एचआईवी/एड्स बिल 2016:एक नयी पहल

इस महीने संसद ने एचआईवी/एड्स बिल 2016 पास किया. यह बिल भारत में एचआईवी/एड्स की रोकथाम और उपचार के लिए कई महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म तैयार करता है.

Created On: Apr 20, 2017 10:11 ISTModified On: Apr 20, 2017 10:21 IST

भारत में एचआईवी/एड्स केन्द्रीय कैबिनेट ने एचआईवी तथा एड्स ( रोकथान एवं नियत्रण) बिल 2016 पास किया. यह बिल जुलाई 2016 में सरकार के पुराने बिल का विश्लेषण करके संशोधन करने के बाद अस्तित्व में आया. यह बिल पहली बार 2014 में, संसद में यूपीए सरकार द्वारा प्रस्तावित किआ गया था.
इस बिल का उद्देश्य एचआईवी/एड्स के मरीजो के लिए एंटीरेट्रोवाइरल उपचार को एक वैध अधिकार बनाना है.

बिल में निहित प्रावधान

यह बिल भारत मैं एचआईवी/एड्स से सम्बंधित समस्याओं को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इस बिल के महत्वपूर्ण प्रावधान निम्नलिखित हैं.

1.एंटीरेट्रोवाइरल उपचार

यह बिल यह कहता है कि केंद्र तथा राज्य सरकारें  एंटीरेट्रोवाइरल उपचार तथा एचआईवी/एड्स के संक्रमण के प्रबंधन के लिए प्रतिबद्ध रहेंगी. एचआईवी/एड्स संक्रमण शरीर के कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली का फायदा उठाते हैं तथा समय समय पर होते रहते हैं.

2. भेदभाव तथा गोपनीयता

यह बिल सरकार द्वारा, किसी इंसान द्वारा एचआईवी/एड्स से संक्रमित किसी भी व्यक्ति के साथ किसी भी तरह के भेदभाव को प्रतिबंधित करता है.
इसके अलावा किसी भी तरह के भेदभाव को रोकने के लिए यह बिल भेदभाव को स्वास्थ्य देखभाल, रोजगार, शिक्षा सेवाओं, सार्वजानिक सुविधाओं, संपती पर अधिकारों तथा बीमा के क्षेत्रों  में भी प्रतिबंधित करता है.
यह बिल एचआईवी से सम्बंधित सूचनाएं जैसे एचआईवी टेस्ट्स, इलाज एवं जांच को बिना मरीज के अनुमति के सार्वजानिक करने को प्रतिबंधित करता है.

3. लोकपाल

एचआईवी एड्स बिल 2016 लोकपाल की भूमिका को शामिल करता है. लोकपाल से सम्बंधित प्रावधान यह कहता है कि हर एक राज्य में, अधिनियम के उल्लंघन तथा स्वास्थ्य सेवाओं की देखभाल के लिए, एक लोकपाल की नियुक्ति की जायेगी.
लोकपाल हर छः महीने में अपने रिपोर्ट राज्य सरकार को सौपेगा. रिपोर्ट में यह शिकायतों की संख्या तथा प्रकृति तथा उनके लिए उठाये गए कदम तथा दिए गए आज्ञाओं का जिक्र होगा.
उल्लंघन के मामलों में उलंघन करने वालो के खिलाफ 2 साल के करावास तथा जुर्माने का प्रावधान है.

4. संरक्षण का प्रावधान

इस बिल में एचआईवी मरीज के सरंक्षण से सम्बंधित प्रावधान भी है. कोई भी इंसान जो जिसकी उम्र 12 से 18 तक हो तथा जिसके अन्दर एचआईवी से सम्बंधित मामलो का प्रबंधन तथा समझ हो, वह 18 साल की उम्र से छोटे अपने भाई बहन का अभिभावक या संरक्षक बन सकता है.यहाँ संरक्षण बैंक खता खोलने, शिक्षा के स्थापन, देखभाल तथा इलाज,संपत्ति-प्रबंधन और अन्य कार्यो में भी लागू रहेगा.

