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भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने 22 जीपीएस स्टेशनों की स्थापना की

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भारत सरकार के खनन मंत्रालय के अधीन कार्यरत एक संगठन है. इसकी स्थापना 1851 में हुई थी. इसका कार्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और अध्ययन करना है.

Mar 7, 2019 14:35 IST
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भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने देश भर में 22 जीपीएस स्टेशनों की स्थापना की. इन 22 जीपीएस स्टेशनों का उपयोग भूकंप की दृष्टि से खतरनाक क्षेत्रों की पहचान करने हेतु किया जाएगा तथा इससे मानचित्रण गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.

जीएसआई ने पृथ्वी विज्ञान के अंतिम वर्ष के पीजी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति के आधार पर जीएसआई-इंटर्नशिप प्रोग्राम (जीएसआई-आईपी) भी शुरू किया है. पूरे भारत में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक (क्लास 8 से 12), बोर्डों और परिषदों के स्कूली सिलेबस में भूविज्ञान को एक विषय के रूप में शामिल करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है.

जीपीएस स्टेशन:

जीएसआई ने 35 स्थायी जीपीएस-जिओडेटिक वेधशाला पैन-इंडिया संचालन नेटवर्क स्थापित करने के लिए बनाए गए हैं, जिसमें कोलकाता, तिरुवनंतपुरम, जयपुर, पुणे, देहरादून, चेन्नई, जबलपुर, भुवनेश्वर, पटना, रायपुर, भोपाल, चंडीगढ़, गांधीनगर, विशाखापट्नम, अगरतला, ईटानगर मंगन, जम्मू, लखनऊ, नागपुर, शिलोंग तथा लिटिल अंडमान में जीपीएस स्टेशन स्थापित हो चुके हैं.

इसके अतिरिक्त 13 अन्य स्थान- आइजोल, फरीदाबाद, उत्तरकाशी, पिथोरागढ़, कूचबिहार, ज़वर, नार्थ अंडमान, मिडिल अंडमान, साउथ अंडमान, रांची, मंगलोर, इम्फाल तथा चित्रदुर्गा में जीपीएस स्टेशनों की स्थापना की जायेगी.

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण:

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भारत सरकार के खनन मंत्रालय के अधीन कार्यरत एक संगठन है. इसकी स्थापना 1851 में हुई थी. इसका कार्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और अध्ययन करना है. यह इस प्रकार के विश्व के सबसे पुराने संगठनों मे से एक है.

इसका मुख्यालय कोलकाता में स्थित है. इसकी स्थापना ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के पूर्वी क्षेत्रों में कोयले की उपलब्धता की खोज एवं अध्ययन करने हेतु की थी. यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के भू-विज्ञानिक संगठन के रूप में उभर कर आया है.

यह राष्ट्रीय भूविज्ञानिक सूचना का एकत्रीकरण तथा अपडेट करने का कार्य करता है. यह ज़मीनी सर्वेक्षण, हवाई व समुद्री सर्वेक्षण के द्वारा खनिज संसाधन का आकलन करता है.

 

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