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ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2019: भारत को 102वां स्थान प्राप्त हुआ, जाने पाकिस्तान किस स्थान पर

ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2019 में कुल 117 देशों को शामिल किया गया जिसमें भारत 102वें पायदान पर है. यह दक्षिण एशियाई देशों का सबसे निचला स्थान है.

Oct 17, 2019 12:19 IST
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Global Hunger Index in hindi: ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) रिपोर्ट-2019 हाल ही में जारी की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अब भी काफी भुखमरी मौजूद है. भारत की रैंकिंग ग्लोबल हंगर इंडेक्स में एशियाई देशों में सबसे खराब है. यह रिपोर्ट किसी देश में कुपोषित बच्‍चों के अनुपात, पांच साल से कम आयु वाले बच्‍चे जिनका वजन या लंबाई उम्र के हिसाब से कम है और पांच साल से कम उम्र वाले बच्‍चों में मृत्‍यु दर के आधार पर तैयार की जाती है.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2019 में कुल 117 देशों को शामिल किया गया जिसमें भारत 102वें पायदान पर है. यह दक्षिण एशियाई देशों का सबसे निचला स्थान है. भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2019 में पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका से भी पीछे हैं. ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2019 तैयार करने के लिए साल 2014 से साल 2018 के आंकड़ों का उपयोग हुआ है.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2019 के मुख्य बिंदु:

• भारत में बच्चों में कुपोषण की स्थिति बहुत ही खराब है. देश में 20.8 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण शारीरिक विकास नहीं हो पाता, इसकी सबसे बड़ी मुख्य ‘कुपोषण’ है.

• भारत इस रिपोर्ट में ब्रिक्स देशों में भी सबसे नीचे स्थान पर है. इस रिपोर्ट में पाकिस्तान 94वें स्थान पर, बांग्लादेश 88वें स्थान पर, नेपाल 73वें स्थान पर और श्रीलंका 66वें स्थान पर है.

• इस सूची में दक्षिण अफ्रीका 59वें स्थान पर है. चीन ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 25वें स्थान पर है.

• इस रिपोर्ट में बेलारूस, यूक्रेन, तुर्की, क्यूबा और कुवैत टॉप पर हैं. यहां तक कि रवांडा और इथियोपिया जैसे देशों के जीएचआई रैंकों में अच्छा सुधार हुआ हैं.

• रिपोर्ट के अनुसार, भारत में छह से 23 महीने की उम्र के सभी बच्चों में से केवल 9.6 फीसदी को न्यूनतम जरूरी आहार दिया जाता है.

• रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के वजह से भूख का संकट चुनौतीपूर्ण हो गया है. इससे विश्व के पिछले क्षेत्रों में लोगों के लिए भोजन की उपलब्धता और बहुत ही मुश्किल हो गई है.

भारत पिछले वर्षों में ग्लोबल हंगर इंडेक्स में

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में साल 2014 के बाद से भारत की रैंकिंग में लगातार गिरावट आई है. भारत साल 2014 में 55वें स्थान पर था. वहीं भारत साल 2015 में 80वें स्थान पर, साल 2016 में 97वें स्थान पर, साल 2017 में 100वें स्थान पर और साल 2018 में 103वें स्थान पर था. भारत साल 2010 में 95वें स्थान पर था और साल 2000 में 83वें स्थान पर आ गया था.

भूख की 'गंभीर समस्या' भारत में

जीएचआई ने भूख की स्थिति के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार किया है. इस रिपोर्ट में भूख की स्थिति के आधार पर देशों को 0 से 100 अंक दिये गये है. इस रिपोर्ट में 0 अंक सबसे अच्छा अर्थात भूख की स्थिति नहीं होना है. रिपोर्ट में 10 से कम अंक का मतलब है कि देश में भूख की बहुत कम समस्या है. इसी तरह, रिपोर्ट में 20 से 34.9 अंक का मतलब भूख का गंभीर संकट है. रिपोर्ट में 35 से 49.9 अंक का मतलब हालत बहुत ही चुनौतीपूर्ण है और 50 या इससे ज्यादा अंक का मतलब है कि देश में भूख की बहुत ही भयावह स्थिति है. इस रिपोर्ट में भारत को 30.3 अंक मिला है. इस अंक का मतलब है कि भारत में भूख का गंभीर संकट है.

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स क्या है?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में विश्व के भिन्न-भिन्न देशों में खानपान की स्थिति का विस्तृत जानकारी दिया जाता है. इस इंडेक्स में यह देखा जाता है कि लोगों को किस तरह का खाद्य पदार्थ मिल रहा है तथा उसकी गुणवत्ता और मात्रा कितनी है और उसमें कमियां क्या हैं. यह रिपोर्ट प्रत्येक साल अक्टूबर महीने में जारी की जाती है.

इंटरनेशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ की शुरुआत साल 2006 में की थी. वेल्ट हंगरलाइफ नाम के एक जर्मन संस्था ने साल 2006 में पहली बार ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ जारी किया था.

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