5. मरीज के अभिलेखों की गुप्तता

बिल यह कहता है कि एचआईवी के मरीजो के लिए दस्तावेजो के लिए कड़े डाटा संरक्षण के तरीके अपनाए जायेंगे. एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति के कानूने मामले कोर्ट में प्राथमिकता के साथ अमल में लाये जायेंगे. और कोर्ट अपने फैसले सम्बंधित व्यक्ति की पहचान को छुपाते हुए सुनाएगी.

भारत में एचआईवी का डाटा

भारतीय एड्स नियत्रण अभियान भारत में एड्स के नए मामलो में रोख्थाम लगाने को प्रतिबद्ध है तथा 2030 तक इसके सक्रमण पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगाने को प्रतिबद्ध है.
वर्तमान में डाटा यह दिखाता है कि भारत में 2,170,000 लोग एड्स/ एचआईवी के साथ जी रहे हैं. यह अनुमान है की इनमे से 6.54 प्रतिशत 15 साल से कम उम्र के बच्चे हैं.
भारत में, एचआईवी की टेस्टिंग अभी अभी 100 प्रतिशत नहीं है. सेक्स वर्करो में यह दर 72 प्रतिशत, गे पुरुषों में यह दर 70 प्रतिशत तथा ड्रग लेने वालो में यह दर 71 प्रतिशत है.

बिल के साथ विवाद

.इस बिल के संस्करण में सुई को लेके कड़े तथा स्पष्ट प्रावधान थे. क्योकि सुरक्षा के साथ सुई लगाने से एचआईवी तथा एड्स के संक्रमण में भरी कमी आ सकती है. लेकिन इस बिल की धारा 22 में सुई लगाने में सुरक्षा को ले के कोई स्पष्ट नियमों की व्याख्या नहीं की गई है.
अगर कोई स्वयंसेवक किसी मरीज को सुई लगा के वही सुई वापिस ले लेता है उसके यह करने पर उस पर ड्रग का अवैध इस्तेमाल करने के आरोप लग सकते हैं. और सुई का ऐसा इस्तेमाल करने को अपराध की नजर से देखा जाता है परन्तु यह बिल इस मुद्दे पर को स्पष्ट राय नहीं रखता है.
इस बिल की धरा 14(1) में वायरस के संक्रमण की रोकथाम के बारे में एक  पद यह कहता है कि “ जहा तक संभव हो”. इस पद एड्स से जुड़ी समस्याओं से जुड़े लोगो द्वारा काफी आलोचना की गई है. आलोचकों का दावा है कि यह वाक्य एचआईवी के इलाज को एक वैध अधिकार बनने से रोकता है. इसिलिये एचआईवी समुदाय ने बिल से इस वाक्य को हटाने की मांग की है.

उपसंहार

भारत में एचआईवी/एड्स के उपचार तथा रोकथाम के क्षेत्र में यह बिल एक ऐतिहासिक बिल है.यह भारत में एचआईवी/एड्स के क्षेत्र में पहला क़ानून है.
भारत में एचआईवी/एड्स के अधिकतर संक्रमित लोग गरीब तथा निचले तबके से ताल्लुक रखते हैं. और यह संक्रमण उनकी जिंदगी को और कठिन बना देता है. तो भारत में ऐसे कानून, जो उनके इलाज, देखभाल का ख्याल रखे  तथा उन्हें किसी भी तरह के  भेदभाव से मुक्त करे, की जरूरत थी. इसके अलावा यह बिल भारत के  लोकतंत्र को भी मजबूत करता है क्योकि यह सभी को बराबर अधिकार देने के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है.
हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि यह बिल भारत से एचआईवी/ एड्स के मामलो को पूर्णतया ख़त्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. क्योकि बहुत सरे एचआईवी के मामले LGBTQI समुदाय से भी है. तो ये उम्मीद है यह बिल इस समुदाय के लोगो के अधिकारों के लिए भी एक प्लेटफार्म शुरू करने में मदद करेगा.

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