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भारतीय वैज्ञानिकों ने कवक की नई प्रजातियां खोजीं, कैंसर उपचार में लाभ का दावा

एल-एस्पेरेजिनेज़ नामक एंज़ाइम का उपयोग एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया नामक ब्लड कैंसर के उपचार की एंज़ाइम-आधारित कीमोथेरेपी में किया जाता है.

Feb 28, 2019 17:26 IST
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प्रतीकात्मक फोटो

हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में कवक की नई प्रजातियों की तलाश की है. वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इस कवक से ब्लड कैंसर का उपचार करने में सहायता मिल सकती है. इन खास कवक प्रजातियों से ब्लड कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाले एंज़ाइम L-एस्पेरेजिनेज़ (L-asparaginase) का उत्पादन किया जा सकता है.

राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (NCPOR), गोवा और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में कवक प्रजातियों के विभिन्न नमूने एकत्रित किये थे. इनमें शामिल लगभग 30 नमूनों में शुद्ध एल-एस्पेरेजिनेज़ पाया गया है.

मुख्य बिंदु

•    एल-एस्पेरेजिनेज़ नामक एंज़ाइम का उपयोग एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया नामक ब्लड कैंसर के उपचार की एंज़ाइम-आधारित कीमोथेरेपी में किया जाता है.

•    वर्तमान में कीमोथेरेपी के लिये एल-एस्पेरेजिनेज़ का उत्पादन साधारण जीवाणुओं जैसे - एश्चेरीचिया कोलाई (Escherichia coli) और इरवीनिया क्राइसेंथेमी (Irveenia Kraisenthemi) से किया जाता है.

•    वैज्ञानिकों के अनुसार अंटार्कटिका में खोजे गए कवक से शुद्ध एल-एस्पेरेजिनेज़ प्राप्त किया जा सकता है तथा सस्ते इलाज के साथ दोनों अन्य एंज़ाइमों से होने वाले दुष्प्रभावों को भी रोका जा सकता है.

•    खोजी गई अंटार्कटिका कवक प्रजातियाँ अत्यंत ठंडे वातावरण में वृद्धि करने में सक्षम सूक्ष्मजीवों के अंतर्गत आती हैं.

महत्व

एल-एस्पेरेजिनेज़ एंज़ाइम ब्लड कैंसर के इलाज में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाने वाली कीमोथेरेपी दवाओं में से एक है. यह कैंसर कोशिकाओं में पाए जाने वाले प्रोटीन के संश्लेषण के लिये आवश्यक एस्पेरेजिन नामक अमीनो अम्ल की आपूर्ति को कम करता है. इस प्रकार यह एंज़ाइम कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि और प्रसार को रोकता है.

 

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