International Women’s Day: जानें क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

संयुक्त राष्ट्र संघ ने साल 1996 से इस दिवस को एक स्पेशल थीम के साथ मनाना शुरू किया. इसके बाद हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को अलग थीम के साथ मनाया जाता है.

Created On: Mar 8, 2021 10:48 ISTModified On: Mar 8, 2021 10:55 IST

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) प्रत्येक साल 8 मार्च को दुनियाभर में मनाया जाता है. इसे पहली बार अमेरिका के न्यूयार्क शहर में 28 फरवरी 1909 को मनाया गया था. इसका आयोजन अमेरिका के सोशलिस्ट पार्टी ने किया था. ये दिन राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु मनाया जाता है.

इस दिन लोगों को लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरुक भी किया जाता है. इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और उनके अधिकारों को बढ़ावा देना है. यह दिवस हर वर्ष एक नए थीम के साथ मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र संघ ने साल 1996 से इस दिवस को एक स्पेशल थीम के साथ मनाना शुरू किया. इसके बाद हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को अलग थीम के साथ मनाया जाता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विटर के जरिए महिला सशक्तीकरण की बात करते हुए लिखा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हमारी अदम्य नारीशक्ति को सलाम! भारत को हमारे देश की महिलाओं की कई उपलब्धियों पर गर्व है. उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने के लिए काम करने का मौका मिलना हमारी सरकार के लिए गर्व की बात है.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम?

प्रत्येक साल की तरह इस साल भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष थीम के साथ मनाया जा रहा है. इस साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का थीम- वुमेन इन लीडरशिप: अचिविंग एन इक्वल फ्यूचर इन ए कोविड-19 वर्ल्ड” ('Women in leadership: an equal future in a COVID-19 world') की थीम पर मनाया जा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास

सर्वप्रथम अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया था. पहली बार 28 फरवरी 1909 में इस दिवस को मनाया गया. इसके बाद साल 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के एक सम्मेलन में इसे अंतरराष्ट्रीय दर्जा देने की बात कही गयी. हालांकि, उस समय इस दिवस का उद्देश्य कुछ और था. दरअसल, उस समय महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था. इसी परंपरा को समाप्त करने के लिए इस तिथि की शुरूआत हुई. साल 1917 में सोवियत संघ ने इस दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया. फिर अन्य देशों ने भी धीरे-धीरे इस परंपरा को अपनाया.

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