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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का निधन

उन्होंने भारतीय चुनाव प्रणाली में कई बदलाव किये थे. उनके द्वारा भारत में वोटर आईडी कार्ड भी शुरू किया गया था. उन्हें साल 1996 में रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था.

Nov 11, 2019 12:30 IST
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भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का 10 नवंबर 2019 को चेन्नई में निधन हो गया. वे 87 वर्ष के थे. वे भारत में चुनाव नियमों को सख्ती से लागू करवाने के लिए मशहूर थे. टीएन शेषन को उनके कड़े रुख के लिए भी जाना जाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व चुनाव आयुक्त के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि वे अभूतपूर्व नौकरशाह थे. उन्होंने पूरी निष्ठा और परिश्रम के साथ देश की सेवा की. पीएम मोदी ने कहा कि चुनाव सुधारों में उनके प्रयासों ने हमारे लोकतंत्र को और मजबूत किया.

टीएन शेषन के बारे में

• टीएन शेषन का पूरा नाम तिरुनेल्लाई नारायण अय्यर शेषन था.

• वे भारत के 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त थे. उन्होंने 12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर 1996 तक इस पद पर रहे.

• उन्होंने भारतीय चुनाव प्रणाली में कई बदलाव किये थे. उनके द्वारा भारत में वोटर आईडी कार्ड भी शुरू किया गया था.

• उनके बारे में एक प्रसिद्ध कोटेशन था की ‘राजनेता सिर्फ दो लोगों से डरते हैं, एक भगवान और दूसरे टीएन शेषन’.

• उन्होने मद्रास के क्रिश्चियन कॉलेज से स्नातक परीक्षा उतीर्ण की. वहीं पर वे कुछ समय के लिये व्याख्याता (लेक्चरर) भी रहे.

• उन्होंने साल 1997 में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा, लेकिन केआर नारायणन ने उन्हें हरा दिया.

• उन्होंने दो साल बाद कांग्रेस के टिकट पर लालकृष्ण आडवाणी के विरुद्ध लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके.

• उन्होंने ‘द डीजेनरेशन ऑफ इंडिया’ और ‘ए हर्ट फुल ऑफ बर्डन’ पुस्तकें भी लिखीं.

• उन्हें साल 1996 में रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था.

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टीएन शेषन और चुनावी सुधार

• टीएन शेषन अपने सख्त रवैये के लिए जाने जाते थे. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग का चेहरा बदल दिया. उनको चुनाव में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने हेतु याद किया जाता है.

• उनको भारत का सबसे प्रभावशाली मुख्य चुनाव आयुक्त माना जाता था. हालांकि चुनाव की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के लिए वे पीछे नहीं हटे और कानून का कड़ाई से पालन कराया. वे तमिलनाडु कैडर से 1955 बैच के आईएएस अधिकारी थे.

• टीएन शेषन की बदौलत फर्जी मतदान पर रोक लगी. उन्होंने ही चुनाव में राज्य मशीनरी का दुरुप्रयोग रोकने हेतु केंद्रीय बलों की तैनाती को और ज्यादा मजबूत बनाया. इससे नेताओं की दबंगई कम हुई.

• उन्होंने देश में स्वच्छ और पारदर्शी चुनावों का निरीक्षण करने हेतु सभी राज्यों में विशेष चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किए. उन्होंने चुनावों के दौरान धन शक्ति और रिश्वत के मामलों को सुनिश्चित करने के लिए चुनाव खर्च पर जाँच की.

• उन्होंने देश में शराब वितरण, रिश्वत और बाहुबल पर रोक लगाने हेतु चुनावी नियमों को सख्ती से लागू किया. उन्होंने आचार संहिता के पालन को इतना बढ़िया सख्त बना दिया कि कई नेता शेषन से खार खाते थे.

• शेषन की बदौलत फर्जी मतदान पर रोक लगी और लोकतंत्र की नींव और ज्यादा मजबूत हुई. पार्टियों और प्रत्याशियों की मनमानी पर रोक लगाने हेतु पर्यवेक्षक तैनात करने की प्रक्रिया का सख्ती से पालन हुआ.

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