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सरकार ने सीवर में मानव प्रवेश की जरूरत को समाप्त करने हेतु 'टेक्नोलॉजी चैलेंज' का शुभारंभ किया

Jul 12, 2018 10:00 IST

आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई हेतु उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए ‘टेक्नोलॉजी चैलेंज’ का शुभारंभ किया है.

यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप है जिन्होंने 4 मई 2018 को अपनी अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए उनमें मानव प्रवेश की जरूरत को समाप्त करने के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए एक ‘टेक्नोलॉजी चैलेंज’ की शुरुआत किए जाने की इच्छा जताई थी.

यह चैलेंज महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन का एक हिस्सा होगा, जिसका आयोजन 2 अक्टूबर 2018 को होगा. यह चैलेंज 14 अगस्त 2018 तक शाम 17:30 बजे तक मान्य रहेगा.

आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए उनमें मानव प्रवेश की जरूरत को समाप्त करने में मददगार अभिनव प्रौद्योगिकियों को उपलब्ध कराने के लिए इच्छुक अन्वेषकों, व्यक्तियों, कंसोर्टियम के साझेदारों, कंपनियों, अकादमिक संस्थानों, अनुसंधान एवं विकास केन्द्रों, गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ), सरकारी एवं नगरपालिका निकायों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं.

                                     उद्देश्य:

इस टेक्नोलॉजी चैलेंज का मुख्य उद्देश्य सेप्टिक टैंक/मैनहोल इत्यादि में मानव प्रवेश की जरूरत को समाप्त करना है.

अभिनव तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रक्रियाओं की पहचान करना.

ऐसे व्यावसायिक मॉडल का अनुमोदन करना जो विभिन्न आकार, भौगोलिक स्थितियों एवं श्रेणियों वाले शहरों के लिए उपयुक्त हों.

परियोजनाओं से जुड़े चुनिंदा शहरों में चयनित प्रौद्योगिकियों/समाधानों का प्रायोगिक परीक्षण करना एवं उनके लिए आवश्यक मार्गदर्शन करना.

अन्वेषकों/निर्माताओं और लाभार्थियों- यथा शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी), नागरिकों के बीच की खाई को समाप्त करना.

आकलन:

आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के विशेषज्ञ, आईआईटी/आईआईएम की फैकल्टी और अग्रणी सिविल सोसायटी समूहों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.

इन प्रस्तावों का आकलन करने वाले ज्यूरी सदस्य मौटे तौर पर पैमाने को अपनाएंगेः

  • प्रौद्योगिकी की परिचालन प्रभावशीलता
  • उपलब्धता में आसानी/व्यापक स्तर
  • अनुकूलन/बहुपयोगी
  • मशीनरी का परिचालन काल/टिकाऊपन
  • मेड इन इंडिया
  • पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ
  • उपयोग में आसानी (स्वचालन)

इसके अलावा, यह चैलेंज दो पृथक श्रेणियों में आयोजित किया जाएगा.

श्रेणी ए: सीवरेज प्रणालियों की सफाई एवं रख-रखाव के लिए ऐसे तकनीकी समाधान जो उनमें मानव प्रवेश की जरूरत को समाप्त कर दे.

श्रेणी बी: सेप्टिक टैंकों की सफाई एवं रख-रखाव के लिए ऐसे तकनीकी समाधान जो उनमें मानव प्रवेश की जरूरत को समाप्त कर दे.

यह भी पढ़ें: ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स की सूची में भारत 57वें स्थान पर

 

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