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केंद्र सरकार द्वारा 12 सरकारी बैंकों को 48,239 करोड़ रु. की रिकैपिटलाइजेशन राशि दी जाएगी

बैंकों को रिकैपिटलाइजेशन के तहत रकम इसलिए दी जा रही है ताकि वो पर्याप्त पूंजी के रिजर्व बैंक के नियम को पूरा कर सकें. बैंकों को आरबीआई की पीसीए लिस्ट से बाहर होने में मदद मिल सके.

Feb 21, 2019 16:57 IST

सरकार ने वित्तीय समस्याओं से जूझ रहे 12 बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन के लिए 48,239 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसमें पंजाब नेशनल बैंक सहित 12 सरकारी बैंक शामिल हैं. कॉरपोरेशन बैंक को सबसे ज्यादा 9,086 करोड़ रुपये मिलेंगे। पीएनबी में 5,908 करोड़ रुपये की रकम डाली जाएगी.

रिकैपिटलाइजेशन के तहत मिलने वाली रकम से बैंकों के पास आरबीआई के नियम पूरे करने के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध हो पाएगी. वित्त सेवा सचिव राजीव कुमार द्वारा 20 फरवरी 2019 को यह जानकारी सार्वजनिक की गई. बैंक रिकैपिटलाइजेशन से सरकारी बैंकों को रेग्युलेटरी कैपिटल रिक्वायरमेंट्स को बनाए रखने और फाइनेंस ग्रोथ प्लान पर काम करने में मदद मिलेगी.

रिकैपिटलाइजेशन की घोषणा के मुख्य बिंदु

•    केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक की निगरानी में चल रहे प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले दो बैंकों, कॉरपोरेशन बैंक और इलाहाबाद बैंक में सबसे ज्यादा क्रमश 9,086 करोड़ रुपये और 6,896 करोड़ रुपये लगाएगी.

•    इसके अलावा बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में क्रमशः 4,638 करोड़ रुपये और 205 रुपये का फंड लगाया जायेगा.

•    पंजाब नेशनल बैंक को 5908 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 4112 करोड़ रुपये, आंध्र बैंक को 3256 करोड़ रुपये और सिंडिकेट बैंक 1603 करोड़ रुपये मिलेंगे.

•    सरकार पीसीए के तहत आने वाले चार अन्य बैंकों- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनाइटेड बैंक, यूको बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में 12,535 करोड़ रुपये लगाएगी.

•    गौरतलब है कि सरकार ने दिसंबर 2018 में रिकैपिटलाइजेशन बॉन्ड्स के माध्यम से 7 सरकारी बैंकों में 28,615 करोड़ रुपये लगाए थे.

 

बैंक

रिकैपिटलाइजेशन राशि (रुपये)

कॉरपोरेशन बैंक

9,086 करोड़

इलाहाबाद बैंक    

6,896 करोड़

पीएनबी

5,908 करोड़

बैंक ऑफ इंडिया

4,638 करोड़

यूनियन बैंक

4,112 करोड़

इंडियन ओवरसीज बैंक

3,806 करोड़

यूको बैंक

3,330 करोड़

आंध्रा बैंक

3,256 करोड़

यूनाइटेड बैंक

2,839 करोड़

सेंट्रल बैंक

2,560 करोड़

सिंडिकेट बैंक

1,603 करोड़

बैंक ऑफ महाराष्ट्र

205 करोड़



पीसीए क्या है?

रिटर्न ऑफ असेट्स, कैपिटल टू रिस्क वेटेड असेट्स रेश्यो और एनपीए, के मापदंड़ों का उल्लंघन करने पर किसी बैंक को पीसीए लिस्ट में डाल दिया जाता है. ऐसे बैंकों पर कर्ज बांटने और गैर जरूरी खर्चों पर रोक लागू हो जाती है. बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स भी इस लिस्ट में शामिल हुए थे लेकिन पिछले महीने वे बाहर हो गए हैं.

बैंकों को रिकैपिटलाइजेश के तहत रकम इसलिए दी जा रही है ताकि वो पर्याप्त पूंजी के रिजर्व बैंक के नियम को पूरा कर सकें. उन बैंकों को आरबीआई की प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) लिस्ट से बाहर होने में मदद मिल सके जो इसमें शामिल हैं. साथ ही पीसीए की कगार पर पहुंच चुके बैंक इससे बच सकें.

 

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