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भारत ने दी मालदीव में कनेक्टिविटी परियोजना के लिए 500 मिलियन अमेरीकी डॉलर की सहायता

यह 6.7 किमी का ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP) मालदीव में सबसे बड़ा सिविलियन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट होगा, जो माले को तीन पड़ोसी द्वीपों - गुल्हिफाहू, विलिंगिली, थिलाफुशी से जोड़ेगा.

Aug 14, 2020 14:35 IST
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 13 अगस्त 2020 को यह घोषणा की है कि, भारत सरकार मालदीव में प्रमुख कनेक्टिविटी परियोजना के कार्यान्वयन के लिए 400 मिलियन अमरीकी डॉलर क्रेडिट और 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर अनुदान के तौर पर देगी.

केंद्रीय विदेश मंत्री ने अपने मालदीव के समकक्ष अब्दुल्ला शाहिद के साथ व्यापक बातचीत के बाद यह घोषणा की.
अधिकारियों के अनुसार, यह 6.7 किमी का ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP) मालदीव में सबसे बड़ा सिविलियन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट होगा, जो माले को तीन पड़ोसी द्वीपों - गुल्हिफाहू, विलिंगिली, थिलाफुशी से जोड़ेगा.

मुख्य विशेषताएं

• मालदीव के राष्ट्रपति, इब्राहिम मोहम्मद ने सितंबर, 2019 में एस. जयशंकर के साथ मुलाकात के दौरान GMCP के लिए भारत से सहायता मांगी थी. इस कदम को मालदीव में सत्तारूढ़ एमडीपी (मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी) के एक प्रमुख चुनावी वादे के तौर पर भी देखा गया था.

• इस GMCP परियोजना में 6.7 किमी तक फैले एक पुल और कार्यवाहक लिंक का निर्माण शामिल होगा.

• माले को गुल्हिफाहू बंदरगाह और थिलाफुशी औद्योगिक क्षेत्र से जोड़ने वाली इस 6.7 किमी की पुल परियोजना से मालदीव की अर्थव्यवस्था को बदलने में मदद मिलेगी.

• हमारे विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देने के लिए भारत और मालदीव के बीच नियमित कार्गो फेरी सेवा की शुरुआत करने की भी घोषणा की.

• भारत और मालदीव के बीच लोगों-से-लोगों के गतिशील संबंधों को बढ़ावा देने और कायम रखने के लिए मालदीव के साथ हवाई यात्रा (एयर ट्रेवल बबल) को भी बढ़ावा दिया जायेगा. 

• भारत ने गुल्हिफाहू में एक बंदरगाह के निर्माण के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान करने का फैसला किया है.

भारत और मालदीव के बीच विकासशील संबंध

विदेश मंत्रालय के अनुसार, एक बार पूरा होने के बाद, लैंडमार्क GMCP चार द्वीपों के बीच कनेक्टिविटी को सुव्यवस्थित करेगा, जिससे रोजगार पैदा होगा, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और माले क्षेत्र में समग्र शहरी विकास को बढ़ावा देगा.

एस. जयशंकर ने कनेक्टिविटी और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और दो देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने के लिए मालदीव और भारत के बीच नौका सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला. इससे  व्यापारियों के लिए रसद लागत और यात्रा का समय भी कम हो जाएगा.

एक एयर बबल के निर्माण पर, विदेश मंत्रालय ने यह बताया कि, मालदीव ऐसा पहला पड़ोसी देश है जिसके साथ एक एयर बबल संचालित किया गया है. यह मालदीव में पर्यटन के आगमन और राजस्व को बढ़ाने के लिए भारत के समर्थन का प्रतीक है. आगामी 18 अगस्त को एयर बबल के तहत पहली उड़ान शुरू होने की उम्मीद है और स्वास्थ्य प्रोटोकॉल्स का सख्ती से पालन किया जाएगा.

इस बैठक के दौरान विदेश मंत्री ने वर्ष 2020-21 के लिए मालदीव के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए कोटा नवीनीकृत करने के बारे में भी अब्दुल्ला शाहिद को भारत के निर्णय की जानकारी दी. 

इसमें प्याज, चावल, आलू, गेहूं, चीनी, आटा, दाल, अंडे जैसी खाद्य सामग्री के साथ-साथ विभिन्न किस्म के पत्थर और नदी की रेत शामिल है. यह कोटा खाद्य सुरक्षा और आवश्यक निर्माण वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा जिससे मालदीव में निश्चितता और मूल्य स्थिरता कायम रहेगी.