये पर धकेलने के आरोप में गूगल पर रिकॉर्ड 5 बिलियन डॉलर (लगभग 373 अरब रुपये) का जुर्माना लगाने की घोषणा की गई.

गूगल को अब 90 दिनों के भीतर या तो उन गतिविधियों को बंद करना होगा अथवा उसे औसत दैनिक राजस्व का पांच प्रतिशत जुर्माना के तौर पर भुगतान करना होगा. यूरोपीय संघ की प्रतिस्पर्धा आयुक्त मार्गरेट वेस्टगर ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को फोन कर कार्रवाई की अग्रिम जानकारी दी. माना जा रहा है कि इससे अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड वॉर को लेकर तनाव बढ़ सकता है.

क्यों लगा जुर्माना?

•    ईयू की कॉम्पिटीशन कमिश्नर मार्गरेट वैस्टेजर ने आरोप लगाया कि गूगल ने तीन अवैध तरीके अपनाए हैं:

i.    नए हैंडसेट में प्लेस्टोर तक पहुंचने से पहले गूगल सर्च इंजन को डिफ़ॉल्ट सेट करने और क्रोम ब्राउज़र को प्री-इंस्टॉल करने की ज़रूरत को अनिवार्य बनाने के लिए एंड्रॉयड हैंडसेट और टैबलेट निर्माताओं पर दबाव बनाया गया.

ii.    मोबाइल निर्माताओं को एंड्रॉयड के ओपन सोर्स कोड पर आधारित प्रतिद्वंद्वी ऑपरेटिंग सिस्टम वाले मोबाइल फ़ोन को बेचने से रोका गया.

iii.    गूगल सर्च को एकमात्र प्री-इंस्टॉल विकल्प बनाने के लिए मोबाइल निर्माताओं और मोबाइल नेटवर्कों को वित्तीय प्रलोभन दिया गया.

•    गूगल पर आरोप लगाया गया है कि उसने सैमसंग और हुवेई जैसी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को उनके फोन में कई एप्प प्री-इंस्टाल करने को मजबूर किया था जिससे दूसरे फोन निर्माताओं के लिए विकल्प कम हो गये.

•    एप्प प्री-इनस्टॉल करके गूगल न केवल अपने स्वयं के एप्प उपयोग करवाता है बल्कि विज्ञापन भी सेट करता है.

पृष्ठभूमि

अमेरिकी मीडिया कंपनी द वर्ज की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2013 में फेयरसर्च ने गूगल के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी और इस ग्रुप में नोकिया, माइक्रोसॉफ्ट और ओरैकल जैसी कंपनियां थीं. माइक्रोसॉफ्ट के तत्कालिक सीईओ स्टीव बाल्मर ने भी कहा था कि गूगल ने बाज़ार पर एकाधिकार कर लिया है और इस पर लगाम लगनी चाहिए.

 

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