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भरोसेमंद बिजली आपूर्ति में भारत 80वें स्थान पर: विश्व बैंक रिपोर्ट

विश्व बैंक रिपोर्ट में कहा गया है कि हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टिट्यूट के अनुसार वर्ष 2015 में कोयला आधारित उर्जा संयंत्रों होने वाले वायु प्रदूषण के कारण भारत में 82,900 लोगों की मौत हुई.

Dec 20, 2018 12:45 IST

विश्व बैंक द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली वितरण में पिछले कुछ साल से उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद भारत अभी भी विद्युत की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिये चुनौतियों का सामना कर रहा है तथा भरोसेमंद आपूर्ति अभी भी कम है.

बिजली के विषय में विश्वबैंक की क्षेत्रीय रिपोर्ट ‘इन द डार्क: हाऊ मच डू पावर सेक्टर डिस्टॉर्शन्स कॉस्ट साऊथ एशिया’ के अनुसार भारत ने पिछले कुछ साल में घरों में बिजली पहुंचाने तथा बिजली कमी दूर करने में उल्लेखनीय प्रगति की है.

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

•    विश्व बैंक द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार 137 देशों में से भारत भरोसेमंद बिजली आपूर्ति के लिए 80वें स्थान पर है.

•    रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के हवाले से कहा गया है कि बढ़ती आबादी, तेजी से शहरीकरण और अर्थव्यवस्था में औसत सात प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ देश में बिजली की मांग 2018 से 2040  के बीच लगभग तीन गुनी हो जाएगी.

 


•    रिपोर्ट में कहा गया है कि हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टिट्यूट के अनुसार वर्ष 2015 में कोयला आधारित उर्जा संयंत्रों होने वाले वायु प्रदूषण के कारण भारत में 82,900 लोगों की मौत हुई.

•    रिपोर्ट के अनुसार भारत में कोयला ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है जबकि कोयला जैसे जीवाश्म ईंधन से उत्पन्न वायु प्रदूषण एक अन्य बड़ी चुनौती है.

•    विश्व बैंक के अनुसार नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के महत्वकांक्षी कार्यक्रमों के बावजूद भारत अभी भी कुल बिजली का 75 प्रतिशत कोयले से उत्पादित करता है.

•    इसके अतिरिक्त उद्योग अपने उपयोग के लिये भी कोयला और डीजल जनरेटरों से बिजली पैदा करते हैं.

•    रिपोर्ट के अनुसार 1947 में आज़ादी के बाद भारत ने बुनियादी उद्योग बिजली क्षेत्र के विकास के लिये विधायी पहल शुरू की. इसके तहत आने वाले समय में कई सुधार किये गये लेकिन इन सबके बावजूद राज्य की बिजली कंपनियां अभी भी प्रदर्शन में सुधार के लिये संघर्ष कर रहे हैं.

•    रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के बिजली उत्पादन क्षेत्र में राज्य सरकार के अकुशल बिजलीघर, पारेषण क्षेत्र में कम निवेश, बिजली की कम कीमत तथा वितरण कंपनियों को नुकसान जैसी कुछ प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

 



विश्व बैंक के बारे में जानकारी

विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना एक साथ 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन के दौरान हुई थी. उस समय इसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध और विश्ववयापी आर्थिक मंदी से जूझ रहे देशों में आई आर्थिक मंदी से निपटना था. वर्तमान में 180 देश इस संस्थाथ के सदस्ये हैं विश्वे बैंक के सदस्यी बनने के लिए देश को आईएमएफ का सदस्यइ होना भी जरूरी है. भारत को सबसे पहली बार विश्वक बैंक द्वारा वर्ष 1948 में 64 बिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण दिया गया था.

 

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