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भारत ने इंटरसेप्टर मिसाइल का सफल परीक्षण किया

परीक्षण के उपरांत कुछ समय बाद पृथ्वी रक्षा यान (पीडीवी) इंटरसेप्टर और लक्ष्य मिसाइल दोनों सफलतापूर्वक जुड़ गए थे. इससे पहले डीआरडीओ ने जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल ‘प्रहार’ को टेस्ट किया था.

Sep 24, 2018 15:26 IST

भारत ने 23 सितंबर 2018 को ओडिशा के मिसाइल परीक्षण केन्द्र से इंटरसेप्टर मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. इसके साथ ही भारत ने दो परतों वाली बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है.

इंटरसेप्टर मिसाइल को अब्दुल कलाम द्वीप से रात में आठ बजकर पांच मिनट पर प्रक्षेपित किया गया. इसे पहले व्हीलर द्वीप के नाम से जाना जाता था. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक ने कहा कि यह पृथ्वी रक्षा यान (पीडीवी) मिशन पृथ्वी के वायुमंडल मं  50 किमी से ऊपर की ऊंचाई पर लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए है.

इंटरसेप्टर मिसाइल की मुख्य विशेषताएं


•    परीक्षण के उपरांत कुछ समय बाद पृथ्वी रक्षा यान (पीडीवी) इंटरसेप्टर और लक्ष्य मिसाइल दोनों सफलतापूर्वक जुड़ गए थे.

•    पीडीवी मिशन पृथ्वी के वायुमंडल में 50 किलोमीटर से ऊपर की ऊंचाई पर लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए है.

•    इस तकनीक को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है.

•    परीक्षण के दौरान राडार से आ रहे आंकड़ों का कंप्यूटर नेटवर्क ने सटीक विश्लेषण किया और आने वाली लक्ष्य मिसाइल को मार गिराया गया.

•    सूत्रों के मुताबिक इंटरसेप्टर मिसाइल उच्च दक्षता वाले इंट्रियल नेविगेशन प्रणाली (आईएनएस) से निर्देशित हुई.

•    इससे पूर्व 11 फरवरी 2017 को इसी स्थान से इंटरसेप्टर का परीक्षण किया गया था.

टिप्पणी


भारत में ही बनने वाली इस इंटरसेप्टर मिसाइल के अलावा कई और मिसाइल भी पहले सफलतापूर्वक जांची जा चुकी है. इससे पहले डीआरडीओ ने जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल ‘प्रहार’ को टेस्ट किया था. ‘प्रहार’ पूरी तरह से स्वदेशी अत्याधुनिक मिसाइल है. भारतीय सेना में ‘प्रहार’ जैसी मिसाइल के शामिल होने से सेना की मारक क्षमता में इजाफा होगा साथ ही यह युद्ध प्रणाली के लिए ज़रूरी अल्ट्रा-मॉर्डन टेक्नोलॉजी को भी बढ़ाने में सक्षम है. इंटरसेप्टर का नाम पृथ्वी डिफेंस व्हीकल (पीडीवी) मिशन दिया गया.

 

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