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रेलों की गति बढ़ाने हेतु भारत और जर्मन रेलवे ने संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी की उपस्थिति में 10 अक्टूबर, 2017 को रेल भवन में प्रयोजन की संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए. व्यवहार्यता अध्ययन की लागत में भारत सरकार के रेल मंत्रालय और जर्मनी की सरकार की 50 - 50 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी.

Oct 11, 2017 12:17 IST
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रेलों की गति 200 किमी प्रति घंटा तक बढ़ाने हेतु भारतीय रेलवे ने जर्मन रेलवे के साथ प्रयोजन की संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. दोनों देशों के मध्य समझौता चेन्नई - काजीपेट कॉरिडोर का व्यवहार्यता अध्ययन करने हेतु किया गया है.

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी की उपस्थिति में 10 अक्टूबर, 2017 को रेल भवन में प्रयोजन की संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए. व्यवहार्यता अध्ययन की लागत में भारत सरकार के रेल मंत्रालय और जर्मनी की सरकार की 50 - 50 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी.

व्यवहार्यता अध्ययन की अंतिम शर्तों को एक अलग समझौता पर हस्ताक्षर करके पूरा किया जाएगा. इस परियोजना पर तीन चरणों में 22 महीने की अवधि में कार्य को सम्पन्न किया जाएगा.

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उद्देश्य-
प्रयोजन की वर्तमान संयुक्त घोषणा का उद्देश्य विशेष रूप से अर्ध उच्च गति (एसएचएस) रेल के प्राथमिकता वाले क्षेत्र में उपलब्धि की दिशा में सहयोग मजबूत करना है, यात्री सेवाओं का चेन्नई - काज़िपेट कॉरिडोर (643 किमी) पर 200 किलोमीटर की अर्ध उच्च गति का उन्नयन करना है.

  • इससे पूर्व रेल क्षेत्र के सहयोग के बारे में एक प्रोटोकॉल पर जर्मनी में मई, 2016 में दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए. इस समझौते के तहत निम्नलिखित प्राथमिकता क्षेत्र सम्मिलित हैं-
  • डिजाइन और वास्तविक रूप से चल रही संचालित गति बढ़ाना
  • यात्रियों और माल परिवहन में रेलवे लाइनों की क्षमता बढ़ाना
  • घटनाओं और दुर्घटनाओं को रोकने हेतु परिचालन सुरक्षा में सुधार
  • ऊर्जा कुशल रेलवे परिचालनों के माध्यमों द्वारा परिचालन लागत घटाना
  • रेलवे के बारे में जानकारी बढ़ाने के उद्देश्य के साथ भारत और जर्मनी में शिक्षा और प्रशिक्षण सुविधाओं के बारे में सहयोग
  • उच्च गति और अर्ध उच्च गति नेटवर्क के विस्तार में सहायता करना;
  • सक्षम नियामक प्राधिकरणों की भागीदारी से भारत के लिए उपयोगकर्ता उन्मुख मानकों और मानदंडों का संयुक्त विकास करना
  • बहुआयामी यातायात हेतु लंबे प्रखंडों पर गति बढ़ाना
  • आधुनिक लाइनों पर स्टेशनों के पुनर्विकास करना

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 चेन्नई-काज़िपेट कॉरिडोर-

  • मार्ग : चेन्नई-गुडुर जं., नेल्लोर-तेनाली जं., विजयवाड़ा जं., वारंगल-काजीपेट जं. कॉरिडोर की कुल लम्बाई - 643 किलोमीटर (135 किलोमीटर दक्षिण रेलवे में और 508 किलोमीटर दक्षिण मध्य रेलवे में) और पूरा कॉरिडोर विद्युतीकृत है. जिसमे तीन डिवीजन - चेन्नई (135 किमी), विजयवाड़ा (311 किमी) और सिकंदराबाद (197 किमी) पड़ते हैं.
  • दक्षिणी रेलवे में इस कॉरिडोर पर अधिकतम स्वीकृत गति 110 किमी प्रति घंटा है और दक्षिण मध्य रेलवे में 120 किमी प्रति घंटा है.
  • इस कॉरिडोर में 216 (दक्षिणी रेलवे -68 और दक्षिण मध्य रेलवे-148) लेवल क्रॉसिंग हैं और सभी मानवीकृत हैं.
  • इस कॉरिडोर पर पुलों की संख्या 1979 (दक्षिण रेलवे - 514 और दक्षिण मध्य रेलवे -1465) हैं.
  • काजीपेट से चेन्नई तक केवल एक सीधी ट्रेन संख्या 12760/ चारमीनार एसएफ़ एक्सप्रेस है जो अपने सफर में 11 घंटे 20 मिनट लेती है और 57 किलोमीटर प्रति घंटा की औसत गति से चलती है और 13 स्टॉपेज पर रूकती है.
  • अधिकांश ट्रेनें वारंगल से चेन्नई (638 किमी) के लिए चलती हैं. सबसे तेज गति की ट्रेन संख्या 12433/12434 राजधानी एक्सप्रेस 75.3 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति से 8 घंटे 29 मिनट में यह दूरी तय करती है और केवल विजयवाड़ा में रूकती है
  • मार्ग पर कुल स्टेशनों की संख्या - 108 (दक्षिणी रेलवे -28 और दक्षिण मध्य रेलवे -80).
  • दक्षिणी रेलवे - स्वचालित / पूर्णतया सिग्नल युक्त, दक्षिण मध्य रेलवे - मुख्य रूप से मुकम्मल और एमएसीएलएस.

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