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विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2019: भारत ने 2018 में मलेरिया के मामलों में सबसे बड़ी कमी दर्ज की

रिपोर्ट के अनुसार, देश में साल दर साल इस बुखार के मामलों और इससे होने वाली मौतों की संख्या में कमी तथा वंचित लोगों को इस बीमारी के प्रभाव से बचाने के प्रयासों हेतु सराहना की है.

Dec 7, 2019 13:50 IST
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World Malaria Report 2019 in hindi: विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2019 के अनुसार, भारत ने साल 2017 और साल 2018 के बीच मलेरिया के मामलों में भारी कमी दर्ज की. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2019 में यह खुलासा किया गया है. डब्ल्यूएचओ ने यह रिपोर्ट 4 दिसंबर 2019 को जारी किया था.

डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, मलेरिया से अत्यधिक प्रभावित 11 देशों में भारत उन दो राष्ट्रों में शामिल था, जहां साल 2017 और साल 2018 के बीच इस बुखार के मामलों में बड़ी गिरावट आई. रिपोर्ट के अनुसार, देश में साल दर साल इस बुखार के मामलों और इससे होने वाली मौतों की संख्या में कमी तथा वंचित लोगों को इस बीमारी के प्रभाव से बचाने के प्रयासों हेतु सराहना की है.

रिपोर्ट के अनुसार, इस सूची में शामिल देशों में युगांडा ने साल 2018 में मलेरिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है. रिपोर्ट के मुताबिक विश्वभर में कुल 228 मिलियन मलेरिया के मामले सामने आए हैं. अफ्रीका और भारत में साल 2017-18 के बीच मलेरिया के मामलों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई.

विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2019 से संबंधित मुख्य बिंदु

वैश्विक स्तर पर साल 2015 से साल 2018 तक मलेरिया से प्रभावित देशों में केवल 31 देशों में मलेरिया के मामलों में कमी आई है.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मलेरिया की मामलों में साल 2018 में साल 2017 के मुकाबले 28 फीसदी की कमी आई है.

रिपोर्ट के अनुसार, इस सूची में शामिल देशों में भारत और युगांडा ने साल 2018 में मलेरिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है.

भारत ने साल 2016 और साल 2017 की अवधि में मलेरिया के मामलों में 24 फीसदी की कमी दर्ज की थी.

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रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने साल 2000 से मलेरिया के मामलों को आधे से भी ज्यादा कम करने में सफलता हासिल की है. भारत ने मलेरिया से होने वाली मौतों को दो-तिहाई से भी ज्यादा कम किया गया है.

विश्व भर में मलेरिया के कुल मामलों का लगभग 50 फीसदी मात्र 6 देशों में पाए गए. इनमें नाइजीरिया (24 फीसदी), कांगो (11 फीसदी), तंजानिया (5 फीसदी), अंगोला (4 फीसदी), मोजाम्बिक (4 फीसदी) और नाइजर (4 फीसदी) शामिल हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, पांच वर्ष से कम की आयु वाले बच्चे सबसे अधिक संवेदनशील पाए गए हैं. आँकड़ों के मुताबिक, साल 2018 में मलेरिया से होने वाली मौतों में 67 फीसदी मौतें इसी आयु वर्ग में हुई हैं.

भारत सरकार ने साल 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है. भारत में मलेरिया के मामलों से निपटने हेतु मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है.

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