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केंद्र सरकार ने विदेशी फंड नियमन कानून में बदलाव की घोषणा की

मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि विदेशी योगदान (नियमन) नियम 2011 में बदलाव घोषित किये गये हैं. एफसीआरए 2010 के मुताबिक, केवल एनजीओ के निदेशक पद हेतु आवेदन करने वालों के लिए इस तरह का प्रमाणपत्र देना बहुत ही आवश्यक था.

Sep 17, 2019 15:20 IST
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गृह मंत्रालय ने विदेशी धन प्राप्त करने वालों के लिए नए नियमों को अधिसूचित किया है. विदेशी फंड हासिल करने वाले सभी गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सभी अधिकारियों तथा पदाधिकारियों को यह लिखित प्रमाण पत्र देना होगा कि वे किसी व्यक्ति के धर्मांतरण में शामिल नहीं रहे हैं.

मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि विदेशी योगदान (नियमन) नियम 2011 में बदलाव घोषित किये गये हैं. एफसीआरए 2010 के मुताबिक, केवल एनजीओ के निदेशक पद हेतु आवेदन करने वालों के लिए इस तरह का प्रमाणपत्र देना बहुत ही आवश्यक था. इस बदलाव में अब व्यक्तियों को एक लाख रुपये मूल्य तक के निजी तोहफों की घोषणा नहीं करनी होगी. इस संशोधन से पहले, 25,000 रुपये से ज़्यादा मूल्य वाले तोहफों की घोषणा करना बहुत ही आवश्यक था.

अधिसूचना

अधिसूचना के मुताबिक, किसी भी एनजीओ के 'पदाधिकारियों तथा मुख्य अधिकारियों और सदस्यों' के लिए यह प्रमाणित करना जरुरी कर दिया गया है कि उन्हें कभी किसी धर्म से अन्य धर्म में 'धर्मांतरण' करवाने या 'साम्प्रदायिक तनाव' फैलाने के लिए 'अभियुक्त नहीं बनाया गया है. मंत्रालय ने अधिसूचना में विदेशी चंदा (नियमन) कानून (एफसीआरए) में बदलाव की घोषणा की है.

एफसीआरए में बदलाव

एफसीआरए में बदलाव के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को विदेश यात्रा के दौरान आपात स्थिति में इलाज की जरूरत होती है और वे किसी से विदेशी मदद प्राप्त करता है तो उसे एक माह के अन्दर इस आशय की सूचना सरकार को देनी होगी.

सरकार को देने वाली सूचना में सहायता का स्त्रोत, भारतीय मुद्रा में उसका मूल्य तथा किस तरह उसका इस्तेमाल किया गया, यह ब्योरा देना होगा. यह काम बदलाव से पहले दो माह में करना जरूरी था.

एफसीआरए क्या है?

विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) एक ऐसा कानून है, जो भारत में गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) तथा अन्य लोगों हेतु कुछ व्यक्तियों या संगठनों द्वारा प्रदान किये गए विदेशी योगदान को विनियमित करने के लिये संसद द्वारा अधिनियमित है. एफसीआरए अधिनियम साल 1976 में बना था. एफसीआरए के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करने पर पांच वर्ष की जेल या जुर्माना हो सकता है. इस अधिनियम को साल 2010 में बहुत बड़े पैमाने पर संशोधित किया गया था.

पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार ने इससे पहले भी पिछले पांच साल में विदेशी चंदा प्राप्त करने तथा उसका उपयोग करने को लेकर नियम-कायदों को सख्त बनाया है. इसके अंतर्गत एफसीआरए नियमों का उल्लंघन करने वाले लगभग 18000 एनजीओ के विदेशी चंदा प्राप्त करने की अनुमति खत्म की गई है.

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