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IRCTC का IPO निवेशकों में हिट हुआ, किया गया 112 गुना सब्सक्राइब

आईआरसीटीसी के इस आईपीओ में हरेक शेयर का दाम लगभग 315 रुपये से लेकर 320 रुपये के बीच रखा गया था. इस आईपीओ में लगभग 1.60 लाख शेयर कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे गये हैं.

Oct 4, 2019 09:41 IST
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इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटी) के आईपीओ ने आखिरी दिन निवेशकों के बीच एक बड़ी हिट थी. आईपीओ के आखिरी दिन निवेशकों के बीच 112 गुना तक सब्सक्राइब किया गया. आईआरसीटीसी का आईपीओ 30 सितंबर से 03 अक्टूबर तक के लिए खोला गया था.

कंपनी की ओर से आईपीओ में लगभग दो करोड़ शेयर बिक्री के लिए रखे गये थे, जबकि निवेशकों की ओर से लगभग 225 करोड़ शेयरों के लिए मांग मिला. आईआरसीटीसी के इस आईपीओ में हरेक शेयर का दाम लगभग 315 रुपये से लेकर 320 रुपये के बीच रखा गया था. इस आईपीओ में लगभग 1.60 लाख शेयर कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे गये हैं. आईपीओ खुलने के साथ ही लगभग 2.01 करोड़ शेयर आमंत्रण बिक्री के तहत पेश किये गये थे.

मुख्य बिंदु:

• योग्य संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में करीब 108.79 गुना, गैर-संस्थागत निवेशकों के मामले में करीब 354.52 गुना तथा खुदरा निवेशकों के मामले में करीब 14.65 गुना सब्सक्राइब मिला है.

• आईआरसीटीसी आईपीओ को सभी श्रेणियों के निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है.

• सरकार ने आईपीओ के तहत 12.6 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश कर रही है. इससे 645 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है.

• इस आईपीओ का प्रबंधन येस सिक्यॉरिटीज (इंडिया), एसबीआई कैपिटल मार्केट्स तथा आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स ऐंड सिक्यॉरिटीज देख रही है.

क्या है आईपीओ?

आईपीओ, जब एक कंपनी अपने शेयर पहली बार जनता के लिए जारी करती है तो उसे ‘आइपीओ’ या ‘सार्वजनिक प्रस्ताव’ कहा जाता है. यह ज्यादातर छोटी, नई कंपनियों द्वारा जारी किए जाते हैं. ये नई कंपनियां जो अपने व्यापार को बढाने के लिए पूँजी चाहती हैं. आईपीओ यह बड़ी निजी-स्वामित्व वाली कंपनियों द्वारा भी जारी किये जा सकते हैं जो सार्वजनिक बाज़ार में कारोबार करना चाहती हैं.

क्या है आईपीओ प्राइस बैंड?

ज्यादातर कंपनियां जिन्हें आईपीओ लाने की अनुमति है, वे अपने शेयरों की कीमत स्वयं ही तय कर सकती हैं. लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुछ दूसरी क्षेत्रों की कंपनियों को सेबी तथा बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक से अनुमति लेनी होती है. कंपनी के निदेशक मंडल, बुकरनर के साथ मिलकर प्राइस बैंड तय करता है. भारत में 20 प्रतिशत प्राइस बैंड की अनुमति है. इसका अर्थ है कि प्राइस बैंड की अधिकतम सीमा फ्लोर प्राइस से 20 प्रतिशत से ज्यादा ऊपर नहीं हो सकती है.

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